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कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं तो बढ़ जाएगी महंगाई, अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा बुरा असर: आरबीआई स्टडी

 Edited By: Sunil Chaurasia
 Published : Jul 23, 2025 11:10 pm IST,  Updated : Jul 23, 2025 11:10 pm IST

रिपोर्ट में संभावित प्रभाव का विवरण देते हुए कहा गया है कि तेल की कीमतों में अचानक उछाल से महंगाई में गिरावट की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और नीतिगत सामान्यीकरण भी नाकाम हो सकता है।

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तेल महंगा हुआ तो भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा बुरा असर Image Source : AP

कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने पर घरेलू महंगाई में 0.20 प्रतिशत की तेजी आ सकती है। भारतीय रिजर्व बैंक के एक्सपर्ट्स की एक स्टडी में बुधवार को ये अनुमान जताया गया है। सुजाता कुंडू, सौमाश्री तिवारी और इंद्रनील भट्टाचार्य ने भारत में तेल की कीमत और महंगाई के संबंध पर ये शोधपत्र जारी किया। इसमें वैकल्पिक गैर-जीवाश्म ईंधन के उपयोग जैसे तरीकों से आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने के लिए नीतिगत उपायों की भी मांग की गई है। हालांकि, रिजर्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि ये स्टडी उसके अधिकृत विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करता है। 

वैश्विक वृद्धि को पटरी से उतार सकती है तेल की कीमतें

स्टडी रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान संदर्भ में ये समझना जरूरी है कि तेल की कीमतों में उछाल का भारतीय अर्थव्यवस्था को कमजोर करने वाला प्रभाव पड़ सकता है। इसमें कहा गया है, ‘‘वर्तमान वैश्विक आर्थिक परिदृश्य, जो बढ़ते व्यापार विखंडन, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और आक्रामक होते ट्रेड वॉर की विशेषता है, वैश्विक व्यापार में तेजी से कमी ला सकता है और इस तरह वैश्विक वृद्धि को पटरी से उतार सकता है। ऐसे में तेल की कीमतों में अस्थिरता इस समय भारतीय अर्थव्यवस्था को कमजोर करने वाली साबित हो सकती है।’’ 

तेल महंगा हुआ तो भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा बुरा असर

रिपोर्ट में संभावित प्रभाव का विवरण देते हुए कहा गया है कि तेल की कीमतों में अचानक उछाल से महंगाई में गिरावट की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और नीतिगत सामान्यीकरण भी नाकाम हो सकता है। अध्ययन के मुताबिक, ‘‘अनुभवजन्य विश्लेषण से पता चलता है कि कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में 10 प्रतिशत की वृद्धि होने पर भारत की मुख्य मुद्रास्फीति में लगभग 0.20 प्रतिशत की तेजी आ सकती है।’’

जून में घटकर 2.1 प्रतिशत पर आ गई थी खुदरा महंगाई दर

बताते चलें कि खाद्य पदार्थों की कीमतों में नरमी की वजह से जून 2025 में खुदरा महंगाई दर घटकर 6 साल के निचले स्तर 2.1 प्रतिशत पर आ गई थी। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति (CPI) मई में 2.82 प्रतिशत और जून, 2024 में 5.08 प्रतिशत के स्तर पर थी। ये लगातार पांचवां महीना था, जब मुद्रास्फीति भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के मध्यम अवधि के 4% के लक्ष्य से नीचे रही।

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