Wednesday, January 07, 2026
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अकाल तख्त साहिब ने CM भगवंत मान को किया तलब, नंगे पैर होंगे हाजिर, अब तक किन मुख्यमंत्रियों की हो चुकी पेशी? जानें

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की अकाल तख्त में पेशी होनेवाली है। वे राज्य के चौथे सीएम होंगे जिनकी सिखों की सर्वोच्च संस्था के सामने पेशी होगी। उनसे पहले तीन सीएम अकाल तख्त के सामने हाजिर हो चुके हैं।

Reported By : Puneet Pareenja Edited By : Niraj Kumar Published : Jan 06, 2026 07:25 pm IST, Updated : Jan 06, 2026 07:25 pm IST
Bhagwant Mann- India TV Hindi
Image Source : PTI भगवंत मान, सीएम, पंजाब

चंडीगढ़: सिखों की सर्वोच्च संस्था श्री अकाल तख्त साहिब ने पंजाब के सीएम भगवंत मान को तलब किया है। उन्हें 15 जनवरी को अकाल तख्त के सचिवालय में पेश होने को कहा गया है। जवाब में सीएम मान ने भी कहा कि वो एक विनम्र सिख की तरह नंगे पैर अकाल तख्त पर पेश होंगे। श्री अकाल तख्त साहिब ने मुख्यमंत्री को लगातार सिख मर्यादा, सिख पंथ और सिखों की सर्वोच्च संस्थाओं के खिलाफ दिए जा रहे बयानों को लेकर स्पष्टीकरण देने के लिए तलब किया है।

श्री अकाल तख्त साहिब में तलब होने वाले सीएम भगवंत मान चौथे सिटिंग मुख्यमंत्री होंगे। इससे पहले दिवंगत भीम सेन सच्चर, सुरजीत सिंह बरनाला, प्रकाश सिंह बादल को भी अकाल तख्त में तलब किया जा चुका है। पंजाब के अब तक के इतिहास में सबसे बड़ा नाम महाराजा रणजीत सिंह भी अकाल तख्त पर धार्मिक सजा भुगत चुके हैं। अकाल तख्त साहिब से उनको कोड़े मारने की सजा मिली थी। इस पर रणजीत सिंह ने कहा था कि मुझे सजा मंजूर है, लेकिन उनको कोड़े नहीं मारे गए थे।

क्या है श्री अकाल तख्त साहिब ?

  1. श्री अकाल तख्त साहिब सिखों की सर्वोच्च राजनीतिक और न्यायिक संस्था है। इसका काम सिख समुदाय के सांसारिक और धार्मिक मामलों पर कौम का मार्गदर्शन करना और निर्णय लेना है। अकाल तख्त की स्थापना 5वें पातशाह श्री गुरु अर्जुन देव के बेटे गुरु श्री हरगोबिंद पातशाह ने 1606 में की। 
  2. श्री अकाल तख्त साहिब में धर्म और सियासत पर फैसले एक मंच से लिए जाएंगे। 
  3. श्री अकाल तख्त अमृतसर में हरमंदिर साहिब के ठीक सामने अकाल तख्त स्थित है। अकाल तख्त का मतलब काल रहित परमात्मा का सिंहासन है।
  4. ये सिखों के 5 तख्तों में सबसे सर्वोच्च और पुराना है। सिख धर्म या समुदाय से जुड़े किसी भी महत्वपूर्ण विषय या विवाद पर यहां से हुक्मनामा जारी किया जाता है। ये हुक्मनामा पूरी दुनिया के सिखों के लिए मानना जरूरी होता है।
  5. श्री अकाल तख्त की फसील पर वही पेश हो सकता है जो गुरु का पूर्ण सिख हो। अमृत छका हो और सभी सिख सिद्धांतों के अनुरूप हो। 
  6. जिस सिख व्यक्ति ने दाढ़ी कटवाई हो या अमृत ना छका हो तो उसे अकाल तख्त तलब कर सकता है। मगर उसको अकाल तख्त पर पेश करके सजा नहीं सुनाई जाती। 
  7. ऐसे व्यक्ति को अकाल तख्त के सेक्रेटेरिएट में सजा सुनाई जाती है। सुजा सुनाने के लिए 5 सिंह साहिबान फैसला लेते हैं और सजा तय करते हैं। सजा के लिए तलब श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार करते हैं।

