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कच्चे तेल की आग से सरकारी खजाने पर बढ़ा बोझ, आयात बिल 100 अरब डॉलर के पार संभव

पिछले साल जनवरी में भारत ने कच्चे तेल के आयात पर 7.7 अरब डॉलर खर्च किए थे। फरवरी में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गईं।

Edited by: India TV Paisa Desk
Published : Feb 27, 2022 01:33 pm IST, Updated : Feb 27, 2022 01:33 pm IST
crude- India TV Paisa
Photo:FILE

crude

Highlights

  • कच्चे तेल का आयात बिल 100 अरब डॉलर के पार जाने की आशंका
  • यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद ब्रेंट स्पॉट के दाम 105.58 डॉलर पर पहुंच गए थे
  • देश में कच्चे तेल का उत्पादन 2019-20 में 3.05 करोड़ टन था

नई दिल्ली। भारत का कच्चे तेल का आयात बिल चालू वित्त वर्ष 2021-22 में 100 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर सकता है। यह पिछले वित्त वर्ष में कच्चे तेल के आयात पर हुए खर्च का लगभग दोगुना होगा। इसकी वजह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें सात साल के उच्चस्तर पर पहुंच गई हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय के पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (पीपीएसी) के आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2021-22 के पहले 10 माह (अप्रैल-जनवरी) में भारत ने कच्चे तेल के आयात पर 94.3 अरब डॉलर खर्च किए हैं। अकेले जनवरी में कच्चे तेल के आयात पर 11.6 अरब डॉलर खर्च हुए हैं। 

पिछले साल से भारी बढ़ोतरी की आशंका 

पिछले साल जनवरी में भारत ने कच्चे तेल के आयात पर 7.7 अरब डॉलर खर्च किए थे। फरवरी में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गईं। ऐसे में अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष के अंत तक भारत का तेल आयात बिल दोगुना होकर 110 से 115 अरब डॉलर पर पहुंच जाएगा। भारत अपने कच्चे तेल की 85 प्रतिशत जरूरत को आयात से पूरा करता हूं। आयातित कच्चे तेल को तेल रिफाइनरियों में वाहनों और अन्य प्रयोगकर्ताओं के लिए पेट्रोल और डीजल जैसे मूल्यवर्धित उत्पादों में बदला जाता है। भारत के पास अतिरिक्त शोधन क्षमता है और यह कुछ पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करता है लेकिन रसोई गैस यानी एलपीजी का उत्पादन यहां कम है, जिसे सऊदी अरब जैसे देशों से आयात किया जाता है। 

यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध का भी असर 

इस बीच, यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद ब्रेंट स्पॉट के दाम सात साल के उच्चस्तर 105.58 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गए थे। हालांकि, पश्चिमी देशों ने रूस पर जो प्रतिबंध लगाए हैं, ऊर्जा को उनसे बाहर रखा गया है, जिससे तेल के दाम घटकर 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गए। कच्चे तेल के ऊंचे आयात की वजह से वृहद आर्थिक संभावनाएं प्रभावित होती हैं। घरेलू उत्पादन में लगातार गिरावट की वजह से भारत की आयात पर निर्भरता बढ़ी है। देश में कच्चे तेल का उत्पादन 2019-20 में 3.05 करोड़ टन था, जो इसके अगले साल घटकर 2.91 करोड़ टन रह गया। चालू वित्त वर्ष के पहले 10 माह में भारत का कच्चे तेल का उत्पादन 2.38 करोड़ टन रहा है।

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