Sakat Chauth 2026 Puja Vidhi, Muhurat, Moon Rise Time Live: सकट चौथ व्रत को संकष्टी चतुर्थी व्रत, माघी चतुर्थी, संकट चौथ, तिल चौथ, तिलकुट चौथ और महाराष्ट्र में लम्बोदर संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। मान्यताओं अनुसार इस व्रत को रखने से जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त होती है। वहीं महिलाएं ये व्रत मुख्य रूप से अपनी संतानों की लंबी आयु के लिए रखती हैं। ये व्रत निर्जला या फलाहार का सेवन करते हुए कैसे भी रखा जा सकता है। व्रत की शुरुआत सूर्योदय से होती है और समापन चंद्रोदय के बाद होता है। इस व्रत का मुख्य प्रसाद तिल और गुड़ के लड्डू, काली गाजर और शकरकंद होता है। यहां आप जानेंगे सकट चौथ से जुड़ी हर एक जानकारी।
सकट चौथ का चांद रात 8 बजकर 54 मिनट पर दिखने की पूरी उम्मीद है। शहर अनुसार चांद दिखने के समय में थोड़ा-बहुत अंतर देखने को मिल सकता है।
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दिल्ली में चांद अभी नहीं निकला है। पटना, वाराणसी, कोलकाता में चांद दिखाई दे गया है।
लुधियाना में चांद रात 8 बजकर 57 मिनट पर दिखने की पूरी उम्मीद है।
नोएडा में चांद रात 8 बजकर 54 मिनट पर दिखाई देगा।
सकट चौथ का चांद जब निकल आए तो पूजा की थाली लेकर चांद के दर्शन करें। पहले चांद को अर्घ्य दें। फिर धूप-दीप दिखाएं। इसके बाद भोग लगाएं। फिर अपना व्रत खोल लें।
फरीदाबाद में चांद रात 8 बजकर 54 मिनट पर दिखाई देगा।
पंचांग अनुसार गुरुग्राम में चांद रात 8 बजकर 55 मिनट पर दिखाई देने की पूरी उम्मीद है।
बेंगलुरु में चांद रात 9 बजकर 10 मिनट पर निकलने की पूरी उम्मीद है। इससे पहले पूजा संपन्न कर लें। जिससे चांद निकलते ही आप अपना व्रत खोल सकें।
सकट चौथ का व्रत तारों को देखकर भी खोला जाता है और चांद को देखकर भी। आपके यहां जो परंपरा है उसी के अनुसार ये व्रत खोलें।
आज तारे निकलने का समय शाम 7 बजे का है वहीं चांद का दीदार रात 9 बजे के करीब होगा।
कोलकाता - 08:15 पी एम
मुंबई - 09:23 पी एम
जयपुर - 09:02 पी एम
गाजियाबाद - 08:53 पी एम
रांची - 08:27 पी एम
जम्मू - 08:59 पी एम
कोटा - 09:04 पी एम
नोएडा - 08:54 पी एम
सकट चौथ व्रत माघ कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को पड़ता है। ये साल की सबसे बड़ी चतुर्थी मानी जाती है।
ओम जय श्री चौथ मैया, बोलो जय श्री चौथ मैया।
सच्चे मन से सुमिरे, सब दुःख दूर भया।। ओम जय श्री चौथ मैया
ऊंचे पर्वत मंदिर, शोभा अति भारी ।
देखत रूप मनोहर, असुरन भयकारी।। ओम जय श्री चौथ मैया
महासिंगार सुहावन, ऊपर छत्र फिरे।
सिंह की सवारी सोहे, कर में खड्ग धरे।। ओम जय श्री चौथ मैया
बाजत नौबत द्वारे, अरु मृदंग डैरु।
चौसठ जोगन नाचत, नृत्य करे भैरू।।ओम जय श्री चौथ मैया
बड़े बड़े बलशाली, तेरा ध्यान धरे ।
ऋषि मुनि नर देवा, चरणो आन पड़े।। ओम जय श्री चौथ मैया
चौथ माता की आरती, जो कोई सुहगन गावे।
बढ़त सुहाग की लाली, सुख सम्पति पावे।।ओम जय श्री चौथ मैया।
सकट चौथ व्रत के पारण में आप शकरकंद, गाजर और तिलकुट का सेवन जरूर करें। इस व्रत में इन चीजों को जरूर ग्रहण किया जाता है।
सकट चौथ व्रत का पारण चंद्रोदय के बाद किया जाता है। 6 जनवरी को चंद्रोदय रात 8 बजकर 54 मिनट पर होगा। अलग-अलग शहरों में चांद निकलने का समय थोड़ा आगे-पीछे भी हो सकता है।