ज्ञानी जैल सिंह और बूटा सिंह की हो भी चुकी है पेशी

ज्ञानी जैल सिंह को 1984 के ऑपरेशन ब्लू स्टार के समय राष्ट्रपति होने के नाते उन्हें पंथ विरोधी गतिविधियों के लिए जिम्मेदार माना गया। हालांकि वो उस वक्त श्री अकाल तख्त साहिब के सामने पेश नहीं हुए लेकिन बाद में उन्होंने अकाल तख्त पर पेश होकर माफी मांगी और सेवा की।

केंद्रीय गृह मंत्री बूटा सिंह को भी ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद हरमंदिर साहिब के फिर से निर्माण में सरकारी तौर पर भूमिका निभाने के कारण उन्हें पंथ से निष्कासित कर दिया गया था। कई वर्षों बाद उन्होंने अकाल तख्त पर पेश होकर बर्तन मांजने और जूते साफ करने की धार्मिक सजा पूरी की थी। बूटा सिंह 8 बार लोकसभा के सांसद बने। वह देश के गृह और रक्षा मंत्री भी रहे। इसके बाद बिहार के राज्यपाल और SC आयोग के चेयरमैन भी बने।

भगवंत मान से पहले तीन और सीएम की होगी चुकी है पेशी

  1. 1955 में संयुक्त पंजाब के मुख्यमंत्री भीम सेन सच्चर आजाद भारत में अकाल तख्त पर पेश होने वाले पहले मुख्यमंत्री थे। इसकी वजह ये थी कि जुलाई 1955 में 'पंजाबी सूबा आंदोलन' के दौरान पुलिस स्वर्ण मंदिर परिसर के अंदर दाखिल हुई थी। सिखों के कड़े विरोध के बाद, भीम सेन सच्चर ने अकाल तख्त पर जाकर अपनी गलती मानी और माफी मांगी थी। सच्चर संयुक्त पंजाब में 3 बार मुख्यमंत्री बने थे।
  2. 1986 में मुख्यमंत्री सुरजीत सिंह बरनाला को अकाल तख्त ने तलब किया था। उन्हें ऑपरेशन ब्लैक थंडर के वक्त गोल्डन टेंपल के अंदर पुलिस भेजने को लेकर तलब किया गया था। बरनाला को 'तनखैया' घोषित कर पंथ से निकाल दिया गया था। उन्होंने पद पर रहते हुए ही अकाल तख्त के सामने घुटने टेके और गले में तख्ती लटकाकर जूते साफ करने की धार्मिक सजा पूरी की।
  3. 1979 में प्रकाश सिंह बादल अपनी मुख्यमंत्री की दूसरी टर्म में अकाल तख्त में पेश हुए थे। इसके पीछे की वजह 1978 के निरंकारी कांड और उसके बाद पैदा हुए राजनीतिक हालातों के कारण पंथक विवाद पैदा हुआ था। बादल 4 अक्टूबर 1979 को वे जत्थेदार साधु सिंह भौरा के सामने पेश हुए थे। जिसके बाद वह अकाल तख्त पर पेश हुए थे।

सुखबीर सिंह बादल की भी हो चुकी है पेशी

अकाली दल के प्रधान और पंजाब के पूर्व उप-मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल भी अकाल तख्त पर पेश हो चुके हैं। पहली बार उनको प्रकाश सिंह बादल के साथ तलब किया गया था। तब तत्कालीन सरकार में गृह मंत्री रहते पावन स्वरूपों की बेअदबी न रोक पाने के आरोप लगे थे। दूसरी बार दिसंबर 2024 में श्री अकाल तख्त के 5 सिंह साहिबान ने सुखबीर सिंह बादल को तनखैया घोषित किया। उन्हें डेरा सच्चा सौदा प्रमुख को माफी और बेअदबी मामले में सजा के तौर पर स्वर्ग मंदिर में पहरा देने, श्रद्धालुओं के जूते साफ करने और हाथ जोड़कर माफी मांगने का आदेश दिया गया। इस दौरान 4 दिसंबर 2024 को उनके ऊपर स्वर्ण मंदिर परिसर में गोली चलाई गई थी, जिसमें वो बाल-बाल बच गए थे।

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