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Navratri Kalash Sthapana Shubh Muhurat 2025 LIVE: नवरात्रि के पहले दिन कैसे करें कलश स्थापना, यहां जानिए पूजा, विधि, मंत्र, कथा, आरती समेत सारी जानकारी

Written By: Laveena Sharma @laveena1693 Updated : Sep 23, 2025 06:24 am IST

Navratri 2025 Ghatasthapana (Kalash Sthapana) Muhurat, Vidhi, Mantra, Samagri List, Aarti: शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व इस साल 22 सितंबर 2025 से शुरू हो रहा है जिसकी समाप्ति 2 अक्तूबर 2025 को दुर्गा विसर्जन और दशहरा के दिन होगी। यहां आप जानेंगे नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना का शुभ मुहूर्त और विधि क्या रहेगी।

Shardiya navratri ghatasthapana muhurat- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV शारदीय नवरात्रि 2025 घटस्थापना मुहूर्त, विधि और मंत्र

Navratri 2025 Ghatasthapana (Kalash Sthapana) Muhurat, Vidhi, Mantra, Samagri List, Aarti: घटस्थापना जिसे कलश स्थापना (Kalash Sthapana) भी कहते हैं ये नवरात्रि पर्व का महत्वपूर्ण अनुष्ठान होता है। जिसके बिना नवरात्रि पर्व अधूरा माना जाता है। भक्त पहले नवरात्र पर अपने घर में विधि विधान घटस्थापना करते हैं और फिर नौ दिन तक इस कलश की पूजा होती है। घटस्थापना देवी शक्ति का आह्वान है जिसे हमेशा शुभ मुहूर्त में करने की सलाह दी जाती है। शारदीय नवरात्रि में घटस्थापना 22 सितंबर 2025 को की जाएगी। प्रतिपदा तिथि के दिन का पहला एक तिहायी भाग घटस्थापना या कलश स्थापना के लिए सर्वाधिक शुभ समय माना जाता है। चलिए आपको बताते हैं घटस्थापना से जुड़ी हर एक जानकारी यहां।

शारदीय नवरात्रि घटस्थापना मुहूर्त 2025 (Shardiya Navratri 2025 Kalash Sthapana Muhurat)

शारदीय नवरात्रि घटस्थापना मुहूर्त 2025 22 सितंबर 2025, 06:09 AM से 08:06 AM
घटस्थापना अभिजित मुहूर्त 11:49 ए एम से 12:38 पी एम
प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ सितम्बर 22, 2025 को 01:23 ए एम बजे
प्रतिपदा तिथि समाप्त सितम्बर 23, 2025 को 02:55 ए एम बजे
कन्या लग्न प्रारम्भ सितम्बर 22, 2025 को 06:09 ए एम बजे
कन्या लग्न समाप्त सितम्बर 22, 2025 को 08:06 ए एम बजे
नवरात्रि का समापन 2 अक्टूबर 2025

नवरात्रि घटस्थापना सामग्री लिस्ट (Navratri Ghatasthapana Samagri List)

  • चौड़े मुंह वाला मिट्टी का एक बर्तन
  • पवित्र स्थान की मिट्टी
  • आम या अशोक के पत्ते (पल्लव)
  • अक्षत (कच्चा साबुत चावल)
  • सप्तधान्य (7 प्रकार के अनाज)
  • लाल कपड़ा
  • फूल और फूलमाला
  • कलश
  • जल (संभव हो तो गंगाजल)
  • कलावा/मौली
  • सुपारी
  • छिलके/जटा वाला नारियल

घटस्थापना पूजन विधि (Ghatasthapana Pujan Vidhi)

  • घटस्थापना के लिए साफ स्थान से मिट्टी लें और उस पर गंगाजल छिड़कर उसे पवित्र कर लें।
  • इस मिट्टी को चौड़े मुंह वाले बर्तन में रखें और उसमें जौ या सप्तधान्य बोएं।
  • अब उसके ऊपर एक कलश में जल भरकर रखें और कलश के ऊपरी भाग में कलावा बांधें।
  • कलश के जल में लौंग, हल्दी की गांठ, सुपारी, दूर्वा और एक रुपए का सिक्का डालें। 
  • इसके बाद कलश के ऊपर आम या अशोक के पल्लव को रखें।
  • अब एक नारियल लें जिसे लाल कपड़े में लपेटकर कलश के ऊपर रखना है।
  • नारियल पर माता की चुन्नी और कलावा जरूर बंधा होना चाहिए। 
  • इस तरह से कलश स्थापना करने के बाद फूल, कपूर, अगरबत्ती, ज्योत के साथ पंचोपचार पूजा करें।
  • नौ दिनों तक मां दुर्गा से संबंधित मंत्रों का जाप करें और उनकी विधि विधान पूजा करें।
  • नवरात्रि के आखिरी दिन कलश का विसर्जन कर दें।

