Tuesday, February 17, 2026
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Maha Shivratri Vrat Katha Pdf Live: महाशिवरात्रि की रात 12 बजे जरूर पढ़ें ये पावन कथा, भगवान शिव की खूब बरसेगी कृपा

Written By: Laveena Sharma @laveena1693 Updated : Feb 16, 2026 11:07 am IST

Maha Shivratri Vrat Katha In Hindi (महाशिवरात्रि की व्रत कथा pdf) Live: आज महाशिवरात्रि का पावन पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन भक्त अपना ज्यादा से ज्यादा समय शिव की भक्ति और उपासना में बिताते हैं। वहीं कई श्रद्धालु इस दिन व्रत भी रखते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस व्रत में एक कथा पढ़ना जरूरी माना गया है।

महाशिवरात्रि व्रत कथा- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV महाशिवरात्रि व्रत कथा

Maha Shivratri Vrat Katha In Hindi (महाशिवरात्रि की व्रत कथा pdf) Live: धर्मग्रंथों में महाशिवरात्रि व्रत की बड़ी महिमा बताई जाती है। कहते हैं जो भी श्रद्धालु इस व्रत को पूरी श्रद्धा के साथ रखता है उसके जीवन की तमाम बाधाएं दूर हो जाती हैं। साथ ही सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। इस बार ये व्रत 15 फरवरी 2026 को रखा जा रहा है। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 11 मिनट से लेकर देर रात 1 बजकर 1 मिनट तक रहेगा। इस मुहूर्त में महाशिवरात्रि की पावन कथा पढ़ना बिल्कुल भी न भूलें। 

महाशिवरात्रि व्रत कथा इन हिंदी (Maha Shivratri Vrat Katha In Hindi)

maha shivratri katha

Image Source : INDIA TV
महाशिवरात्रि की संपूर्ण कथा

प्राचीन समय में चित्रभानु नाम का एक शिकारी रहता था। वह जंगल में शिकार करके अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। कर्ज न चुका पाने के कारण एक साहूकार ने उसे शिव-मठ में बंदी बना लिया। संयोग से उसी दिन शिवरात्रि थी। मठ में बंद रहते हुए उसने शिव भक्ति से जुड़ी बातें सुनीं और व्रत कथा भी उसके कानों में पड़ी। संध्या के समय में साहूकार ने उसे बुलाकर कर्ज चुकाने को कहा। शिकारी ने अगले दिन पूरा ऋण लौटाने का वचन दिया। साहूकार ने उसे छोड़ दिया। भूख और प्यास से व्याकुल शिकारी शिकार की तलाश में जंगल की ओर निकल पड़ा।

सूर्यास्त के समय वह एक जलाशय के पास पहुंचा। वहीं बेल के पेड़ पर चढ़कर उसने मचान बना ली। उसे नहीं पता था कि उसी पेड़ के नीचे शिवलिंग स्थित है, जो सूखे बेलपत्रों से ढका हुआ था। मचान बनाते समय उससे जो टहनियां टूटीं, वे नीचे शिवलिंग पर गिर पड़ीं। अनजाने में ही सही उसका शिवरात्रि का व्रत और उसकी पहले प्रहर की पूजा संपन्न हो गई।

रात्रि का पहला पहर बीतने पर एक गर्भिणी हिरणी वहां पानी पीने आई। शिकारी ने धनुष उठाया, लेकिन तभी उसके हाथ से कुछ पत्ते और जल की बूंदें फिर से नीचे शिवलिंग पर गिर पड़ीं। हिरणी ने दया की याचना करते हुए कहा कि वह प्रसव के बाद लौट आएगी। शिकारी का मन पिघल गया और उसने उसे जाने दिया। कुछ समय बाद दूसरी हिरणी आई। शिकारी ने फिर तीर साधा। इस बार भी बेलपत्र शिवलिंग पर गिर पड़े और दूसरे पहर की पूजा भी अनजाने में पूरी हो गई। हिरणी ने अपने प्रिय से मिलकर लौटने का वचन दिया। शिकारी ने उसे भी जीवनदान दे दिया।

रात्रि के अंतिम भाग में तीसरी हिरणी अपने बच्चों के साथ आई। शिकारी ने उसे भी मारने का विचार किया, लेकिन मृगी बोली मैं इन बच्चों को इनके पिता के हवाले करके लौट आऊंगी। इस समय मुझे मत मारो। मां की ममता देखकर उसका हृदय द्रवित हो उठा। उसने तीसरी हिरणी को भी जाने दिया। इस दौरान बेलपत्र गिरते रहे और तीसरे पहर की पूजा भी अपने आप संपन्न हो गई।

