गर्मी में रोजाना दही का सेवन जरूर करना चाहिए। ठंडा और ताजा दही खाने में बहुत टेस्टी लगता है। ऐसा दही पेट को ठंडा रखने में मदद करता है। लेकिन इस मौसम में ज्यादा गर्मी होने के कारण दही बहुत जल्दी खट्टा हो जाता है। कई बार 1-2 दिन में ही दही खट्टा हो जाता है। ऐसे दही को कुछ लोग खट्टा होने के बाद भी खा लेते हैं। आइये जानते हैं कि खट्टा दही खाना चाहिए या नहीं खाना चाहिए।
खट्टा दही खाना चाहिए या नहीं?
गर्मी में लोग दही खाना पसंद करते हैं। दही न सिर्फ खाने में स्वादिष्ट लगती है बल्कि स्वास्थ्य को कई फायदे पहुंचाती है। दही को पाचन संबंधी समस्याओं से पीड़ित लोगों के लिए सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है, लेकिन दही का गलत तरीके से खाने से फायदे की जगह नुकसान हो सकते हैं। ज्यादा खट्टा दही खाने से गैस एसिडिटी की समस्या हो सकती है। खट्टा दही कई बार सीने में जलन पैदा कर सकता है। इसे खाने के बाद दांतों में दर्द बढ़ सकता है। इसलिए बहुत ज्यादा खट्टा दही खाने से बचना चाहिए। आप ताजा दही खाने के साथ खाएं। खट्टा दही छाछ बनाने, कढ़ी बनाने या किसी दूसरे काम में इस्तेमाल कर लें।
बासी दही खाने से क्या होता है?
खाने में ताजा दही का इस्तेमाल करना चाहिए। ज्यादा से ज्यादा 1-2 दिन पुराना दही खा सकते हैं। इससे ज्यादा समय तक रखे गए दही के सेवन करने में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। अगर दही बहुत पुराना और खट्टा हो जाए तो इसमें फफूंद लगने का खतरा रहता है। कई बार दही से अमोनिया जैसी गंध आने लगती है। इसका मतलब है दही खराब हो चुका है। ऐसा दही खाने से पेट में संक्रमण, सूजन या यहां तक कि फूड फॉइजनिंग भी हो सकती है। इसलिए आपको घर पर बना ताजा दही ही इस्तेमाल करना चाहिए।
दही को खट्टा होने से कैसे बचाएं?
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गर्मी में दही जमाने के लिए मिट्टी के बर्तन का इस्तेमाल करें। इससे दही को ठंडक मिलती है और मिट्टी का बर्तन पानी सोख लेता है। जिससे दही गाढ़ा हो जाता है और कम खट्टा होता है।
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दही जमने के बाद अगर पानी छोड़ जाती है तो उसका पानी निकाल दें। ये पानी ही दही को और ज्यादा खट्टा बनाता है। पानी निकालने से दही की खटास कम हो जाती है।
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गर्मी के दिनों में खुले और चौड़े बर्तन में दही जमाना चाहिए। दही करीब 5-6 घंट में जम जाता है इसके तुरंत बाद इसे फ्रिज में या पानी में ठंडा होने के लिए रख दें।
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दही जमाते वक्त दूध को बहुत ज्यादा गर्म न करें और जामन भी बहुत ज्यादा मात्रा में न डालें। कोशिश करें जामन खट्टा न हो, क्योंकि खट्टे जामन से दही खट्टा जमता है।