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Mahakumbh 2025: कुंभ में साधु-संतों के लिए अमृत स्नान इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है? यहां जानें इसका धार्मिक महत्व

 Written By: Vineeta Mandal
 Published : Jan 18, 2025 10:24 pm IST,  Updated : Jan 18, 2025 10:29 pm IST

Mahakumbh 2025: महाकुंभ में अमृत स्नान के दिन करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु संगम में डुबकी लगाने आते हैं। इस दिन साधु-संत सबसे पहले स्नान करते हैं। तो आइए जानते हैं कि कुंभ में साधु-संत के लिए अमृत स्नान का क्या महत्व है।

महाकुंभ 2025- India TV Hindi
महाकुंभ 2025 Image Source : INDIA TV

Kumbh Mela 2025: प्रयागराज में पूरे 12 वर्षों के बाद महाकुंभ लगा है। कुंभ मेला में देश-विदेश से लाखों-करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु स्नान करने के लिए आ रहे हैं। कुंभ मेला भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं का अद्वितीय पर्व है, जिसका इतिहास हजारों साल पुराना है। महाकुंभ में नागा साधुओं की पेशवाई एक प्रमुख आकर्षण होती है, जो न केवल धार्मिक आस्था, बल्कि भारतीय वीरता और संघर्ष का प्रतीक है। इन साधुओं ने ऐतिहासिक रूप से सनातन धर्म की रक्षा के लिए कई आक्रमणों का सामना किया। कुंभ मेला न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह भारतीय समाज के सामूहिक आस्था और एकता की अभिव्यक्ति भी है, जो हर बार इस अद्वितीय पर्व के माध्यम से पुनः जीवित होती है। 

महाकुंभ मेला में अमृत स्नान (शाही स्नान) का विशेष महत्व है। अमृत स्नान खास दिन, मुहूर्त और ग्रह-नक्षत्र के संयोग में किया जाता है। इस महाकुंभ के पहले अमृत स्नान के मकर संक्रांति के पर्व पर लगभग चार करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम स्नान किया। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा कि अगले अमृत स्नान यानी मौनी अमवस्या के पर्व पर लगभग 10 करोड़ श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचने वाले हैं।  तो आइए जानते हैं साधु-संतों के लिए अमृत स्नान का इतना महत्व क्यों है। 

साधु-संत के लिए अमृत स्नान (शाही स्नान) का क्या महत्व?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमृत स्नान करने से मन की अशुद्धियां दूर होती हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। वहीं कहा जाता है कि अमृत स्नान करने से एक हजार अश्वमेध यज्ञ करने जैसा पुण्य फल मिलता है। कुंभ में अमृत स्नान के दिन प्रथम स्नान का अधिकार नागा साधुओं को है। बता दें कि नागा साधुओं को 'महायोद्धा साधु' भी कहा जाता है, क्योंकि प्राचीन काल में वे धर्म और समाज की रक्षा के लिए सेना के रूप में कार्य करते थे। अमृत स्नान के दिन नागा-साधु और अन्य विभिन्न अखाड़ों के साधु-संत अपने शिष्यों के साथ भव्य जुलूस निकालते हुए संगम में गंगा स्नान करने जाते हैं।  अमृत स्नान कुंभ मेले का मुख्य आकर्षण है, जिसके लिए विशेष प्रबंध किए जाते हैं। 

महाकुंभ 2025 में अमृत स्नान का तिथियां

महाकुंभ का पहला अमृत स्नान 14 जनवरी 2025 को मकर संक्रांति के दिन संपन्न हो चुका है। अब दूसरा अमृत स्नान मौनी अमावस्या के दिन किया जाएगा। मौनी अमावस्या 29 जनवरी को है। वहीं तीसरा और आखिरी अमृत स्नान 3 फरवरी को बसंत पंचमी के दिन किया जाएगा।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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