Maha Shivratri Vrat 2026: महाशिवरात्रि का व्रत कब से कब तक रखा जाएगा? जान लें व्रत की विधि और पारण समय
Maha Shivratri Vrat 2026: महाशिवरात्रि का व्रत कब से कब तक रखा जाएगा? जान लें व्रत की विधि और पारण समय
Written By: Laveena Sharma@laveena1693
Published : Feb 14, 2026 06:36 am IST,
Updated : Feb 14, 2026 06:36 am IST
Maha Shivratri Vrat 2026: महाशिवरात्रि के दिन कई श्रद्धालुओं के मन में ये सवाल रहता है कि आखिर ये व्रत कब से कब तक रखना चाहिए और इसका पारण कब करना चाहिए। यहां हम आपकी इसी कन्फ्यूजन को दूर करेंगे।
Maha Shivratri Vrat 2026 (महा शिवरात्रि व्रत कब से कब तक रखा जाएगा): महाशिवरात्रि हिंदुओं के सबसे बड़े त्योहारों में से एक है। जो हिंदू पंचांग अनुसार फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन व्रत रखने का विशेष महत्व माना गया है। कहते हैं ये व्रत जीवन की तमाम परेशानियों से मुक्ति दिलाता है और जीवन में सुख-समृद्धि लाता है। लेकिन अब सवाल ये आता है कि इस व्रत को कब से कब तक रखना चाहिए। क्या उसी दिन शिवरात्रि व्रत का पारण कर लेना चाहिए या फिर अगले दिन ये व्रत खोलना चाहिए। यहां हम आपको इन्हीं सब सवालों के जवाब देंगे।
महाशिवरात्रि व्रत कब से कब तक है 2026 (Maha Shivratri 2026 Timing)
महाशिवरात्रि व्रत की शुरुआत 15 फरवरी 2026 की सुबह 5 बजकर 17 मिनट से होगी और इसका समापन 16 फरवरी 2026 की सुबह 06:59 बजे के बाद किया जाएगा। व्रत वाले दिन अन्न का सेवन नहीं करना है। सिर्फ फलाहारी भोजन करना है। संंभव हो तो इस दिन रात्रि जागरण जरूर करें।
महाशिवरात्रि व्रत की पूजा का मुहूर्त 2026 (Maha Shivratri Vrat Puja Muhurat 2026)
निशिता काल पूजा समय - 15 फरवरी 2026 की देर रात 12:09 से 01:01 बजे तक
रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय - 06:11 पी एम से 09:23 पी एम
रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय - 09:23 पी एम से 12:35 ए एम, फरवरी 16
रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय - 12:35 ए एम से 03:47 ए एम, फरवरी 16
रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय - 03:47 ए एम से 06:59 ए एम, फरवरी 16
महाशिवरात्रि पर सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
फिर भगवान शिव की विधि विधान पूजा करें।
दिन भर व्रत रहें और अन्न का सेवन बिल्कुल भी न करें।
इस दिन फलाहारी भोजन का सेवन कर सकते हैं।
शाम में फिर से पूजा करें और महाशिवरात्रि की कथा पढ़ें या सुनें।
रात्रि में जागरण करें और ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप करें।
इस दिन रुद्राभिषेक जरूर करें।
फिर अगले दिन सुबह 7 बजे के बाद अपना व्रत खोल लें।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)