नवरात्रि माता रानी मंत्र (Navratri Mata Rani Mantra)

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु शांतिरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

(नोट- नवरात्रि के पहले दिन की पूजा से जुड़ी हर एक जानकारी के लिए बने रहिए हमारे इस लाइव ब्लॉग पर।)

Navratri 2025 Ghatasthapana Muhurat LIVE

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  • 6:54 PM (IST) Posted by Arti Azad

    मां शैलपुत्री को चढ़ाएं ये चीजें

    मां शैलपुत्री को सफेद रंग बहुत प्रिय है। इसलिए इस दिन सफेद रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। देवी को रोली, अक्षत, सिंदूर, धूप, दीप और पुष्प अर्पित करें। इसके अलावा मां शैलपुत्री को लाल गुड़हल का फूल या कोई भी सफेद फूल पूजा में शामिल करना न भूलें।

  • 6:04 PM (IST) Posted by Arti Azad

    जयंती मंगला मंत्र

    मंत्र: ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते॥
    महत्व: इस मंत्र में माता दुर्गा के विभिन्न रूपों जैसे जयन्ती, मंगला, काली, भद्रकाली, कपालिनी आदि का आह्वान किया गया है। यह मंत्र सभी प्रकार के कष्टों को दूर करता है और आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करता है।

     

  • 5:35 PM (IST) Posted by Arti Azad

    पहले दिन की पूजा विधि

    शारदीय नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है।
    एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं।
    मिट्टी के बर्तन में जौ बोएं।
    एक कलश में गंगाजल भरकर उसमें सुपारी, दूर्वा घास, अक्षत और सिक्के डालें।
    कलश के मुख पर आम के पत्ते रखें और उस पर नारियल रखें।
    कलश को जौ के बर्तन के ऊपर रखें।
    देवी दुर्गा का आह्वान करें और नौ दिनों तक उनकी विधिवत पूजा करें।
    कुछ साधक इस दौरान नौ दिनों तक उपवास रखते हैं।
    देवी दुर्गा की प्रतिदिन सुबह और शाम भाव के साथ आरती करें।

  • 2:41 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Durga Chalisa Lyrics: दुर्गा माता की चालीसा

    नवरात्रि में दुर्गा चालीसा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। कहते हैं इससे माता रानी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इसलिए नवरात्रि के प्रतिदिन दुर्गा चालीसा जरूर पढ़नी चाहिए।

     

  • 1:51 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    नवरात्रि के दूसरे दिन किस देवी की पूजा होती है?

    नवरात्र के दूसरे दिन देवी दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा की जाती है। मां को मिश्री, फलों और पुष्पों का भोग लगाएं। यदि संभव हो तो सादा दूध या हलवा अर्पित करना भी शुभ माना जाता है।

  • 1:21 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    नवरात्रि में दिन में सोना चाहिए या नहीं?

    अगर आपने नवरात्रि का व्रत रखा है तो दिन में सोने से बचें। धार्मिक मान्यताओं अनुसार किसी भी व्रत में दिन में नहीं सोना चाहिए।

  • 12:47 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    मां शैलपुत्री के मंत्र

    “वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।

    वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥”

     

  • 12:19 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त कितने बजे तक रहेगा?

