Sakat Chauth 2026 Ki Katha In Hindi (सकट चौथ की कथा): माघ महीने की कृष्ण चतुर्थी को ही सकट चौथ के रूप में मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं अपनी संतानों की सुरक्षा और लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रहती हैं। ये व्रत सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक रखा जाता है। इस व्रत में अन्न और जल किसी भी चीज का सेवन नहीं किया जाता है। इस साल ये व्रत 6 जनवरी को रखा जा रहा है। यहां हम आपको बताएंगे सकट चौथ की पावन कथा के बारे में।
तिलकुट चौथ की पौराणिक कथा (Tilkut Chauth 2026 Vrat Katha)
सकट चौथ की पौराणिक कथा अनुसार सतयुग में राजा हरिश्चंद्र के राज्य में एक कुम्हार रहा करा था। तमाम कोशिशों के बावजूद भी उसके बर्तन कच्चे रह जा रहे थे जिससे परेशान होकर वह पुजारी के पास गया। पुजारी ने बताया कि किसी छोटे बच्चे की बलि देने से तुम्हारी ये परेशानी दूर हो जाएगी। इसके बाद कुम्हार ने एक बच्चे को आंवा में डाल दिया। जिस दिन उसने ये काम किया उसन दिन सकट चौथ था। उधर बच्चे के परिवार वालों को जब उनका बेटा नहीं मिला तो वो काफी परेशान हो गए। बच्चे की मां ने गणेश जी के समक्ष सच्चे मन से प्रार्थना की। जब कुम्हार सुबह उठा तो उसने देखा कि आंवा में उसके बर्तन भी पक गए और बच्चा भी सुरक्षित था।
ये देख कुम्हार डर गया और राजा के समक्ष पहुंच उसने पूरी कहानी बताई। इसके बाद राजा ने बच्चे और उसकी मां को बुलवाया। तब बच्चे की मां ने संकटों को दूर करने वाले सकट चौथ की महिमा का वर्णन किया। कहते हैं तभी से महिलाएं अपनी संतानों और परिवार के सौभाग्य के लिए सकट चौथ का व्रत करने लगीं।
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