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चीन के साथ पंचशील समझौते पर भारत ने क्यों किए थे साइन? CDS चौहान ने बताया

 Edited By: Vinay Trivedi
 Published : Feb 13, 2026 05:53 pm IST,  Updated : Feb 13, 2026 05:59 pm IST

India China Relations: भारत-चीन संबंधों पर बात करते हुए CDS जनरल अनिल चौहान ने हिमालयन स्ट्रैटेजी फोरम में Panchsheel Agreement की कहानी बताई। उन्होंने कहा कि 1954 में भारत ने तिब्बत को चीन का हिस्सा मान लिया था।

Panchsheel Agreement- India TV Hindi
CDS जनरल अनिल चौहान ने बताई चीन के साथ पंचशील समझौते पर भारत के हस्ताक्षर की कहानी। Image Source : PTI

Panchsheel Agreement News: चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने आजादी के बाद के भारत और चीन संबंधों पर अहम टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि 1954 का Panchsheel Agreement दोनों देशों के बीच स्थिरता बनाए रखने के मकसद से किया गया था। इसके तहत भारत ने तिब्बत को चीन का भाग माना था। पंचशील समझौता सहयोगात्मक संबंध विकसित करने की मंशा से हुआ था। जानें सीडीएस देहरादून के लोक भवन में आयोजित भारत हिमालयन स्ट्रैटेजी फोरम में संबोधित करते हुए CDS अनिल चौहान ने क्या-क्या कहा?

भारत को तय करना था कि बॉर्डर कहां तक होगा- CDS

CDS जनरल अनिल चौहान बोले, 'आजादी के बाद जब ब्रिटिश शासन खत्म हुआ, तो यह निश्चित करना भारत के हाथ में था कि उसका बॉर्डर कहां होगा। जवाहरलाल नेहरू को शायद यह मालूम होगा कि पूर्व में मैकमोहन रेखा के तौर पर हमारे पास एक आधार था और लद्दाख में भी हमारा दावा था, लेकिन स्थिति पूरी तरह साफ नहीं थी। शायद इसलिए उन्होंने Panchsheel Agreement का रास्ता चुना।'

शिनजियांग-ल्हासा तक हो गई थी चीन की पहुंच

जनरल चौहान ने आगे कहा कि उस वक्त चीन की स्थिति भी अलग थी। चीन ने तिब्बत में एंटर कर चुका था, शिनजियांग और ल्हासा तक उसकी पहुंच हो गई थी। यह पूरा एरिया दोनों सिरों से अत्यंत संवेदनशील था, इसलिए इस इलाके को प्राथमिकता मिली। दोनों देश इस एरिया में स्थिरता चाहते थे।

1954 में तिब्बत को माना चीन का हिस्सा

उन्होंने कहा, 'भारत ने 1954 में तिब्बत को चीन का भाग स्वीकार कर लिया और दोनों देशों ने Panchsheel Agreement पर साइन किए। इसके बाद भारत ने यह मान लिया कि उसके नॉर्थ बॉर्डर का ज्यादातर हिस्सा तय हो चुका है, सिवाय उस इलाके के, जिसे औपचारिक संधि के जरिए अंतिम रूप नहीं दिया गया था।'

बॉर्डर और फ्रंटियर का अंतर समझाया

जनरल चौहान ने कहा, 'बॉर्डर वह स्पष्ट सियासी और कानूनी रेखा है जो मैप और जमीन पर चिन्हित होती है, जबकि फ्रंटियर एक व्यापक और धुंधला इलाका होता है, जो रीति-रिवाजों, ऐतिहासिक संपर्कों और परंपराओं से आकार लेता है। सीमा दो राष्ट्रों को अलग करती है, जबकि फ्रंटियर दो सभ्यताओं के मिलन का बिंदु होता है।

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