अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की घटना सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश का राजनीतिक माहौल गरमा गया है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस जहां बीजेपी, आरएसएस और विश्न हिंदू परिषद पर हमलावर हैं, वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बीजेपी के नेता विपक्षी दलों को करारा जवाब दे रहे हैं। 'कॉफी पर कुरुक्षेत्र' में हिंदुत्व और सनातन पर चर्चा हुई। इस दौरान कार्यक्रम में शो के एंकर और इंडिया टीवी के सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर सौरव शर्मा के साथ गेस्ट के रूप में वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सिंह, वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता और राजनीतिक विश्लेषक शांतनु गुप्ता मौजूद रहे।
हिंदुत्व की राजनीति पर कार्यक्रम में चर्चा
कार्यक्रम में चर्चा की शुरुआत अरविंद केजरीवाल की प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही गई बातों से हुई। जिसमें उन्होंने यह दावा किया कि आम आदमी पार्टी ही देश की असली सनातनी पार्टी है। इस बयान को केवल एक राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि बदलते राजनीतिक माहौल का संकेत माना जा रहा है। चर्चा में यह बात सामने आई कि अब नेताओं को यह महसूस होने लगा है कि हिंदू समाज की राजनीतिक चेतना पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हो चुकी है। पहले हिंदू आस्था की बात करने वालों को सांप्रदायिक कहा जाता था, लेकिन अब वही स्थिति बदलती दिखाई दे रही है। कई विपक्षी दल भी अब मंदिर, सनातन और धार्मिक प्रतीकों के जरिए अपनी छवि बदलने की कोशिश कर रहे हैं।
कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि बीजेपी ने लंबे समय से हिंदुत्व की राजनीति को लगातार आगे बढ़ाया और अपने मूल एजेंडे से पीछे नहीं हटी। वर्षों तक चुनावी हार के बावजूद पार्टी ने अपना रास्ता नहीं बदला। राम मंदिर आंदोलन से लेकर आज तक उसी विचारधारा पर टिके रहने का परिणाम है कि जनता बीजेपी की ओर देख रही है। दूसरी ओर विपक्ष के सामने चुनौती यह है कि हिंदू वोटों के उस बड़े वर्ग में अब उसके लिए राजनीतिक जगह पहले जैसी नहीं बची है।
कार्यक्रम में पंजाब की राजनीति का भी उल्लेख किया गया, जहां अरविंद केजरीवाल द्वारा भजन संध्या, मंदिरों और धार्मिक आयोजनों पर जोर देने को राजनीतिक रणनीति के रूप में देखा गया। हालांकि चर्चा में यह भी राय रखी गई कि पंजाब की सामाजिक और धार्मिक परिस्थितियां अलग हैं, इसलिए वहां इस रणनीति से अपेक्षित लाभ मिलना आसान नहीं होगा।
अब नेताओं के लिए राजनीतिक रुख छिपाना आसान नहीं
कार्यक्रम में 2014 के बाद बदली राजनीतिक परिस्थितियों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। वक्ताओं का कहना था कि पहले चुनावी राजनीति जातीय और समुदाय आधारित समीकरणों पर अधिक निर्भर थी, जबकि अब हिंदुत्व का प्रभाव बढ़ा है। साथ ही यह भी कहा गया कि सोशल मीडिया के दौर में पुराने बयानों और राजनीतिक रुख को छिपाना आसान नहीं रह गया है, इसलिए जनता नेताओं की नीति और नियत दोनों का आकलन करती है।
जनता को मिल रहा सीधा फायदा
चर्चा में वक्ताओं ने सरकारी योजनाओं और सामाजिक न्याय पर भी अपने विचार रखे। वक्ताओं के अनुसार, गरीबों को मुफ्त राशन, शौचालय, पक्के घर और अन्य सुविधाओं का सीधा लाभ मिलने से पारंपरिक जातीय राजनीति का प्रभाव कुछ हद तक कम हुआ है। लोगों को अब यह महसूस होने लगा है कि सरकारी योजनाएं सीधे उनके जीवन में बदलाव ला रही हैं।
चर्चा में यह निष्कर्ष सामने आया कि देश की राजनीति लगातार बदल रही है। हिंदुत्व, सनातन, विकास और कल्याणकारी योजनाएं अब चुनावी विमर्श के प्रमुख विषय बन चुके हैं। ऐसे में सभी राजनीतिक दल अपने-अपने तरीके से नई राजनीतिक परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन जनता अब केवल बयानों से नहीं, बल्कि नेताओं की निरंतरता, विश्वसनीयता और पिछले रिकॉर्ड के आधार पर भी निर्णय ले रही है।
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(डिस्क्लेमरः यह आर्टिकल कार्यक्रम में हुई चर्चा पर आधारित है और कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए गए विचार मेहमानों के निजी विचार हैं।)
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