    शारदीय नवरात्रि कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त दोपहर 12:38 बजे तक रहेगा।

  • 11:48 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    नवरात्रि नौ दिन की पूजा के मंत्र

    1. मां शैलपुत्री का मंत्र- ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः
    2. मां ब्रह्मचारिणी का मंत्र- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नम:
    3. मां चन्द्रघण्टा का मंत्र- ॐ देवी चन्द्रघंटायै नमः
    4. देवी कूष्माण्डा का मंत्र - ॐ कूष्माण्डायै नमः
    5. देवी स्कंदमाता का मंत्र - ॐ स्कन्दमात्राय नमः
    6. देवी कात्यायनी का मंत्र - ॐ कात्यायनै नमः
    7. देवी कालरात्रि का मंत्र - ॐ कालरात्र्यै नमः
    8. देवी महागौरी का मंत्र - ॐ महागौर्यै नमः
    9. देवी सिद्धिदात्री का मंत्र- ॐ सिद्धिदात्र्यै नमः
  • 11:09 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    क्या नवरात्रि के व्रत में कॉफी पी सकते हैं?

    जी हां, नवरात्रि के व्रत में कॉफी और चाय पीने पर कोई पाबंदी नहीं है। दूध से बनी चीजों का सेवन कर सकते हैं।

  • 10:38 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Jai Ambe Gauri Aarti: जय अंबे गौरी आरती

  • 10:15 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    मां शैलपुत्री की आरती (Navratri Day 1 Maa Shailputri Ki Aarti)

    शैलपुत्री मां बैल असवार। करें देवता जय जयकार।

    शिव शंकर की प्रिय भवानी। तेरी महिमा किसी ने ना जानी।

    पार्वती तू उमा कहलावे। जो तुझे सिमरे सो सुख पावे। 

    ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू। दया करे धनवान करे तू। 

    सोमवार को शिव संग प्यारी। आरती तेरी जिसने उतारी। 

    उसकी सगरी आस पुजा दो। सगरे दुख तकलीफ मिला दो। 

    घी का सुंदर दीप जला के। गोला गरी का भोग लगा के। 

    श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं। प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं। 

    जय गिरिराज किशोरी अंबे। शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे।  

    मनोकामना पूर्ण कर दो। भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो। 

  • 9:38 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    नवरात्रि माता रानी भोग

    नवरात्रि के पहले दिन माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है। माता को सफेद रंग अतिप्रिय है इसलिए मां शैलपुत्री को रबड़ी और घी, दूध से बनी चीजें भोग के रूप में लगानी चाहिए। 

  • 8:48 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    आज का चौघड़िया मुहूर्त 2025 (Navratri Choghadiya Muhurat 2025)

    • अमृत - सर्वोत्तम - 06:09 ए एम से 07:40 ए एम
    • शुभ - उत्तम - 09:11 ए एम से 10:43 ए एम
    • लाभ - उन्नति - 03:16 पी एम से 04:47 पी एम
    • अमृत - सर्वोत्तम - 04:47 पी एम से 06:18 पी एम
    • लाभ - उन्नति - 10:45 पी एम से 12:14 ए एम, सितम्बर 23काल रात्रि
    • शुभ - उत्तम - 01:43 ए एम से 03:12 ए एम, सितम्बर 23
    • अमृत - सर्वोत्तम - 03:12 ए एम से 04:41 ए एम, सितम्बर 23
  • 8:20 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Navratri Puja Mantra: नवरात्रि पूजा मंत्र

    1. दुर्गा बीज मन्त्र
    ॐ दुं दुर्गायै नमः।

    2. दुर्गा नवार्ण मन्त्र
    ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।

    3. दुर्गा गायत्री मन्त्र
    ॐ गिरिजायै च विद्महे शिवप्रियायै च धीमहि।
    तन्नो दुर्गा प्रचोदयात्॥

    4. दुर्गा स्तुति मन्त्र
    ॐ सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
    शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते॥
    ॐ सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते।
    भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तुते

    5. दुर्गा ध्यान मन्त्र
    ॐ जटा-जूट-समायुक्तमर्धेन्दु-कृत-लक्षणाम्।
    लोचनत्रय-संयुक्तां पद्मेन्दुसद्यशाननाम्॥

  • 7:59 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Navratri Day 1 Color: नवरात्रि के पहले दिन का रंग

    नवरात्रि‍ के पहले द‍िन नारंगी, लाल और पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। मान्‍यता है क‍ि इस दिन इन रंगों के वस्त्र धारण करने से मां शैलपुत्री का आशीर्वाद मिलता है। 

  • 7:16 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    durga saptashati path: दुर्गा सप्तशती पाठ के नियम

