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नौकरी करने वालों के लिए खुशखबरी, सरकार ने PF में सालाना 5 लाख रुपये तक के निवेश को बनाया टैक्‍स फ्री

सीतारमण ने पीएफ खाते में जमा की जाने वाली राशि की सीमा को 5 लाख रुपये तक बढ़ाने की घोषणा करते हुए कहा कि यह नियम केवल उन मामलों पर ही लागू होगा, जहां नियोक्ता द्वारा कर्मचारी के पीएफ खाते में कोई अंशदान नहीं किया जाता है।

India TV Paisa Desk India TV Paisa Desk
Updated on: March 24, 2021 13:42 IST
modi government relief on PF tax free upto rupees 5 lakhs without employer contribute check details- India TV Paisa
Photo:FILE PHOTO

modi government relief on PF tax free upto rupees 5 lakhs without employer contribute check details

नई दिल्‍ली। केंद्र सरकार ने मंगलवार को प्रोविडेंट फंड (PF) में जमा की जाने वाली राशि की सीमा बढ़ाकर 5 लाख रुपये प्रति वर्ष कर दी है। इस राशि पर मिलने वाला ब्‍याज टैक्‍स फ्री होगा। यह नियम केवल उन्‍हीं मामलों में प्रभावी होगा, जहां नियोक्‍ता द्वारा रिटायरमेंट फंड में कोई योगदान नहीं किया जाता है। 1 फरवरी को संसद में पेश किए गए बजट में वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने घोषणा की थी कि प्रोविडेंट फंड में एक वित्‍त वर्ष में 2.5 लाख रुपये से अधिक जमा की जाने वाली राशि पर मिलने वाले ब्‍याज पर एक अप्रैल, 2021 से टैक्‍स लगेगा। यानि पीएफ खाते में एक वित्‍त वर्ष में केवल 2.5 लाख रुपये की राशि ही टैक्‍स फ्री ब्‍याज के लिए जमा की जा सकती है।

लोकसभा में वित्‍त बिल 2021 पर चर्चा के दौरान सीतारमण ने पीएफ खाते में जमा की जाने वाली राशि की सीमा को 5 लाख रुपये तक बढ़ाने की घोषणा करते हुए कहा कि यह नियम केवल उन मामलों पर ही लागू होगा, जहां नियोक्‍ता द्वारा कर्मचारी के पीएफ खाते में कोई अंशदान नहीं किया जाता है।

मंत्री ने कहा कि प्रोविडेंट फंड अंशदान पर मिलने वाले ब्‍याज पर टैक्‍स लगाने से केवल 1 प्रतिशत सदस्‍य ही प्रभावित होंगे और बाकी किसी पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्‍योंकि उनका अंशदान 2.5 लाख रुपये प्रति वर्ष से कम है।

भारत में वित्तवर्ष 2021 में 1.3 लाख से अधिक नई कंपनियां पंजीकृत

चालू वित्तवर्ष में फरवरी तक भारत में कुल 1,38,051 नई कंपनियां पंजीकृत हुई हैं। कार्पोरेट मामलों के मंत्रालय के हालिया आंकड़ों में यह बताया गया है। लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में, कॉपोर्रेट मामलों के राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने जानकारी देते हुए यह भी कहा कि अप्रैल 2020 से फरवरी 2021 के दौरान 10,113 कंपनियां प्रभावित भी हुई हैं।

वित्तवर्ष 2021 में पंजीकृत कंपनियों की संख्या महžवपूर्ण है, क्योंकि इस दौरान व्यावसायिक गतिविधियां महामारी और राष्ट्रव्यापी बंद के कारण बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। लोकसभा में मंत्री द्वारा उपलब्ध कराए गए एक अन्य आंकड़े से पता चला है कि देशभर में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) ने पिछले साल राष्ट्रव्यापी बंद की घोषणा के बाद महामारी के बीच कुल 283 कंपनियों को दिवालिया घोषित किया है।

उन्होंने कहा कि 1 अप्रैल, 2020 और 31 दिसंबर, 2020 के बीच की अवधि में 76 कॉपोर्रेट इन्सॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (सीआईआरपी) रिजॉल्यूशन समाप्त हो गए, 128 सीआईआरपी निकासी या अपील या निपटान के कारण बंद हुए और 189 कंपनियां परिसमापन में चली गईं।

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