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Purnima Vrat Kab Hai 2025: न हों कन्फ्यूज, आज रखा जाएगा मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत, फटाफट से नोट कर लें पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Written By: Laveena Sharma @laveena1693 Published : Dec 03, 2025 07:14 am IST, Updated : Dec 04, 2025 06:55 am IST

Margashirsha Purnima Vrat December 2025: मार्गशीर्ष पूर्णिमा का व्रत बेहद शुभ फलदायी माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और चंद्र देव की पूजा की जाती है। इस व्रत में अन्न का सेवन नहीं करते हैं। चलिए आपको बताते हैं इस साल मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत किस दिन रखा जाएगा।

Margashirsha Purnima Vrat - India TV Hindi
Image Source : CANVA मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत कब है

Margashirsha Purnima Vrat December 2025: मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन स्नान-दान का विशेष महत्व होता है। इसे अगहन पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। गीता में स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि- ‘मासानां मार्गशीर्षोऽयम्’ अर्थात् मासों में मैं मार्गशीर्ष हूं। वैसे तो किसी भी पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु की पूजा का महत्व है, लेकिन मार्गशीर्ष के दौरान भगवान विष्णु के कृष्ण स्वरूप की पूजा का अधिक महत्व है। अतः इस पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु के साथ ही उनके स्वरूप भगवान श्री कृष्ण की भी उपासना करनी चाहिए। इसके अलावा इस दिन चंद्रदेव की उपासना भी करनी चाहिए। मार्गशीर्ष महीने की पूर्णिमा को ‘बत्तीसी पूर्णिमा’ या ‘बत्तीसी पूनम’ के नाम से भी जाना जाता है । 

ऐसी मान्यता है कि इस दिन किये गये दान पुण्य का व्यक्ति को 32 गुणा फल प्राप्त होता है, यानि कम मेहनत में अधिक फायदा। अतः अगर आप भी कम मेहनत में अधिक फल पाना चाहते हैं, तो इस दिन आपको कुछ-न-कुछ जरुर दान करना चाहिये। 

मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत 2025 (Margashirsha Purnima Vrat December 2025)

मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत 4 दिसंबर 2025 को रखा जाएगा। पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त 4 दिसंबर की सुबह 08:37 से 5 दिसंबर की सुबह 04:43 बजे तक रहेगा। तो वहीं इस दिन चंद्रोदय समय शाम 04:35 बजे का है।

मार्गशीर्ष पूर्णिमा पूजा विधि (Margashirsha Purnima Puja Vidhi)

  1. पीले आसन पर बैठकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।
  2. रोली, चावल, पीले फूल, तुलसी की पत्तियां, फल इत्यादि से भगवान की विधि विधान पूजा करें। 
  3. ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जप जरूर करें और संभव हो तो इस दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ अवश्य करें। 
  4. भगवान को खीर, गुड़ या चावल का भोग लगाएं। 
  5. इस दिन तुलसी पर जल, रोली, दीप और फूल अर्पित करें।
  6. स्नान और पूजा के बाद तिल, चावल, गुड़, कंबल, कपड़े या फिर भोजन का दान जरूर करें।
  7. दिन भर अन्न का सेवन बिल्कुल भी न करें और रात को चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपना व्रत खोल लें।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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