भोर होने को थी कि एक हृष्ट-पुष्ट हिरण वहां आया। उसने विनम्र स्वर में कहा कि यदि शिकारी ने उसकी पत्नी और बच्चों को जीवित छोड़ा है, तो वह उसे भी कुछ समय के लिए जीवनदान दे दे। हिरण की सच्चाई और वचनबद्धता देखकर शिकारी का हृदय पूरी तरह बदल गया। उसने धनुष-बाण त्याग दिए। कुछ ही देर बाद वह हिरण वादे के अनुसार अपने पूरे परिवार के साथ लौट आया। उनकी सत्यनिष्ठा और आपसी प्रेम देखकर शिकारी की आंखों से आंसू बह निकले। उसने प्रण लिया कि वह जीवन में अब कभी हिंसा नहीं करेगा। उसी क्षण देवताओं ने उसकी परीक्षा को सफल माना।

तभी भगवान शिव प्रकट हुए और शिकारी को आशीर्वाद दिया। उसकी करुणा से प्रसन्न होकर उसे नया जीवन पथ अपनाने का वरदान मिला और उसे 'गुह' नाम प्रदान हुआ। यही गुह आगे चलकर भगवान श्रीराम का सखा बना। इस प्रकार महाशिवरात्रि के व्रत, रात्रि जागरण और अनजाने में हुई पूजा ने एक कठोर हृदय वाले शिकारी को दयालु और धर्मपरायण बना दिया। ॐ नमः पार्वती पतये हर हर महादेव! 

Maha Shivratri Katha PDF Download

Maha Shivratri 2026 Puja Vidhi Live Updates: महाशिवरात्रि पर 300 साल बाद बना बेहद दुर्लभ संयोग, इस मुहूर्त में करें शिव की उपासना, जान लें पूजा की संपूर्ण विधि

Maha Shivratri 2026 Vrat Katha: महाशिवरात्रि के दिन जरूर पढ़ें ये पावन कथा, इसके बिना अधूरी है व्रत पूजा

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  • 11:45 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Shivratri Kyu Manai Jati Hai: शिवरात्रि क्यों मनाई जाती है?

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार फाल्गुन महा के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को शिव-शक्ति एक हुए थे यानि भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इसलिए महाशिवरात्रि के पर्व को धूमधाम से मनाया जाता है। वहीं कुछ मान्यताओं के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन पर ही भगवान शिव ने समुद्र मंथन से निकले विष का पान किया था और संसार की रक्षा की थी इसलिए भी महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। कुछ धार्मिक ग्रंथों में इस दिन पर शिवलिंग की उत्पत्ति की बात भी बताई गई है। 

  • 11:30 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri 2026: शिवलिंग पर जल चढ़ाने के मुहूर्त

    • लाभ - उन्नति - 02:11 AM से 03:47 AM, फरवरी 16
    • शुभ - उत्तम - 05:23 AM से 06:59 AM, फरवरी 16
  • 11:14 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri 2026: भगवान शिव को बेलपत्र क्यों प्रिय है

    इसका वर्णन पुराणों में मिलता है, जिसके अनुसार मां पार्वती ने शिव जी को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था। इस दौरान वे रोज शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करती थीं। ऐसा कहा जाता है कि मां गौरा ने ही सबसे पहले महादेव के चरणों में बेलपत्र चढ़ाए थे, उनकी सच्ची साधना और कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने मां पार्वती की मनोकामना पूर्ण की थी। तभी से कहा जाता है कि भगवान शिव केवल जल और बेलपत्र से उपासना करने वाले भक्तों की भी अर्जी सुन लेते हैं। शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करने से माता पार्वती का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है। 

  • 11:04 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri 2026: महाशिवरात्रि पर शिवलिंग की पूजा कैसे करें

