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मुजफ्फरनगर ट्रेन हादसा: प्रभु का अल्टिमेटम, शाम तक बताओ कौन है दोषी

 Written By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Aug 20, 2017 01:47 pm IST,  Updated : Aug 20, 2017 01:47 pm IST

कलिंग-उत्कल एक्सप्रेस दुर्घटना के बाद रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने रेलवे के अधिकारियों से शाम तक जवाबदेही तय करने का अल्टिमेटम दिया है।

Muzaffarnagar Train Accident | PTI Photo- India TV Hindi
Muzaffarnagar Train Accident | PTI Photo

खतौली: कलिंग-उत्कल एक्सप्रेस दुर्घटना के बाद रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने रेलवे के अधिकारियों से शाम तक जवाबदेही तय करने का अल्टिमेटम दिया है। मुजफ्फरनगर ट्रेन हादसे के लिए रेलवे की लापरवाही को जिम्मेदार बताते हुए विपक्ष लगातार प्रभु के इस्तीफे की मांग कर रहा है। रेल मंत्री ने शनिवार को ही हादसे की जांच के आदेश दे दिए थे। जांच के आदेश देते हुए प्रभु ने कहा था कि यदि इस मामले में किसी भी प्रकार की चूक पता चली तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस भयानक हादसे में कम से कम 21 यात्रियों की मौत हो गई और 97 यात्री घायल हो गए।

रेल हादसे के बाद मुखर विपक्ष ने सुरेश प्रभु के इस्तीफे की मांग की है। जहां राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू यादव और बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने प्रभु के इस्तीफे की मांग की है, वहीं कांग्रेस ने 2014 के बाद हुए रेल हादसों की लिस्ट जारी करते हुए केंद्र सरकार से सवाल किया है कि आखिर वह कब जागेगी। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट्स पर ट्वीट्स करते हुए केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए पूछा है कि मई 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से अभी तक 27 रेल हादसे हो चुके हैं जिनमें 259 लोगों की जान गई है और 899 घायल हुए हैं। उन्होंने सवाल किया कि सरकार कब जागेगी।

रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने रेलवे बोर्ड के चेयरमैन को आदेश दिया है कि रविवार शाम तक रेल हादसे की जवाबदेही तय की जाए। उन्होंने ट्वीट के जरिए जानकारी दी कि रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा घटनास्थल के लिए रवाना हो गए हैं। उन्होंने ट्वीट में लिखा है कि रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं सदस्य (यातायात) से कहा गया है कि वे राहत और बचाव अभियान की निगरानी करें। आपको बता दें कि इस बीच हादसे को लेकर अज्ञात लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। इनमें IPC की धारा 304 ए (लापरवाही से मौत) भी शामिल है।

लापरवाही से हुआ हादसा

दुर्घटना इतनी भयावह थी कि पटरी से उतरे 13 डब्बे एक-दूसरे पर चढ़ गए। एक डिब्बा तो पास के एक मकान में और दूसरा कॉलेज में घुस गया। शुरुआती जांच में सिस्टम की घोर लापरवाही सामने आई है। जिस पटरी से ट्रेन को गुजरना था, उस पर काम चल रहा था और जैसा कि होता ट्रेन को धीमी गति से गुजारने के आदेश दिए गए थे लेकिन सिग्नल गड़बड़ होने की वजह से ड्राइवर को इस बाबत सूचना नहीं मिली और नतीजतन ड्राइवर ने रेल की रफ्तार कम नहीं की। जब पटरी उखड़ने लगी और डिब्बे उतरने लगे तब ड्राइवर इमरजेंसी ब्रेक भी नहीं लगा सका क्योंकि पूरा सिस्टम ऑटोमैटिक होता है। पटरी से ज्यादातर ट्रेन के बीच के डिब्बे उतरे। हादसे के समय जो लोग वहां काम कर रहे थे बाद में वो भी भाग गए।

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