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आरबीआई ने बैंक ऑफ बड़ौदा पर लगाया पांच करोड़ रुपए का जुर्माना, मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप

 Written By: Dharmender Chaudhary
 Published : Jul 25, 2016 02:52 pm IST,  Updated : Jul 25, 2016 02:52 pm IST

आरबीआई ने पिछले साल प्रकाश में आए 6,100 करोड़ रुपए के विदेशी मुद्रा भुगतान घोटाले में बैंक ऑफ बड़ौदा पर पांच करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है।

RBI ने बैंक ऑफ बड़ौदा पर लगाया पांच करोड़ रुपए का जुर्माना, फॉरेन करेंसी पेमेंट्स में घोटाले का आरोप- India TV Hindi
RBI ने बैंक ऑफ बड़ौदा पर लगाया पांच करोड़ रुपए का जुर्माना, फॉरेन करेंसी पेमेंट्स में घोटाले का आरोप

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पिछले साल प्रकाश में आए 6,100 करोड़ रुपए के विदेशी मुद्रा भुगतान घोटाले में अनियमितता के मामले में सरकारी क्षेत्र के बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) पर पांच करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। बीओबी ने बंबई शेयर बाजार को दी गई एक सूचना में कहा, भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंक ऑफ बड़ौदा पर पांच करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई बैंक ऑफ बड़ौदा की आंतरिक आडिट में पाई गई कुछ अनियमितताओं के बारे में बैंक की ओर से भारतीय रिजर्व बैंक और जांच एजेंसियों को दी गई सलाह के बाद की गई है।

शेयर बाजार को दी गई सूचना के अनुसार, आरबीआई ने उसकी जांच की और कुछ ऐसी खामियों का उल्लेख किया एएमएल (मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक) उन प्रावधानों के संबंध में बैंक की आतंरिक नियंत्रण व्यवस्था की दुर्बलता और विफलता दर्शाती है। इन प्रावधानों में लेन देन के सौदों की निगरानी, वित्तीय आसूचना इकाई (एफआईयू) को समय से सूचना देना और यूसीआईसी (विशिष्ट ग्राहक कोड) प्रदान करने संबंधी प्रावधान हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा ने कहा कि उसने व्यापक सुधारात्मक कार्य योजना लागू की है ताकि आंतरिक नियंत्रण बढ़ाया जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि ऐसी घटनाएं फिर न हों।

आरबीआई ने पाया कि बीओबी ने संदिग्ध हस्तांतरण रिपोर्ट (एसटीआर) पेश न करने और काफी देरी करने जैसी अनियमितता की। इसके अलावा बैंक ने अपने ग्राहक को जानो (केवायसी) संबंधी नियमों और शर्तों को पूरा किए बिना खाते खोलने की मंजूरी भी दी। यह टिप्पणी आरबीआई द्वारा बैंक ऑफ बड़ौदा की दिल्ली में अशोक विहार शाखा के जरिए आयात के भुगतान के नाम पर कुल 6,100 करोड़ रुपए के बराबर धन विदेश (हांगकांग) भेजे जाने के मामले की जांच के संबंध में है। भुगतान में अनियमितता का यह मामला पिछले साल आया था। सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय इस मामले की जांच कर रहे हैं। इस राशि का हस्तांतरण कथित तौर पर ऐसे आयात की आड़ में किया गया जो कभी हुआ ही नहीं।

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