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80 साल का लंबा इंतजार: विभाजन के बाद पहली बार लाहौर कॉलेज के गुरुद्वारे में दिखी रौनक, हुआ अरदास का आयोजन

 Published : Feb 13, 2026 10:48 pm IST,  Updated : Feb 13, 2026 10:48 pm IST

पाकिस्तान के एचिसन कॉलेज परिसर स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारे में लगभग 80 वर्षों बाद सिख अरदास आयोजित की गई। 1947 के बाद से सिख विद्यार्थियों की कमी के कारण एचिसन कॉलेज बंद था।

Pakistan Lahore Aitchison College Gurudwara- India TV Hindi
Pakistan Lahore Aitchison College Gurudwara Image Source : @GURUDWARA_PEDIA/ (X)

Pakaistan Lahore College Gurdwara: पाकिस्तान के लाहौर स्थित ऐतिहासिक ऐचिसन कॉलेज के परिसर में करीब 80 साल बाद सिख समुदाय की अरदास सभा आयोजित की गई। कॉलेज प्रशासन ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। यह कार्यक्रम कॉलेज की 140वीं स्थापना वर्षगांठ के मौके पर हुआ, जिसमें भावुक पल देखने को मिले। कॉलेज के मानद दूत डॉ तरूणजीत सिंह बुटालिया ने बताया कि बुधवार को मॉल रोड पर स्थित ऐचिसन कॉलेज के गुरुद्वारे में यह विशेष अरदास सभा हुई। इसमें लगभग 100 लोग शामिल हुए।

'1947 के बाद पहली अरदास सेवा'

डॉ बुटालिया ने कहा, "यह मेरे लिए बहुत भावुक क्षण था। मेरे पिता, दादा और परदादा देश के बंटवारे से पहले इसी कॉलेज के छात्र थे। वो रोज शाम को इसी गुरुद्वारे में अरदास करते थे।" उन्होंने बताया कि 140वीं वर्षगांठ समारोह के लिए इस आयोजन में उन्होंने खास मदद की। कॉलेज के प्राचार्य हुसैन ने कहा, "1947 के बंटवारे के बाद गुरुद्वारे में यह पहली अरदास सेवा है। हमने इसे अपनी 140वीं वर्षगांठ की आध्यात्मिक शुरुआत के रूप में मनाया। हमें उम्मीद है कि आगे भी ऐसे मौके मिलेंगे, जो हिंदू-मुस्लिम-सिख समुदायों के बीच भाईचारा, समझ और सम्मान को बढ़ाएंगे।"

'3 नवंबर 1886 को रखी गई थी कॉलेज की नींव'

ऐचिसन कॉलेज की नींव 3 नवंबर 1886 को रखी गई थी। यह स्कूल अविभाजित पंजाब के राजघरानों और बड़े-बड़े परिवारों के बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए बनाया गया था। बंटवारे से पहले यहां सिख, हिंदू और मुस्लिम छात्र साथ पढ़ते थे। कॉलेज परिसर में गुरुद्वारा, मस्जिद और मंदिर तीनों मौजूद हैं, जो उस समय की धार्मिक एकता को दिखाते हैं।

पुराने छात्रों के परिवारों ने क्या कहा?

1947 में भारत-पाकिस्तान बंटवारे के बाद सिख छात्रों की संख्या बहुत कम हो गई। इसलिए गुरुद्वारे में नियमित अरदास और सिख पूजा बंद हो गई। कॉलेज ने गुरुद्वारे का रखरखाव जरूर जारी रखा, लेकिन लंबे समय तक वहां कोई धार्मिक सभा नहीं हुई। अब करीब 80 साल बाद यह आयोजन हुआ, जो इतिहास और भावनाओं से जुड़ा है। यह कार्यक्रम 13 से 15 फरवरी तक चलने वाले 140वें फाउंडर्स डे समारोह का हिस्सा था। कई पुराने छात्रों के परिवारों ने इसे यादगार बताया।

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