    • दुर्गा सप्तशती पाठ शुरू करने से पहले हाथ जोड़कर प्रणाम करें और फिर देवी का ध्यान करें, फिर पाठ आरंभ करें।
    • दुर्गा सप्तशती पाठ की पुस्तक को हमेशा लाल कपड़े से ढकी चौकी पर रखें, हाथ में सप्तशती की पुस्तक लेकर पाठ करने से अधूरा फल मिलता है।
    • पाठ के बीच में बाधा न डालें। अगर पाठ पूरा होने से पहले किसी वजह से रुकना पड़े तो चतुर्थ अध्याय पूरा करने के बाद ही विराम लें।
    • दुर्गा सप्तशती का पाठ करते समय उच्चारण स्पष्ट और लयबद्ध होना चाहिए, न बहुत तेज और न बहुत धीमा।
    • दुर्गा सप्तशती पाठ से पहले लाल या कुश के आसन पर बैठें।
    • शुरुआत में पुस्तक को प्रणाम करें और माता रानी का ध्यान करें।
    • दुर्गा सप्तशती पाठ के बाद माता से क्षमा याचना करके पाठ को अर्पित करें।
    • नवरात्रि के दौरान मांस, मदिरा, लहसुन-प्याज और तामसिक भोजन से दूर रहें।
    • दुर्गा सप्तशती पाठ करते समय किसी के प्रति बुरे भाव न रखें।
  • 6:48 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    नवरात्रि पूजा सामग्री List

    • मां दुर्गा की प्रतिमा अथवा चित्र
    • लाल चुनरी
    • पान के पत्ते
    • लौंग
    • इलायची
    • आम की पत्तियां
    • चावल
    • दुर्गा सप्तशती की किताब
    • लाल कलावा
    • गंगा जल
    • मिट्टी का बर्तन
    • गुलाल
    • सुपारी
    • चंदन
    • नारियल
    • कपूर
    • जौ के बीच
  • 6:19 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    नवरात्रि में कैसे करें दुर्गा सप्तशती पाठ?

    दुर्गा सप्तशती पाठ सुबह या संध्या समय किया जाना चाहिए। पाठ शुरू करने से पहले संकल्प लें और मां दुर्गा के स्वरूप का ध्यान करें। लाल वस्त्र पर पुस्तक रखकर पूजा करें और फिर अध्यायों का क्रमवार पाठ करें। हर दिन मां के अलग-अलग रूप की पूजा की जाती है और उसी के अनुसार अध्याय पढ़े जाते हैं।

  • 11:54 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    नवरात्रि में करें अर्गला स्तोत्र का पाठ, माता की बरसेगी कृपा

    अर्गलास्तोत्रम् 

    श्रीचण्डिकाध्यानम्
    ॐ बन्धूककुसुमाभासां पञ्चमुण्डाधिवासिनीम् .
    स्फुरच्चन्द्रकलारत्नमुकुटां मुण्डमालिनीम् ..
    त्रिनेत्रां रक्तवसनां पीनोन्नतघटस्तनीम् .
    पुस्तकं चाक्षमालां च वरं चाभयकं क्रमात् ..
    दधतीं संस्मरेन्नित्यमुत्तराम्नायमानिताम् .

    अथ अर्गलास्तोत्रम्

    ॐ नमश्वण्डिकायै

    ॐ जय त्वं देवि चामुण्डे जय भूतापहारिणि 
    जय सर्वगते देवि कालरात्रि नमोऽस्तु ते।

    जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी।
    दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते।

    मधुकैटभविध्वंसि विधातृवरदे नमः .
    रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।

    महिषासुरनिर्नाशि भक्तानां सुखदे नमः 
    रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।

    धूम्रनेत्रवधे देवि धर्मकामार्थदायिनि 
    रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।

    रक्तबीजवधे देवि चण्डमुण्डविनाशिनि 
    रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।

    निशुम्भशुम्भनिर्नाशि त्रिलोक्यशुभदे नमः 
    रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।

    वन्दिताङ्घ्रियुगे देवि सर्वसौभाग्यदायिनि 
    रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।

    अचिन्त्यरूपचरिते सर्वशत्रुविनाशिनि 
    रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।

