उत्तराखंड: चमोली जिले के कर्णप्रयाग में पिछले दिनों हुई एक घटना के विरोध में पंजाब से आए कुछ निहंग सिख श्रद्धालु रुद्रप्रयाग के नगरासू स्थित गुरुद्वारे की तीसरी मंजिल पर एकत्र हो गए। शनिवार शाम से जारी इस स्थिति को संभालने और आपसी बातचीत के जरिए मामला शांत कराने के लिए पुलिस और प्रशासन के बड़े अधिकारी मौके पर जुटे। सुरक्षा के लिहाज से गुरुद्वारा परिसर में पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया। स्थिति पर नजर रखने के लिए रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के साथ-साथ गढ़वाल आयुक्त भी मौके पर पहुंचे।
क्यों शुरू हुआ यह आंतरिक विवाद?
बदरीनाथ राजमार्ग पर रुद्रप्रयाग और गौचर के बीच स्थित इस गुरुद्वारे की देखरेख करने वाले सरदार बेअंत सिंह ने बताया कि पंजाब के मोहाली से निहंगों का एक दल शनिवार शाम करीब 4:00 बजे यहां पहुंचा था। उन्होंने कर्णप्रयाग घटना के विरोध में आने वाले अन्य सिख प्रदर्शनकारियों के ठहरने के लिए गुरुद्वारा प्रबंधन से 50-60 कमरों की व्यवस्था करने को कहा था। गुरुद्वारा प्रबंधन ने अचानक इतने कमरों की व्यवस्था करने में असमर्थता जताई, जिसे लेकर दोनों पक्षों के बीच बहस हो गई। इसके बाद निहंग श्रद्धालु ऊपर चले गए और तीसरी मंजिल के रास्ते को बंद कर वहां एकत्र हो गए।
गिरफ्तार साथियों को छोड़ने की मांग
पुलिस के अनुसार, ये श्रद्धालु 16 जून को चमोली जिले के कर्णप्रयाग बाजार में गाड़ी खड़ी करने को लेकर हुए एक विवाद के बाद गिरफ्तार किए गए अपने साथियों को रिहा करने की मांग कर रहे हैं। उस घटना के सिलसिले में पंजाब के मोहाली के रहने वाले चार सिख श्रद्धालुओं को गिरफ्तार किया गया था। ये निहंग श्रद्धालु उन्हीं की रिहाई और दूसरे पक्ष पर भी कार्रवाई की मांग पर अड़े हैं।
मामले को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने का प्रयास
प्रशासन इस पूरे मामले को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने का प्रयास कर रहा है। रुद्रप्रयाग की पुलिस अधीक्षक नीहारिका तोमर सहित अन्य अधिकारियों ने तीसरी मंजिल पर मौजूद श्रद्धालुओं से बातचीत की है। पुलिस ने उन्हें गुरुद्वारे से सुरक्षित पंजाब वापस पहुंचाने का भरोसा भी दिया है। अधिकारी लगातार संवाद कर रहे हैं, ताकि इस अंदरूनी गतिरोध को जल्द से जल्द खत्म किया जा सके।
ये भी पढ़ें-