हेल्थ डेस्क: देश में कैंसर, हृदय रोग, मधुमेह और फेफड़ों की बीमारियों जैसे असंक्रामक रोगों (एनसीडी) से होने वाली मौतों के मामले 70 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। यह आंकड़ा तीन साल पहले 42 प्रतिशत था। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के मुताबिक, एनसीडी का भार भारत में तेजी से बढ़ रहा है। (गुनगुने पानी में ये 2 चीजें मिलाएं, मिलेंगे ये ढेरों फायदे)
देश में इन रोगों के चलते, प्रति चार में से एक व्यक्ति को 70 साल की उम्र तक पहुंचने से पहले ही मृत्यु का खतरा बना रहता है। एनसीडी एक ऐसी मेडिकल कंडीशन या बीमारी है, जो लोगों के बीच किसी संक्रमण से नहीं फैलती।(रोजाना सिर्फ 5 मिनट करें ये काम और 2 दिन में पाएं पेट की चर्बी से निजात)
प्रमुख एनसीडी रोग व्यवहार संबंधी जोखिम वाले चार कारणों से होते हैं-अस्वास्थ्यकर आहार, शारीरिक गतिविधि की कमी और तंबाकू व शराब का सेवन। भारत में एनसीडी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों को उनके पैटर्न और लोगों में समझदारी की कमी के चलते रुकावट आ रही है।
आईएमए के अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल ने कहा, "एनसीडी स्वास्थ्य एवं विकास संबंधी आपातकाल की तरह है। अंधाधुंध और अनियोजित शहरीकरण, अस्वास्थ्यकर जीवनशैली और लोगों की उम्र बढ़ते जाने जैसे कारणों से ऐसे रोग निरंतर बढ़ रहे हैं। अस्वास्थ्यकर भोजन करने के अलावा लोग शारीरिक क्रियाकलापों को भी नजरअंदाज करते हैं। इससे उच्च रक्तचाप हो सकता है और फिर रक्त शर्करा व रक्त लिपिड बढ़ने से मोटापा शुरू हो जाता है।"
उन्होंने कहा कि ये मेटाबॉलिक जोखिम वाले कारक कहलाते हैं, जो आगे चल कर हृदय रोग और समय से पहले मृत्यु की वजह बन सकते हैं। जोखिम वाले कारकों को नियंत्रित करके एनसीडी की समस्या पर काबू पाया जा सकता है।
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