    नतेभ्यः सर्वदा भक्त्या चापर्णे दुरितापहे
    रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।

    स्तुवद्भ्यो भक्तिपूर्वं त्वां चण्डिके व्याधिनाशिनि 
    रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।

    चण्डिके सततं युद्धे जयन्ति पापनाशिनि 
    रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।

    देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि देवि परं सुखम् 
    रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।

    विधेहि देवि कल्याणं विधेहि विपुलां श्रियम् 
    रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।

    विधेहि द्विषतां नाशं विधेहि बलमुच्चकैः 
    रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।

    सुरासुरशिरोरत्ननिघृष्टचरणेऽम्बिके 
    रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।

    विद्यावन्तं यशस्वन्तं लक्ष्मीवन्तञ्च मां कुरु 
    रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।

    देवि प्रचण्डदोर्दण्डदैत्यदर्पनिषूदिनि 
    रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।

    प्रचण्डदैत्यदर्पघ्ने चण्डिके प्रणताय मे 
    रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।

    चतुर्भुजे चतुर्वक्त्रसंसुते परमेश्वरि 
    रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।

    कृष्णेन संस्तुते देवि शश्वद्भक्त्या सदाम्बिके 
    रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।

    हिमाचलसुतानाथसंस्तुते परमेश्वरि 
    रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।

    इन्द्राणीपतिसद्भावपूजिते परमेश्वरि 
    रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।

    देवि भक्तजनोद्दामदत्तानन्दोदयेऽम्बिके 
    रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।

    भार्यां मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम् 
    रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।

    तारिणि दुर्गसंसारसागरस्याचलोद्भवे 
    रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।

    इदं स्तोत्रं पठित्वा तु महास्तोत्रं पठेन्नरः 
    सप्तशतीं समाराध्य वरमाप्नोति दुर्लभम्।

    इति श्रीमार्कण्डेयपुराणे अर्गलास्तोत्रं समाप्तम्

  • 11:38 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    नवरात्रि के पहले दिन करें माता शैलपुत्री के इन मंत्रों का जप

    • ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः।
    • वंदे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्।
    • या देवी सर्वभूतेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः
  • 11:00 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    सूर्य ग्रहण का नवरात्रि की घटस्थापना पर कोई असर पड़ेगा?

    सूर्य ग्रहण 22 सितंबर को ब्रह्म मुहूर्त से पहले ही समाप्त हो जाएगा, इसलिए सूर्य ग्रहण का कोई बुरा प्रभाव नवरात्रि के घटस्थापना मुहूर्त पर नहीं पड़ेगा। 

  • 10:29 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    नवरात्रि में दीपक की लौ किस दिशा में रखना शुभ, कहां अशुभ?

    पूर्व दिशा- स्वास्थ्य लाभ और आयु में वृद्धि।
    उत्तर दिशा- समृद्धि और आर्थिक लाभ।
    पश्चिम दिशा- कष्टों में वृद्धि और दरिद्रता। 
    दक्षिण दिशा- आर्थिक परेशानियों को कारण। 

  • 10:03 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    शारदीय नवरात्रि में माता की सवारी क्या है?

    शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 22 सितंबर 2025 से होगी। इस दिन सोमवार है और जब भी नवरात्रि सोमवार के दिन से शुरू होती है तो माता रानी गज यानि हाथी पर सवार होकर आती हैं। इस साल भी माता की सवारी हाथी है। हाथी पर माता का सवार होकर आना शुभता का प्रतीक माना जाता है। 

  • 9:25 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    माता शैलपुत्री को क्या भोग लगाना चाहिए?

    माता शैलपुत्री की पूजा नवरात्रि के पहले दिन की जाती है। इस दिन माता शैलपुत्री को दूध की बर्फी, घी से बना हलवा, खीर, रबड़ी आदि का भोग लगाना चाहिए। 

  • 8:50 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    नवरात्रि के दौरान छोटी कन्याओं को ये उपहार देना बेहद शुभ

    नवरात्रि के पावन पर्व के दौरान 10 साल से छोटी कन्याओं को उपहार देना बेहद शुभ माना जाता है। इस दौरान आप पेंसिल, पेन, कॉपी, किताब बच्चियों को उपहार के रूप में दे सकते हैं। इसके साथ ही फल, मिठाई, कपड़े आदि भी कन्याओं को देना शुभ माना जाता है। 