अगर आसमान में बादल हों या चांद दिखना संभव न हो तो मानसिक रूप से चंद्रमा का ध्यान करके अर्घ्य दे सकते हैं। चांद की दिशा की ओर मुख करके जल अर्पित करें। या फिर चंद्रमा के चित्र, कलश में जल या दीपक को चंद्र का प्रतीक मानकर भी पूजा कर सकते हैं। जल में कच्चा दूध, अक्षत और सफेद फूल डालकर अर्घ्य दें।
सकट चौथ को संकट चौथ, संकष्टी चतुर्थी, तिल-कुटा चौथ, वक्र-तुण्डि चतुर्थी तथा माघी चौथ के नाम से भी जाना जाता है।
सकट का व्रत बच्चों के लिए रखा जाता है। कहते हैं इस व्रत को रखने से बच्चों के जीवन की सारी परेशानियां दूर हो जाती हैं।
अगर आप नौकरी में उच्च पद की प्राप्ति करना चाहते हैं, तो सकट चौथ के दिन आठ मुखी रुद्राक्ष की विधिवत पूजा करके गले में धारण करें।
सकट चौथ का व्रत रखने से संतान के जीवन से सभी तरह के संकट नष्ट हो जाते हैं और संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है। ये व्रत जीवन में खुशहाली लाता है।
सकट चौथ व्रत में अन्न का सेवन नहीं किया जाता है। इस व्रत में सिर्फ फलाहारी भोजन ही ग्रहण किया जाता है। जैसे आप शकरकंद, आलू, टमाटर, तिल के लड्डू खा सकते हैं।
अगर आप अपने बच्चों के जीवन की गति को बनाये रखना चाहते हैं, तो सकट चौथ के दिन भगवान गणेश की पूजा के समय एक हल्दी की गांठ लें और उसे कलावे से बांधकर पूजा स्थल पर रख दें। पूजा समाप्त होने के बाद उस हल्दी की गांठ को पानी की सहायता से पीस लें और उससे बच्चे के मस्तक पर तिलक लगाएं।
साल 2026 की सकट चौथ पर अनेक शुभ और दुर्लभ संयोगों का निर्माण हो रहा है जिससे इस दिन का महत्व कई गुना बढ़ जाएगा। बता दें कि इस दिन प्रीति योग बना है। इसके अलावा धनु राशि में कई बड़े ग्रह जैसे सूर्य, बुध, मंगल और शुक्र एक साथ मौजूद हैं। ऐसे में, चार ग्रहों के एक साथ होने पर चतुर्ग्रही योग, लक्ष्मी नारायण योग और बुधादित्य योग का निर्माण हुआ है। जिससे सकट चौथ व्रत की शुभता में वृद्धि हो गई है।
सकट चौथ की कथा अनुसार एक नगर में साहूकार और साहूकारनी रहते थे। उनका धर्म-कर्म के कार्यों में बिल्कुल भी मन नहीं लगता था। इसके कारण उनकी कोई संतान भी नहीं थी। एक दिन साहूकारनी किसी कारण से पड़ोसी के घर गयी। उसने देखा पड़ोसन सकट चौथ की पूजा करके कहानी सुना रही थी।
साहूकारनी ने पड़ोसन से पूछा ये तुम क्या कर रही हो? तब पड़ोसन ने कहा कि आस सकट चौथ का व्रत है जिसकी मैं कहानी सुना रही हूं। तब साहूकारनी ने पूछा कि सकट क्या होता है? तब पड़ोसन ने उसे बताया कि इस व्रत को करने से अन्न, धन, सुहाग और पुत्र सब मिलता है। साहूकारनी बोली यदि ऐसा है तो मैं सवा सेर तिलकुट करूंगी और चौथ का व्रत भी करूंगी। अगर मैं गर्भवती हो जाती हूं।
श्री गणेश भगवान की कृपया से साहूकारनी गर्भवती हो गई। इसके बाद उसकी इच्छाएं ओर भी ज्यादा बढ़ गई और वो भगवान से कहने लगी कि अगर मेरे लड़का हो जाये, तो में ढाई सेर तिलकुट करूंगी। कुछ दिन बाद उसे लड़का हो गया। इसके बाद वो बोली हे चौथ भगवान! मेरे बेटे का विवाह हो जाए बस, तो मैं सवा पांच सेर का तिलकुट करूंगी।
कुछ वर्षो बाद भगवान गणेश की कृपा से उसका विवाह भी तय हो गया। लेकिन इतने सब के बावजूद उस साहूकारनी ने तिलकुट नहीं किया जिससे चौथ देव क्रोधित हो गये और उन्होंने उसके बेटे को विवाह मंडप से उठाकर पीपल के पेड़ पर बिठा दिया। सभी लोग वर को खोजने लगे पर वो नहीं मिला। इधर जिस लड़की से साहूकारनी के लड़के का विवाह होने वाला था, वह अपनी सहेलियों के साथ गणगौर पूजने के लिए जंगल में दूब लेने के लिए निकली।
