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पालघर में साधुओं की मॉब लिंचिंग करने वाले आरोपियों को 5 साल बाद भी नहीं मिली जमानत, जानें क्या बोला बॉम्बे HC

 Reported By: Saket Rai Edited By: Khushbu Rawal
 Published : Dec 24, 2025 07:23 am IST,  Updated : Dec 24, 2025 07:24 am IST

बॉम्बे हाईकोर्ट ने पालघर में दो साधुओं और उनके ड्राइवर की पीटकर हत्या किए जाने के मामले में आरोपी 4 लोगों को जमानत देने से इनकार कर दिया है। आरोपियों की ओर से दलील दी गई थी कि वे करीब 5 साल से हिरासत में हैं और मुकदमे में देरी हो रही है, इसलिए उन्हें जमानत दी जानी चाहिए।

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बॉम्बे हाईकोर्ट Image Source : PTI

बॉम्बे हाईकोर्ट ने पालघर में साल 2020 में हुए बहुचर्चित साधु मॉब लिंचिंग मामले में 4 आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की गंभीरता, आरोपों की प्रकृति और सजा की संभावित कठोरता को देखते हुए इस स्तर पर जमानत देना उचित नहीं होगा। हाईकोर्ट ने जिन चार आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज की हैं, उनमें राजेश धकल राव, सुनील उर्फ सत्य शंतराम दलवी, सजान्या बर्क्या बुर्कुड और विनोद रामू राव शामिल हैं।

किस आधार पर आरोपियों को नहीं मिली राहत?

जस्टिस डॉ. नीला गोखले की सिंगल बेंच ने कहा कि आरोप बेहद गंभीर हैं और इनमें आजीवन कारावास या मृत्युदंड तक की सजा का प्रावधान हो सकता है। कोर्ट ने यह भी माना कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता एक अहम अधिकार है, लेकिन हर मामले में इसे सर्वोपरि नहीं रखा जा सकता। कोर्ट के अनुसार, इस केस में गवाहों को प्रभावित करने, सबूतों से छेड़छाड़ और कानून-व्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव जैसे पहलुओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

अब तक 42 आरोपियों को मिली जमानत

आरोपियों की ओर से दलील दी गई थी कि वे करीब पांच साल से हिरासत में हैं और मुकदमे में देरी हो रही है, इसलिए उन्हें जमानत दी जानी चाहिए। आरोपियों की याचिका में कहा गया है कि अब तक मामले में 42 आरोपियों को जमानत दी जा चुकी है। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और कहा कि केवल लंबी हिरासत के आधार पर गंभीर अपराधों में जमानत नहीं दी जा सकती।

जज ने लगभग 5 साल की लंबी कैद की दलील को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इस अपराध के लिए अधिकतम सजा आजीवन कारावास या मौत की सजा है। इसलिए यह माना कि बिताई गई कैद को लंबी कैद नहीं कहा जा सकता।

क्या है पूरा मामला?

बता दें यह मामला 14 अप्रैल 2020 का है, जब महाराष्ट्र के पालघर जिले में कोरोना लॉकडाउन के दौरान दो साधुओं और उनके चालक की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। कथित तौर पर ग्रामीणों ने उन्हें बच्चा चोर समझकर हमला किया था। दोनों साधु एक व्यक्ति के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए कार से गुजरात जा रहे थे। भीड़ को संदेह था कि वे चोर हैं। इस घटना ने देशभर में आक्रोश पैदा किया था और बाद में इसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई थी।

फिलहाल इस मामले में सुनवाई जारी है और हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद चारों आरोपी न्यायिक हिरासत में ही रहेंगे।

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