गर्मी आते ही आम की महक घरों में फैल जाती है। आम ऐसा फल है जिसका इंतजार पूरे साल होता है। बच्चों को तो आम बहुत ही पसंद होता है। आम को शौकीन एक बार 5-6 आम खा जाते हैं। मैंग लवर्स के लिए खास आम फेस्टिवल भी लगाया जाता है, जिसमें आम की न जाने कितनी किस्में आती हैं। अगर आप आम खाने के शौकीन हैं तो उत्तर प्रदेश के खास मलिहाबाद के दशहरी आम और वाराणसी के लंगड़ा आम फेमस हैं। इन आम के दीवाने पूरी दुनिया में हैं, स्वाद में इतने मीठे और रसीले होते हैं कि 1-2 खाने से भी मन न भरे।
उत्तर प्रदेश के GI टैग वाले आम
मलिहाबाद का दशहरी आम- लखनऊ के पास मलिहाबादी है, यहां के दशहरी आम विश्व प्रसिद्ध हैं। मलिहाबाद के दशहरी आम का स्वाद, सुगंध ऐसा है कि दूर-दूर से लोग यहां आम खरीदने आते हैं। इन दशहरी आम की गुठली छोटी होती है। आम बहुत ही रसीले और गूदेदार होते हैं। इस आम को 2010 में GI टैग (भौगोलिक संकेतक) प्राप्त हुआ था।
वाराणसी का लंगड़ा आम- वैसे तो लंगड़ा आम कई जगह मिलता है लेकिन बनारस के लंगड़ा आम की बात ही कुछ और है। इसकी अनूठी खुशबू, पतला छिलका और रेशे-रहित गूदा खाने में बहुत मीठा होता है। अंदर से पूरी तरह पका होने पर भी ये आम बाहर से हरा ही रहता है। लंगड़ा आम जून-जुलाई में बाजार में आता है। 250 साल से पुराने इस आम को GI Tag प्राप्त है।
उत्तर प्रदेश के GI टैग उत्पाद
उत्तर प्रदेश के GI टैग उत्पाद सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि सदियों से सहेजी गई संस्कृति, परंपरा और स्थानीय हुनर की अमूल्य विरासत हैं। जिसमें मलिहाबाद का दशहरी आम हो या वाराणसी का लंगड़ा आम, प्रयागराज का सेबिया अमरूद हो या बनारसी पान, हर स्वाद अपने शहर की पहचान और गौरव को दुनिया तक पहुंचाता है। महोबा का देशावरी पान, मुजफ्फरनगर का गुड़, हाथरस की हींग और प्रतापगढ़ का आंवला अपने खास गुणों और अनोखे स्वाद के कारण लोगों के दिलों में खास जगह बना चुके हैं।