महाराष्ट्र में महानगरपालिका के चुनाव में रोज रोचक बातें सामने आ रही हैं। इस बीच, नागपुर में एक वाक्या चर्चा का विषय बना हुआ है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की पूर्व महापौर अर्चना के पति विनायक राव डेहनकर ने बीजेपी पार्टी के विरोध में बगावत कर निर्दलीय नामांकन दाखिल किया है। इस कारण अर्चना डेहनकर ने पति का घर छोड़कर मायके में जाने का निर्णय ले लिया और वह सीधे अपने मयके पहुंच गईं।
अर्चना डेहनकर ने निश्चय किया है कि 15 जनवरी तक, जब तक चुनाव रहेंगे, तब तक वह अपने पति के घर पर नहीं जाएंगी और मायके में रहकर बीजेपी के उम्मीदवारों का प्रचार करेंगी। चुनाव के बाद पति के घर लौटने का निर्णय उन्होंने लिया है। पूर्व मेयर अर्चना डेहनकर की आंखों में वह वेदना साफ तरीके से दिख रही थी। बात करते-करते उनके आंसू यह बता रहे थे कि एक तरफ पति और दूसरी तरफ पार्टी, दोनों धर्म उन्हें निभाना है। इसकी वजह से उन्होंने चुनाव तक घर छोड़ने का निश्चय किया है।
पूर्व महापौर अर्चना डेहनकर के पति विनायक डेहनकर ने बीजेपी के टिकट पर प्रभाग संख्या 17 से चुनाव लड़ने का अवसर नहीं मिलने पर पार्टी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया है। अर्चना डेहनकर ने पति को इस कदम से रोकने की कोशिश की थी, लेकिन जब इसमें सफलता नहीं मिली तो अंत में वह सीधे अपने भाई के घर चली गईं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह चुनाव में बीजेपी का प्रचार करने जा रही हैं और ऐसे में एक ही घर में विपरीत भूमिका निभाना ठीक नहीं है।
बीजेपी की वरिष्ठ नेता और पूर्व मेयर अर्चना डेहनकर ने कहा कि उनके पति इस बात से नाराज हैं कि बीजेपी ने बाहर के उम्मीदवार, जो कुछ दिन पहले ही कांग्रेस से बीजेपी में आया, उन्हें टिकट दिया। प्रभाग संख्या 17 से लगभग 55 के आस-पास इच्छुक लोगों ने टिकट मांगा था, लेकिन पार्टी ने उनको नजरअंदाज करते हुए बाहर के व्यक्ति को टिकट दिया है, इसलिए उनके पति विनायक डेहनकर ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का निश्चय किया।
विनायक डेहनकर 1984 से भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता हैं। अर्चना डेहनकर ने कहा कि उन्होंने अपने पति को समझने की कोशिश की, लेकिन वह काफी आहत हैं कि बाहर के व्यक्तियों को टिकट दिया जा रहा है और पार्टी के कार्यकर्ताओं को पूछा नहीं जा रहा है, इसलिए उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला लिया, जिससे वह सहमत नहीं हैं, इसलिए मायके आ गईं।
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