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शहद में मिलावट करने वालों पर कसा शिकंजा, सरकार ने अधिसूचित किए नए मानक

 Edited By: India TV Paisa Desk
 Published : Aug 22, 2018 06:18 pm IST,  Updated : Aug 22, 2018 06:18 pm IST

शहद में मिलावट पर रोक लगाने के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने इसकी गुणवत्ता के नए मानकों को अधिसूचित किया है।

FSSAI notifies standards for honey & its products to curb adulteration- India TV Hindi
FSSAI notifies standards for honey & its products to curb adulteration

नई दिल्ली। शहद में मिलावट पर रोक लगाने के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने इसकी गुणवत्ता के नए मानकों को अधिसूचित किया है। इससे शहद उत्पादक किसानों को अपने उत्पाद की बेहतर कीमत हासिल करने में मदद मिलेगी। भारत के राजपत्र में अधिसूचित नए मानकों के लागू होने से शहद में ‘कॉर्न सीरप’, ‘राइस सीरप’ और ‘इंवर्टेड सीरप’ (गन्ने के सीरे से तैयार होने वाला सीरप) की मिलावट पर प्रभावी रोक लगेगी। ऐसे सीरप के मिलाने से शहद जमता नहीं है।

वर्ष 1955 से अब तक लागू मानकों के तहत शहद में जैव प्रौद्योगिकी की मदद से ऐसे तत्वों को मिलाया जा सकता था और शहद से मिलते जुलते दिखने के कारण इनका आसानी पता नहीं चलता था। लेकिन नए अधिसूचित मानकों के तहत अब ऐसी मिलावट नहीं की सकती।

राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड के कार्यकारिणी सदस्य देवव्रत शर्मा ने बताया कि नई अधिसूचना से शहद उत्पादक किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य सुनिश्चित होगा जो वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के प्रयासों के अनुरूप है और इससे मधुमक्खीपालक किसानों को काफी लाभ होगा।

उन्होंने कहा कि नए मानदंडों की घोषणा करके सरकार ने मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के अपने वायदे को पूरा किया है। इससे शहद में मिलावट करने वालों पर प्रभावी रोक लगेगी।

शहद के लिए जो नए मानदंड बने हैं उनमें शहद में आर्द्रता की मात्रा की सीमा को, जो पहले 25 प्रतिशत थी, घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके अलावा इसमें फ्रुक्‍टोज (फलशर्करा) और ग्लूकोज (एफजी) अनुपात के संदर्भ में पहले के अधिनियम में कोई उच्चतम सीमा नहीं थी जिसके कारण शहद में बाहर से फ्रुक्‍टोज की मिलावट कर दी जाती थी और इस वजह से शहद नहीं जमता था।

भारतीय जनमानस में यह गलतफहमी रही है कि शहद नहीं जमता है। ऐसे में फ्रुक्टोज की मिलावट करने वाले इसका फायदा उठाते रहे हैं। लेकिन नए मानदंड में फ्रुक्‍टोज और ग्लूकोज (एफजी) अनुपात की न्यूनतम और उच्चतम सीमा के निर्धारण हो जाने की वजह से अब मिलावट पर रोक लगने की संभावना है।

शहद में होने वाली किसी तरह मिलावट का पता लगाने के लिए एक नये मानदंड यानी 13 सी (कार्बन 13) परीक्षण को जोड़ा गया है। संभावना है कि इससे लोगों को गुणवत्ता युक्त शहद उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

नये अधिनियम में एक नए मानदंड ‘डायस्टेस’ को लाया गया है जिससे यह पता लगाया जा सकता है कि शहद में मधुमक्खी की लार का उपयोग हुआ है या इसे फैक्टरी में मिलावट करके बनाया गया है। ‘डायस्टेस’ के जरिये शहद में मधुमक्खी की लार की उपस्थति का पता लगाया जा सकेगा।

एफएसएसएआई ने ‘रॉयल जैली’ और ‘मुधमक्खी के छत्ते के मोम’ के मानक भी तय किए हैं। नए मानदंड के तहत शहद में सी-4 चीनी की उपस्थिति की सीमा सात प्रतिशत तय की गई है और इस सीमा से कम सी-4 चीनी की उपस्थिति होने पर ही उसे प्राकृतिक माना जायेगा। उक्त प्रमुख मानदंडों के कारण अब देश में गुणवत्ता युक्त शहद की उपलब्धता सुनिश्चित होने की और मधुमक्खीपालक किसानों को अपने उत्पाद का सही मूल्य मिलने की संभावना है।

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