  • 8:21 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    नवरात्रि में माता दुर्गा के इन नामों का जप करना बेहद शुभ

    1. सती।
    2. भवप्रीता।
    3. साध्वी।
    4. भवमोचनी।
    5. भवानी।
    6. आर्या।
    7. दुर्गा।
    8. जया।
    9. आद्या।
    10. त्रिनेत्रा।
    11. शूलधारिणी।
    12. पिनाकधारिणी।
    13. चित्रा।
    14. चंद्रघंटा।
    15. महातपा।
    16. बुद्धि।
    17. अहंकारा।
    18. चित्तरूपा।
    19. चिता।
    20. चिति।
    21. सर्वमंत्रमयी।
  • 7:40 PM (IST) Posted by Arti Azad

    नवरात्रि 2025 कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

    अमृत सर्वोत्तम मुहूर्त- सुबह में 6:09 बजे से सुबह 7:40 बजे तक
    शुभ उत्तम मुहूर्त - सुबह 9:11 बजे से सुबह 10:43 बजे तक
    अभिजीत मुहूर्त - 11:49 बजे से दोपहर 12:38 बजे तक

  • 6:02 PM (IST) Posted by Arti Azad

    नवरात्रि कलश स्थापना के दौरान जौ बोने की विधि

    नवरात्रि कलश स्थापना के लिए जौ बोना जरूरी है। कई बार हम जौ बो देते हैं, लेकिन वह बहुत हरी-भरी नहीं होती। अगर आपके साथ भी ऐसी परेशानी होती है, तो यहां जानिए जौ कैसे बोना चाहिए:
    जौ बोने के लिए सबसे पहले जौ को अच्छी तरह से साफ करें लें। इसके बाद एक मिट्टी का कटोरा ले और इस पर स्वास्तिक बनाए। अब पात्र को मिट्टी या फिर रेत से भर दें। इसके बाद जौ डालें और थोड़ा-थोड़ा करके पानी डालें। रोजाना पूजा के दौरान जौ पर पानी छिड़के। नौ दिनों में ज्वारे उग आएंगे। 

  • 5:29 PM (IST) Posted by Arti Azad

    नवरात्रि कलश स्थापना में रखें ये सामग्री

    मिट्टी या पीतल का कलश, गंगाजल, जौ, आम के पत्ते, अशोक के पत्ते, केले के पत्ते, सात प्रकार के अनाज, जटावाला नारियल, गाय का गोबर, गाय का घी, अक्षत, धूप, दीप, रोली, चंदन, कपूर, माचिस, रुई की बाती, लौंग, इलायची, पान का पत्ता, सुपारी, फल, लाल फूल, माला, पंचमेवा, रक्षासूत्र, सूखा नारियल, नैवेद्य, दूध से बनी मिठाई आदि। 

  • 4:37 PM (IST) Posted by Arti Azad

    ऐसे करें नवरात्रि में घट स्थापना

    • पहले दिन स्नान के बाद व्रत और पूजा का संकल्प करें। फिर पूजा स्थल के ईशान कोण में एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं।
    • अब इस पर 7 तरह के अनाज रखें और कलश स्थापित करें। कलश पर रक्षासूत्र बांधें और रोली का तिलक करें।
    • इसके बाद कलश में गंगा जल डालें और साफ जल से पूरा भर दें। इसके अंदर अक्षत, हल्दी, फूल, चंदन, सुपारी, सिक्का और दूर्वा रखें।
    • अब घट के ऊपर आम और अशोक के पत्ते रखें और ढक्कन से इसका मुख को ढंक दें।
    • कलश के ढक्कन को अक्षत से भरकर सूखे नारियल पर तिलक करके रक्षासूत्र लपेटें और ढक्कन पर स्थापित कर दें
    • अब गणपति बप्पा, वरुण देव समेत अन्य देवी और देवताओं का पूजन करें।
    • कलश के पास जौ बो दें और पूरे 9 दिनों तक इसमें पानी डालना है।
    • घट के पास माता की फोटो रखें और नौ दिनों के लिए अखंड ज्योत जलाएं।
  • 3:51 PM (IST) Posted by Arti Azad