    • पूजा शुरू करने से पहले अपनी आंखें दोनों आंखों को बंद करके शांत चित्त होकर बैठ जाए। अब जीवन में शांति, बाधाओं की निवारण और आध्यात्मिक विकास के लिए भगवान शिव से प्रार्थना करें।
    • इसके बाद आंखें खोलें और "ओम नमः शिवाय" का जाप करते हुए शिवलिंग पर शुद्ध जल डालें। सबसे पहले शिवलिंग के दाहिने और बाएं स्थान पर स्थित गणेश जी और कार्तिकेय पर जल अर्पित करें। फिर शिवलिंग का गोल घेरा जिसमें शिवलिंग स्थित है और जो मां पार्वती को समर्पित है, वहां जल चढ़ाएं। फिर मध्य भाग जो शिव और पार्वती की पुत्री अशोक सुंदरी का स्थान है, वहां जल अर्पित करें और फिर शिवलिंग पर जल चढ़ाएं।
    • अब दूध, दही, शहद, घी और चीनी को एक -एक करके शिव मंत्रों का जाप करते हुए धीरे-धीरे शिवलिंग पर अर्पित करें।
    • सभी अर्पित वस्तुओं को अर्पित करने के बाद दोबारा शिवलिंग को शुद्ध जल से स्नान कराएं।
    • इसके बाद मंत्रों का जाप करते हुए शिव जी को बिल्वपत्र अर्पित करें, जो उन्हें अत्यंत प्रिय माने जाते हैं। बेलपत्र साफ और साबुत होने चाहिए।  
    • अब शिवलिंग को गीले चंदन का तिलक लगाएं और सफेद फूल अर्पित करें।
    • इसके बाद मंगल की कामना करते हुए शिव जी से प्रार्थना करें और धूप-दीप से आरती के साथ अपना अनुष्ठान पूर्ण करें। 
  • 6:06 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    Maha Shivratri Par Nishita Kaal Puja Ka Mahatva: महाशिवरात्रि पर निशिता काल पूजन का महत्व

    निशिता काल समय रात्रि के मध्य हिस्से को दर्शाता है और ये समय शिव की उपासना के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। कहते हैं इस अवधि में किये गए जप, ध्यान और रुद्राभिषेक का विशेष फल प्राप्त होता है। 

  • 5:06 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    Maha Shivratri 2026: महाशिवरात्रि व्रत पारण की विधि

    महाशिवरात्रि का पारण 16 फरवरी के दिन किया जाएगा। इस दिन सुबह उठकर स्नान-ध्यान करें। 
    इसके बाद पूजा स्थल पर धूप-दीप जलाकर भगवान शिव की पूजा आपको करनी चाहिए। 
    पूजा के दौरान बेलपत्र, भांग, धतूरा, दूध, दही, घी आदि भगवान शिव को अर्पित करें। 
    इसके बाद शिव मंत्रों का जप, शिव चालीसा आदि का पाठ आपको करना चाहिए। 
    भगवान शिव को केला, सेब, बेर आदि का भोग आपको लगाना चाहिए। 
    पूजा के अंत में शिव जी की आरती का पाठ करें। 
    इसके बाद फल, मखाना, साबुदाना आदि खाकर आप शुभ मुहूर्त में व्रत खोल सकते हैं।

  • 4:10 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    Maha Shivratri 2026: महाशिवरात्रि पूजा के बाद सामग्रियों का क्या करें

    बेलपत्र और फूलों को पेड़-पौधे की जड़ में या बहते हुए स्वच्छ जल में प्रवाहित कर देना चाहिए।
    सूखे फूलों को इकट्ठा कर खाद भी बना सकते हैं।
    शिवलिंग पर चढ़ाया गया दूध, दही या गन्ने का रस पेड़ों में डाल देना चाहिए।
    इसे कभी भी नाली या गंदे स्थान पर न बहाएं।
    पूजा में चढ़ाए गए फल-प्रसाद को परिवार और जरूरतमंदों में बांट देना चाहिए।
    दीपक की बची हुई रूई और तेल को किसी पेड़ के नीचे रख देना चाहिए।
    अभिषेक का जल किसी पवित्र पौधे में डाल सकते हैं या घर की छत पर भी छिड़क सकते हैं इसे शुभ माना जाता है।

  • 3:26 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    Maha Shivratri 2026: क्या शिवरात्रि की रात में भोजन कर सकते हैं?

    जी नहीं, शिवरात्रि के रात में आप भोजन नहीं कर सकते हैं। सिर्फ फलाहारी भोजन ही ग्रहण कर सकते हैं। अन्न का सेवन इस पूरे दिन नहीं किया जाता है।

  • 2:59 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri 2026: महाशिवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व

    हिंदू धर्म में शिव केवल महादेव का नाम नहीं है बल्कि ये उस परम आत्मा का नाम भी है जो सभी में विद्यमान है। शिव का एक अर्थ सदा कल्याणकारी भी है। आत्मा का कल्याण आध्यात्मिक जागरण से ही होता है और महाशिवरात्रि के दिन योग-ध्यान के जरिए परम सत्य की आप प्राप्ति कर सकते हैं। इसलिए आध्यात्मिक दृष्टि से भी महाशिवरात्रि के दिन को बेहद खास माना जाता है। इस दिन ध्यान करने से काम, क्रोध, मोह और लोभ जैसे विकारों से आपको मुक्ति मिलती है और आपकी चेतना का विकास होता है। इस दिन सांसारिक सुखों से हटकर शिव पूजन करने पर शान्ति, पवित्रता और प्रेम का विकास होता है। 

