नई दिल्लीः एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के एक बयान ने गृह मंत्री अमित शाह के अगले राजनीतिक और प्रशासनिक लक्ष्य को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। ओवैसी ने कहा कि अमित शाह "कच्चा काम नहीं करते" और बिना दूरगामी योजना के कोई कदम नहीं उठाते। अमित शाह की कार्यशैली और ओवैसी के बयान को लेकर 'कॉफी पर कुरुक्षेत्र' कार्यक्रम में चर्चा की गई। इस दौरान कार्यक्रम में शो के एंकर और इंडिया टीवी के सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर सौरव शर्मा के साथ गेस्ट के रूप में वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सिंह, वरिष्ठ पत्रकार अनंत विजय और इंडिया टीवी के पॉलिटिकल एडिटर देवेंद्र पारासर मौजूद रहे।
इन फैसलों के लिए अमित शाह को याद करेंगे लोग
कार्यक्रम में कहा गया कि पिछले एक दशक में अमित शाह ने कई ऐसे फैसलों को अंजाम दिया जिन्हें लंबे समय तक कठिन माना जाता था। उत्तर प्रदेश में भाजपा की चुनावी सफलता, पश्चिम बंगाल में संगठन का विस्तार, नक्सलवाद के खिलाफ अभियान, अनुच्छेद 370 हटाने का निर्णय और राम मंदिर के बाद देशभर में शांति बनाए रखना उनकी बड़ी उपलब्धियों के रूप में गिनाया गया। इसके अलावा राजस्थान-हरियाणा के बीच पानी के समझौते और चार राज्यों के बीच नर्मदा जल बंटवारे जैसे मुद्दों को भी उनकी प्रशासनिक क्षमता का उदाहरण बताया गया।
अमित शाह योजना और परिणाम पर रखते हैं पैनी नजर
पैनलिस्टों के अनुसार अमित शाह की सबसे बड़ी विशेषता उनकी बारीक योजना और परिणाम पर लगातार नजर रखना है। उदाहरण के तौर पर बताया गया कि वे वर्षों पहले लगाए गए पौधों की स्थिति तक याद रखते हैं और संबंधित अधिकारियों से उनकी देखभाल की जानकारी लेते हैं। इसी कार्यशैली को उनके बड़े फैसलों की सफलता का आधार माना गया।
चर्चा में यह भी कहा गया कि वर्तमान समय में अमित शाह के दो बड़े लक्ष्य साफ दिखाई देते हैं। पहला, देश में ड्रग्स नेटवर्क पर प्रभावी नियंत्रण और दूसरा, अवैध घुसपैठ की समस्या का समाधान। वक्ताओं का मानना था कि इन दोनों लक्ष्यों को पूरा करने के लिए नागरिकों की पहचान सुनिश्चित करने की दिशा में आगे कदम बढ़ सकते हैं। इसी संदर्भ में एनआरसी को लेकर भी चर्चा हुई और कहा गया कि नागरिकता की स्पष्ट पहचान किसी भी देश की सुरक्षा और प्रशासन के लिए आवश्यक मानी जाती है।
कार्यक्रम में अनुच्छेद 370 हटाने की पूरी प्रक्रिया को अमित शाह की योजना, गोपनीयता और निर्णय क्षमता का सबसे बड़ा उदाहरण बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि हर संभावित परिस्थिति का पहले से आकलन कर तैयारी की गई थी, जिसके कारण इतना बड़ा फैसला शांतिपूर्ण तरीके से लागू हो सका। इसके साथ ही विदेशी फंडिंग पर नियंत्रण के लिए एफसीआरए में किए गए बदलावों को भी महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया गया।
बीजेपी के लिए पंजाब सबसे अहम राज्य
कार्यक्रम के दौरान पंजाब में राजनीतिक माहौल पर भी चर्चा की गई। पैनलिस्टों का मानना था कि भाजपा के लिए पंजाब आने वाले समय में सबसे महत्वपूर्ण राज्यों में से एक हो सकता है। इसके पीछे केवल चुनावी कारण नहीं बल्कि सीमावर्ती राज्य होने के कारण सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को भी अहम बताया गया। सीमा सुरक्षा, ड्रग्स तस्करी, घुसपैठ और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय को अमित शाह की प्राथमिकताओं में शामिल बताया गया।
पूरी चर्चा का निष्कर्ष यही रहा कि अमित शाह की कार्यशैली में दूरदृष्टि, विस्तृत योजना, दृढ़ संकल्प और परिणाम हासिल करने की स्पष्ट रणनीति दिखाई देती है। इसी कारण उनके विरोधी भी यह स्वीकार करते हैं कि वे बिना पूरी तैयारी के कोई बड़ा कदम नहीं उठाते। आने वाले समय में उनके अगले कदम क्या होंगे, इस पर राजनीतिक गलियारों में लगातार अटकलें बनी हुई हैं।
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(डिस्क्लेमरः यह आर्टिकल कार्यक्रम में हुई चर्चा पर आधारित है और कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए गए विचार मेहमानों के निजी विचार हैं।)
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