    घट स्थापना के लिए शुभ समय

    शास्त्रों के अनुसार, गृहस्थों के लिए सुबह 7:30 बजे से पहले और 9 बजे के बाद का समय घट स्थापना के लिए उत्तम बताया गया है। वहीं, दुर्गा पंडालों में अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना करना शुभ रहेगा।

  • 3:03 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    नवरात्रि कलश स्थापना मुहूर्त 2025 (Navratri Kalash Sthapana Shubh Muhurat 2025)

    • नवरात्रि कलश स्थापना शुभ मुहूर्त - 06:09 ए एम से 08:06 ए एम
    • घटस्थापना अभिजित मुहूर्त - 11:49 ए एम से 12:38 पी एम
    • प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ - सितम्बर 22, 2025 को 01:23 ए एम बजे
    • प्रतिपदा तिथि समाप्त - सितम्बर 23, 2025 को 02:55 ए एम बजे
  • 2:52 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    मां शैलपुत्री की पूजा विधि (Navratri Day 1 Maa Shailputri Puja Vidhi)

    नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा से पहले विधि विधान घटस्थापना करें। कलश स्थापना के बाद माता के समक्ष घी का दीपक जलाएं और उन्हें फूल अर्पित करें। इस दिन माता को बर्फी, खीर और रबड़ी का भोग लगाएं। माता के मंत्रों का जाप करें। अंत में मां शैलपुत्री की आरती करें और प्रसाद सभी में बांट दें। 

  • 2:31 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    नवरात्रि के पहले दिन का रंग (Navratri 1 Day Color)

    नवरात्रि‍ के पहले द‍िन नारंगी, लाल और पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। मान्‍यता है क‍ि इस दिन इन रंगों के वस्त्र धारण करने से मां शैलपुत्री का आशीर्वाद मिलता है। 

  • 1:46 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    मां दुर्गा के मंत्र (Durga Mantra)

    1. या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता,

    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

    या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता,

    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

    या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता,

    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

    या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता,

    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

    या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता,

    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

    या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता,

    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

    या देवी सर्वभूतेषु शांतिरूपेण संस्थिता,

    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

    2. हिनस्ति दैत्येजंसि स्वनेनापूर्य या जगत् ।

    सा घण्टा पातु नो देवि पापेभ्यो नः सुतानिव ॥

    3. रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभिष्टान् ।

    त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्माश्रयतां प्रयान्ति ॥

    4. शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे ।

    सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमो स्तुते ॥

    5. सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।

    शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।

  • 12:54 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    नवरात्रि व्रत की विधि (Navratri Vrat Vidhi In Hindi)

    • नवरात्रि व्रत शुरू करने से पहले व्रत का संकल्प लेना चाहिए।
    • आपको व्रत कैसे रखना है ये आप पर निर्भर करता है जैसे आप नौ दिनों तक केवल एक समय भोजन करेंगे या केवल फलाहार करेंगे या सिर्फ जल पर रहेंगे।
    • नवरात्रि के व्रत में सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए। 
    • इस व्रत में कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, साबूदाना, समा के चावल, फल, मेवे, दूध, दही, पनीर, आलू, शकरकंद, लौकी, खीरा, टमाटर और सेंधा नमक का सेवन किया जा सकता है।
    • गेहूं, चावल, दाल, प्याज, लहसुन, मांसाहारी भोजन, शराब और साधारण नमक का सेवन इस व्रत में नहीं करना चाहिए।
    • व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
    • नवरात्रि के व्रत में झूठ बोलने और क्रोध करने से बचना चाहिए। 
    • ​व्रत के दौरान दिन में सोने से बचना चाहिए।
    • व्रत रखने वाले को बाल, दाढ़ी और नाखून नहीं काटने चाहिए।
  • 12:32 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    नवरात्रि व्रत में पूजा कैसे करें (Navratri Vrat Pujan Vidhi)

    • नवरात्रि में प्रतिदिन सुबह और शाम मां दुर्गा की विधि-विधान पूजा करनी चाहिए।
    • मां को रोजाना भोग लगाना चाहिए।
    • रोजाना माता की विधि विधान आरती करनी चाहिए।
    • नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
    • अष्टमी या नवमी तिथि पर कन्या पूजन जरूर करना चाहिए।
  • 11:36 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    शारदीय नवरात्रि में माता के आने की सवारी

