भले ही तुलसी को एक मजबूत और आसानी से उगने वाला पौधा माना जाता है, लेकिन रोज़मर्रा की देखभाल में की गई छोटी-छोटी गलतियाँ इसकी सेहत पर जल्दी असर डाल सकती हैं। अगर समय रहते पौधे में हो रहे बदलावों को पहचान लिया जाए, तो इसे सूखने और खराब होने से बचाया जा सकता है।
तुलसी की पत्तियाँ क्यों झड़ने लगती हैं?
तुलसी की पत्तियां मुख्य रूप से अधिक पानी देने, कम धूप, मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी, या मौसम के बदलाव के कारण झड़ने लगती हैं। इसके अलावा, जड़ों में कीड़े या फंगल इन्फेक्शन भी पत्तियों के पीले होकर गिरने का बड़ा कारण हो सकते हैं।
कैसे करें तुलसी के पौधे की देखभाल?
-
सही गमला चुनना है जरूरी: गमले में पानी निकलने के लिए छेद जरूर होने चाहिए। क्योंकि पानी जमा होने से जड़ें सड़ सकती हैं और पत्तियाँ पीली पड़ जाती हैं।
-
सही तरीके से पानी देना है ज़रूरी: तुलसी का पौधा हल्की नम मिट्टी में अच्छा बढ़ता है, लेकिन पानी भराव इसे नुकसान पहुंचाता है। इसलिए जब मिट्टी की ऊपरी परत सूखी लगे, तभी पानी दें. गर्मियों में पानी थोड़ा ज्यादा देना पड़ सकता है। साथ ही गमले में पानी जमा न होने दें।
-
धूप मिलना है ज़रूरी: तुलसी को रोज़ कम से कम 5–6 घंटे की सीधी धूप चाहिए। इसलिए इसे बालकनी, छत या धूप वाली खिड़की के पास रखें। छायादार जगह पर रखने से पौधा कमजोर हो जाता है.
-
मिट्टी और खाद का ध्यान रखें: तुलसी के लिए ऐसी मिट्टी सबसे अच्छी होती है जिसमें पानी आसानी से निकल सके। मिट्टी में खाद और रेत और कोकोपीट मिलाएं। साथ ही समय समय पर ऑर्गेनिक खाद या वर्मीकम्पोस्ट डालें।
-
छंटाई: तुलसी की सूखी और पीली पत्तियों को हटाते रहें। इससे नई पत्तियाँ तेजी से उगती हैं। पौधे में हवा का प्रवाह बेहतर रहता है।