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हाईवे पर बार-बार एक्सीडेंट हुए तो आएगी ठेकेदार की शामत! सरकार का सख्त आदेश जारी

 Edited By: Shivendra Singh
 Published : Nov 03, 2025 07:42 am IST,  Updated : Nov 03, 2025 07:42 am IST

अगर आप सोचते हैं कि सड़क हादसों की जिम्मेदारी सिर्फ ड्राइवर या ट्रैफिक पुलिस की होती है, तो अब यह धारणा बदलने वाली है। केंद्र सरकार ने अब ठेकेदारों की भी जवाबदेही तय कर दी है।

हाईवे पर बार-बार हादसे...- India TV Hindi
हाईवे पर बार-बार हादसे हुए तो ठेकेदार चुकाएगा कीमत Image Source : ANI

देशभर में बढ़ते सड़क हादसों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने अब बड़ा और सख्त कदम उठाया है। अगर किसी हाईवे के एक ही हिस्से पर बार-बार एक्सीडेंट होते हैं, तो अब ठेकेदार को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि अगर किसी नेशनल हाईवे के एक ही 500 मीटर हिस्से में एक साल में दो या उससे ज्यादा हादसे होते हैं, तो ठेकेदार पर 25 लाख रुपये तक का जुर्माना लगेगा। यही नहीं, अगर अगले साल भी उस जगह हादसा होता है, तो जुर्माने की रकम 50 लाख रुपये तक बढ़ा दी जाएगी।

सड़क परिवहन और राजमार्ग सचिव वी. उमाशंकर ने बताया कि मंत्रालय ने बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT) मॉडल से बनने वाले हाईवे प्रोजेक्ट्स के दस्तावेजों में संशोधन किया है। अब ठेकेदारों को न सिर्फ सड़क निर्माण बल्कि उसकी सेफ्टी, मेंटेनेंस और क्रैश मैनेजमेंट की जिम्मेदारी भी लेनी होगी। यदि किसी हिस्से में हादसा बार-बार होता है, तो ठेकेदार को कारण की पहचान कर सुधारात्मक कदम उठाने होंगे।

3500 हाईवे सेक्शन की पहचान 

मंत्रालय ने देशभर में 3500 ऐसे हाईवे सेक्शन की पहचान की है, जहां दुर्घटनाएं ज्यादा होती हैं। ये नई व्यवस्था फिलहाल BOT मॉडल वाले प्रोजेक्ट्स पर लागू होगी, जिनकी कंसैशन अवधि 15 से 20 साल होती है। वहीं, हाइब्रिड एन्‍यूटी मॉडल (HAM) और इंजीनियरिंग प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (EPC) मॉडल पर बनने वाली सड़कों के लिए भी सेफ्टी स्टैण्डर्ड को और सख्त किया जा रहा है।

कैशलेस ट्रीटमेंट स्कीम

इसके अलावा सरकार जल्द ही देशभर में रोड एक्सीडेंट पीड़ितों के लिए कैशलेस ट्रीटमेंट स्कीम लॉन्च करने जा रही है। इस स्कीम के तहत हादसे में घायल व्यक्ति को पहले सात दिनों तक 1.5 लाख रुपये तक का फ्री इलाज मिलेगा। यह स्कीम पहले चंडीगढ़ और छह राज्यों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू की गई थी। सरकार का कहना है कि इस फैसले का मकसद सड़क हादसों और जानमाल के नुकसान को कम करना है। अब सरकार ठेकेदारों पर सख्त कदम उठाने जा रही है और लोगों की सुरक्षा को सबसे ऊपर रख रही है। यानी आगे से अगर सड़कों पर लापरवाही हुई, तो उसकी बड़ी कीमत ठेकेदारों को चुकानी पड़ेगी।

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