    इस साल शारदीय नवरात्रि की शुरुआत सोमवार के दिन से हो रही है। देवी पुराण के श्लोक- 'शशि सूर्य गजरुढा शनिभौमै तुरंगमे' के अनुसार जब नवरात्रि की शुरुआत सोमवार या रविवार के दिन होती है तो माता गज यानि हाथी पर सवार होकर आती हैं। यानि साल 2025 में शारदीय नवरात्रि के दौरान भी माता दुर्गा हाथी पर सवार होकर आएंगी। 

  • 11:16 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Navratri Vrat Mein Kya Kha Sakte Hai: नवरात्रि व्रत में क्या खा सकते हैं?

    नवरात्रि व्रत में कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, साबूदाना, समा के चावल, फल, मेवे, दूध, दही, पनीर, आलू, शकरकंद, लौकी, खीरा, टमाटर जैसी सब्जियां और सेंधा नमक का सेवन कर सकते हैं।

     

  • 10:38 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Navratri 2025: नवरात्रि में जौ कैसे बोए जाते हैं?

    • जौ बोने के लिए आपको साफ मिट्टी, जौ के बीज, चौकोर या गोल पात्र, गंगाजल और शुद्ध पानी की जरूरत होगी।
    • अच्छे क्वालिटी के जौ लें और इन जौ को रातभर पानी में भिगोकर रख दें। अगर किसी कारण आप रात में जौ न भिगो पाएं तो सुबह भोर में इसे बो दें।
    • फिर नवरात्रि के पहले दिन सबसे पहले पूजा स्थल को साफ करें।
    • इसके बाद विधि विधान कलश स्थापना करें।
    • फिर साफ मिट्टी को एक पात्र में डालें और उसे थोड़ा दबा दें।
    • मिट्टी में जौ के दानों को समान रूप से छिड़कें।
    • फिर ऊपर से हल्की-सी मिट्टी डाल दें।
    • साथ ही उसमें थोड़ा सा गंगाजल या शुद्ध पानी छिड़क दें।
    • नवरात्रि के हर दिन जौ में थोड़ा-थोड़ा जल छिड़कते रहें ताकि जौ के दाने अच्छे से अंकुरित हो जाएं।
    • ध्यान रखें कि जौ में ज्यादा पानी नहीं डालना है।
    • इस विधि से बोए हुए जौ नवमी या दशमी तक अच्छी से उग जाएंगे।
    • नवरात्रि समाप्त होने पर उगे हुए जौ को किसी नदी या तालाब में विसर्जित कर दें। आप चाहें तो इन्हें पीपल या बरगद के पेड़ के नीचे भी रख सकते हैं।
  • 10:04 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Navratri 2025: नवरात्रि में षोडशोपचार पूजा के लिए संकल्प मंत्र

    यदि नवरात्रि के दौरान षोडशोपचार पूजा करनी हो तो नीचे दिए गए मंत्र से प्रतिदिन पूजा का संकल्प करें:

    ॐ विष्णुः विष्णुः विष्णुः, अद्य ब्राह्मणो वयसः परार्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे जम्बूद्वीपे भारतवर्षे, अमुकनामसम्वत्सरे चैत्रशुक्लप्रतिपदि अमुकवासरे नवरात्रपर्वणि अखिलपापक्षयपूर्वकश्रुति-स्मृत्युक्त-पुण्यसमवेत-सर्वसुखोपलब्धये अमुकगोत्रः अमुकनामाहं भगवत्याः दुर्गायाः षोडशोपचार-पूजनं विधास्ये।

  • 9:35 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Navratri Puja Samagri List: नवरात्रि के लिए पूजा सामग्री

    ●  माँ दुर्गा की प्रतिमा अथवा चित्र
    ●  लाल चुनरी
    ●  आम की पत्तियाँ
    ●  चावल
    ●  दुर्गा सप्तशती की किताब
    ●  लाल कलावा
    ●  गंगा जल
    ●  चंदन
    ●  नारियल
    ●  कपूर
    ●  जौ के बीच
    ●  मिट्टी का बर्तन
    ●  गुलाल
    ●  सुपारी
    ●  पान के पत्ते
    ●  लौंग
    ●  इलायची

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