अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में $10 प्रति बैरल की बढ़ोतरी से भारत का इम्पोर्ट बिल सालाना लगभग ₹10,000- ₹15,000 करोड़ बढ़ सकता है।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की तेजी से बढ़ती कीमतों के बीच दुनिया के लिए एक राहत की खबर आई है। रविवार को हुई एक अहम बैठक में तेल उत्पादक देशों के समूह OPEC+ ने बड़ा फैसला लिया।
ईरान की सरकारी मीडिया ने 28 फरवरी को कहा था कि अमेरिका और इजरायल के मिसाइल हमलों के जवाब में उसने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है।
ईरान पर हुए इस हमले की वजह से भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ सकता है और निवेशक बड़े पैमाने पर बिकवाली कर सकते हैं।
ईरान दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में शामिल है। तनाव की स्थिति में सप्लाई चेन बाधित होने की चिंता के बीच कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है, जो भारत पर काफी बुरा असर डालेगा।
भारत और अमेरिका के बीच बीते दिनों हुए मुक्त व्यापार समझौते के बाद रूस की तरफ से आया यह बयान काफी अहम है। रूस का कहना है कि भारत अपनी नीति पर कायम है।
अमेरिका ने भारत के साथ हुई ट्रेड डील पर अपनी फैक्टशीट में बदलाव किया है, जिसमें दालों का जिक्र हटा दिया गया है।
विदेश मंत्रालय और वाणिज्य मंत्रालय के टॉप अधिकारियों ने कांग्रेस नेता शशि थरूर की अध्यक्षता वाली विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति को ये जानकारी दी।
ट्रंप ने अपने आदेश में आगे कहा कि भारत ने ये स्पष्ट किया है कि वो अमेरिका से ऊर्जा उत्पाद खरीदेगा और हाल में अगले 10 सालों में रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए अमेरिका के साथ एक रूपरेखा पर सहमति व्यक्त की है।
हिंदुस्तान पेट्रोलियम, मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स और एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी जैसी रिफाइनरियों ने पिछले साल अमेरिका द्वारा रूस के प्रमुख निर्यातकों पर प्रतिबंध लगाने के तुरंत बाद रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया था।
वाइट हाउस के एक अधिकारी ने बताया कि अमेरिका, भारत पर रूसी तेल खरीदने के लिए लगाए गए 25 फीसदी टैरिफ को भी हटा देगा।
मौजूदा समय में रूस का कच्चा तेल अब लगभग 7 डॉलर प्रति बैरल सस्ता मिल रहा है। जनवरी के पहले तीन हफ्तों में भारत का रूस से तेल आयात दिसंबर के मुकाबले थोड़ा कम हुआ है।
तेल उद्योग (विकास) अधिनियम, 1974 के तहत लगाए जाने वाले ओआईडी उपकर को वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट के बाद 1 मार्च, 2016 से विशिष्ट दर के बजाय 20 प्रतिशत मूल्य-आधारित शुल्क में बदल दिया गया था।
अब तुर्की, भारत को पीछे छोड़ते हुए रूस के कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा आयातक बन गया है, जिसने दिसंबर में रूस से 2.6 अरब यूरो के हाइड्रोकार्बन खरीदे।
जामनगर के कॉम्प्लेक्स में दो रिफाइनरियां हैं। एक SEZ यूनिट है जहां से यूरोपीय संघ, अमेरिका और अन्य बाजारों में फ्यूल एक्सपोर्ट किया जाता है और एक पुरानी यूनिट जो मुख्य रूप से घरेलू बाजार की जरूरतों को पूरा करती है।
डोनाल्ड ट्रंप अब वेनेजुएला के तेल को अपने कंट्रोल में लेकर बड़ी मात्रा में तेल उत्पादन शुरू करने की योजना पर तेजी से काम कर रहे हैं।
एक्सपर्ट्स ने कहा कि जैसे-जैसे टैरिफ का खतरा गहरा रहा है, भारत को रूसी तेल के मुद्दे पर एक स्पष्ट फैसला लेना होगा।
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का वेनेजुएला से कच्चे तेल का आयात 81.3 प्रतिशत घटकर 2.55 अरब डॉलर रह गया, जबकि कुल व्यापार भी मामूली स्तर पर ही रहा।
भारत की प्रमुख विदेश तेल अन्वेषण एवं उत्पादन कंपनी ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (OVL) पूर्वी वेनेजुएला के 'सैन क्रिस्टोबल' तेल क्षेत्र का संयुक्त संचालन करती है।
दुनिया के सबसे धनी लोगों की लिस्ट में रूस के वागिट अलेक्पेरोव अभी 62वें स्थान पर हैं।
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