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'अल्लाह के वास्ते, मेरे बिल को पेश करने की इजाजत दें', विधानसभा में रो पड़े नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक

 Reported By: Manzoor Mir Edited By: Subhash Kumar
 Published : Apr 01, 2026 10:28 pm IST,  Updated : Apr 01, 2026 10:31 pm IST

नेशनल कॉन्फ्रेंस के MLA बशीर वीरी ने विधानसभा में आरक्षण नीति पर रोते हुए गुहार लगाई कि अल्लाह के वास्ते, उनके बिल को पेश करने की इजाजत दी जाए। हालांकि, सदन ने बिल पेश करने की इजाजत नहीं दी।

Syed Bashir Ahmad Veeri mla- India TV Hindi
नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक बशीर अहमद वीरी। Image Source : FACEBOOK (@SYED BASHIR AHMAD VEERI )

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में बुधवार को बड़ी घटना देखने को मिली है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक बशीर अहमद वीरी विधानसभा में अपने साथी विधायकों और सरकार से आरक्षण से जुड़े अपने बिल को पेश करने की इजाजत देने की गुहार लगाते हुए रो पड़े। विधानसभा में बोलते हुए, बशीर अहमद वीरी ने सरकार से अपने बिल को पेश करने की इजाजत देने की विनती की। हालांकि, सदन ने उन्हें बिल पेश करने की इजाजत नहीं दी। नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों ने प्रस्तावित कानून के खिलाफ वोट किया।

क्या बोले बशीर अहमद वीरी?

विधायक बशीर अहमद वीरी ने विधानसभा में भावुक होकर कहा- "मेरा सिर्फ एक बेटा है। वह लंदन चला गया है। मेरे बेटे ने मुझसे कहा कि पापा, मैं वापस नहीं आऊंगा - हमारे लिए यहां कोई मौके नहीं हैं।" वीरी ने आगे ये भी कहा कि उन्होंने अपने चुनाव क्षेत्र के नौजवानों से कहा था कि वह आरक्षण नीति के खिलाफ लड़ेंगे।

विधायक बशीर अहमद वीरी ने कहा-  "मैंने उन नौजवानों से कहा, जो पहली बार वोट देने वाले थे और जिन्होंने चुनाव में मेरे लिए प्रचार किया था, कि मैं उनके लिए आवाज उठाऊंगा, चाहे मुझे फांसी हो जाए या मुझे अयोग्य घोषित कर दिया जाए।" उन्होंने कहा- "मैं सदन से अपील करना चाहता हूं, अल्लाह के वास्ते, मेरे बच्चों के लिए इस बिल को पेश करने की इजाजत दें।"

क्या है बशीर वीरी की मांग?

विधायक बशीर अहमद वीरी ने ओपन मेरिट का हिस्सा बढ़ाकर 65 प्रतिशत करने, इंदिरा साहनी फैसले को लागू करने, और EWS, ALC, और RBA श्रेणियों में असमानताओं को दूर करने की मांग की। जब बिल पर वोटिंग हुई, तो उसे समर्थन नहीं मिला। सिर्फ चार सदस्यों ने इसके पक्ष में वोट किया, और वे सभी विपक्षी बेंचों से थे, जबकि सत्ताधारी पार्टी के सदस्यों ने इसका विरोध किया। सरकार की ओर से जवाब देते हुए, मंत्री सकीना इटू ने कहा कि आरक्षण एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है और उन्होंने भरोसा दिलाया कि उचित प्रक्रिया का पालन किया गया है।

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