तभी रास्ते में उस लड़की को पीपल के पेड़ से आवाज आई: ओ मेरी अर्धब्यहि! यह सुनकर जब लड़की घर आयी तो वह धीरे-धीरे सूख कर कांटा होने लगी। एक दिन लड़की की मां ने कहा कि तू सूखती क्यों जा रही है? मैं तो तुझे अच्छा खाना खिलाती हूं, तेरा खास ख्याल रखती हूं लेकिन समझ नहीं आ रहा कि तेरा ये हाल क्यों हो गया है। तब लड़की बोली कि वह जब भी दूब लेने जंगल जाती है, तो पीपल के पेड़ से कोई आदमी बोलता है कि ओ मेरी अर्धब्यहि।
उसने अपनी माता को बताया कि उस लड़के ने मेहंदी लगा राखी है और सेहरा भी बांध रखा है। तब उसकी मां पीपल के पेड़ के पास पहुंची और उसने देखा कि ये यह तो उसका जमाई ही है। मां ने जमाई से कहा: यहां क्यों बैठे हैं? मेरी बेटी तो अर्धब्यहि कर दी। साहूकारनी का बेटा बोला मेरी मां ने चौथ का तिलकुट बोला था लेकिन नहीं किया जिसकी सजा मुझे मिल रही है।
यह सुनकर उस लड़की की मां साहूकारनी के घर गई और उससे पूछा कि तुमने सकट चौथ का कुछ बोला है क्या? तब साहूकारनी ने उसे सारी बात बता दी। साहूकारनी को अपनी गलती समझ आ गई और फिर उसने सच्चे मन से भगवान गणेश से कहा कि मेरा बेटा घर आजाये, तो ढाई मन का तिलकुट करूंगी। ये सुन सकट भगवान प्रसंन हो गए और उसके बेटे मंडप पर लाकर बैठा दिया। इसके बेटे का विवाह धूम-धाम से हो गया। जब साहूकारनी के बेटा-बहू घर आए तब साहूकारनी ने ढाई मन तिलकुट किया और बोली हे चौथ देवता आप के आशीर्वाद से मेरे बेटा-बहू घर आ गए हैं। अत: अब से मैं हमेशा तिलकुट करके व्रत करूंगी।
हे सकट चौथ भगवान जिस तरह से आपने साहूकारनी को बेटे-बहू से मिलवाया, वैसे ही हम सब को मिलवाना और इस कथा को कहने सुनने वालों का भला करना। बोलो सकट चौथ की जय। श्री गणेश देव की जय।
1. ॐ गं गणपतये नमः
2. त्रयीमयायाखिलबुद्धिदात्रे बुद्धिप्रदीपाय सुराधिपाय।
नित्याय सत्याय च नित्यबुद्धि नित्यं निरीहाय नमोस्…
3. गणपूज्यो वक्रतुण्ड एकदंष्ट्री त्रियम्बक:।
नीलग्रीवो लम्बोदरो विकटो विघ्रराजक :।।
धूम्रवर्णों भालचन्द्रो दशमस्तु विनायक:।
गणपर्तिहस्तिमुखो द्वादशारे यजेद्गणम।।
गणेश जी की कहानी अनुसार एक बुढ़िया माई थी जो नियमित रूप से मिट्टी के गणेश जी की पूजा किया करती थी। लेकिन उसकी परेशानी ये थी कि वो रोज मिट्टी के गणेश बनाए और वो रोज ही गल जाए। उसके घर के पास ही एक सेठ जी का मकान बन रहा था। बुढ़िया मकान बनाने वाले मिस्त्री के पास जाकर बोली मेरा पत्थर का गणेश बना दो। मिस्त्री बोले। जितने में हम तेरा पत्थर का गणेश घड़ेंगे उतने में अपनी दीवार ना चिनेंगे।
बुढ़िया क्रोधित हो गई और बोली राम करे तुम्हारी दीवार टेढ़ी हो जाए। इसके बाद उनकी दीवार टेढ़ी हो गई। अब मिस्त्री बार-बार दीवार चिनें और ढा देवें, चिने और ढा देवें। यही काम करते-करते शाम हो गई। शाम को जब सेठ जी आए तो उन्होंने पूछा कि आज कुछ भी नहीं किया। तब एक मिस्त्री ने बताया कि एक बुढ़िया आई थी वो कह रही थी मेरा पत्थर का गणेश बना दो, हमने उसकी बात नहीं मानी तो उसने कहा तुम्हारी दीवार टेढ़ी हो जाए। तब से ये दीवार सीधी बन ही नहीं रही है।
मिस्त्री की बात सुनकर सेठ ने बुढ़िया बुलवाई और कहा हम तेरा सोने का गणेश गढ़ देंगे। बस हमारी दीवार सीधी कर दो। सेठ ने बुढ़िया को सोने का गणेश गढ़ा दिया। जिसके बाद सेठ की दीवार सीधी हो गई। हे गणेश बगवान जैसे सेठ की दीवार सीधी की वैसी सबकी करना।
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