  • 2:39 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri 2026: दक्षिणामूर्ति शिव मन्त्र

    ॐ नमो भगवते दक्षिणामूर्तये।
    मह्यं मेधां प्रज्ञां प्रयच्छ स्वाहा॥

     

  • 2:04 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri Ki Raat: अगर महाशिवरात्रि की पूरी रात नहीं जाग सकते तो क्या करें

    वैसे तो महाशिवरात्रि की पूरी रात जागना चाहिए। लेकिन अगर ऐसा कर पाना संभव नहीं है तो कम से कम महाशिवरात्रि की मध्य रात्रि यानी निशिता काल मुहूर्त में तो जरूर ही जागें। महाशिवरात्रि पर निशिता काल मुहूर्त रात 12:09 से 01:01 बजे तक रहेगा। इस समय शिवलिंग का अभिषेक करना और ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करना बेहद शुभ फलदायी माना जाता है। 

  • 2:03 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    महाशिवरात्रि की रात में क्या करना चाहिए? (Maha Shivratri Ki Raat Mein Kya Karna Chahiye)

    • महाशिवरात्रि की रात में जागकर भगवान शिव का ध्यान, जप और भजन करना चाहिए।
    • आज के दिन रात्रि के प्रथम प्रहर में दूध से, दूसरे प्रहर में दही से, तीसरे प्रहर में घी से और चौथे प्रहर में मधु, यानि शहद से शिवलिंग को स्नान कराना चाहिए और हर प्रहर में शिवलिंग को स्नान कराते समय अलग-अलग मंत्रों के जप की बात भी कही गयी है।
    • प्रथम प्रहर में- ‘ह्रीं ईशानाय नमः। दूसरे प्रहर में- ‘ह्रीं अघोराय नमः।’ तीसरे प्रहर में- ‘ह्रीं वामदेवाय नमः। और चौथे प्रहर में- ‘ह्रीं सद्योजाताय नमः।’ मंत्र का जप करते हुए शिवलिंग को स्नान कराना चाहिए।
    • इसके अलावा शास्त्रों में यह भी उल्लेख मिलता है कि आज के दिन दूसरे, तीसरे और चौथे प्रहर में व्रती को पूजा, अर्घ्य, जप और कथा सुननी चाहिए, स्तोत्र पाठ करना चाहिए और भगवान को प्रणाम करना चाहिए।
    • जबकि एक अन्य मत के अनुसार चन्दन के लेप से आरम्भ कर सभी उपचारों के साथ शिव पूजा करनी चाहिए और अग्नि में तिल, चावल और घी मिश्रित भात, यानि पके हुए चावल की आहुति देनी चाहिए।
    • फिर इस प्रकार हवन के बाद किसी एक साबुत फल की आहुति भी देनी चाहिए। 
    • सामान्यतया लोग सूखे नारियल फल की आहुति देते हैं।
    • इसके अलावा आज के दिन शिव कथा का पाठ करना चाहिए और पुनः अर्धरात्रि, रात्रि के तीसरे प्रहर और चौथे प्रहर में भी आहुतियां डालनी चाहिए और फिर अगले दिन सूर्योदय के समय ऊँ नमः शिवाय मंत्र का पाठ करना चाहिए। 
  • 1:43 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri 2026: महाशिवरात्रि क्यों मनाते हैं?

    आज ही के दिन से सृष्टि का प्रारंभ हुआ था। ईशान संहिता में ये भी बताया गया है कि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को महानिशीथकाल में आदिदेव भगवान शिव करोड़ों सूर्यों के समान प्रभाव वाले लिंग रूप में प्रकट हुए थे- फाल्गुन कृष्ण चतुर्दश्याम आदिदेवो महानिशि। शिवलिंग तयोद्भूत: कोटि सूर्य समप्रभ:॥

     

  • 1:16 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri 2026: महाशिवरात्रि की व्रत कथा कब पढ़नी चाहिए

    महाशिवरात्रि की व्रत कथा निशिता काल में पढ़ना सबसे शुभ माना जाता है। अगर इस समय पर कथा पढ़ना संभव न हो तो आप प्रदोष काल में भी ये कथा पढ़ सकते हैं।

  • 12:58 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    महाशिवरात्रि पूजा विधि (Maha Shivratri Puja Vidhi)

    • महाशिवरात्रि के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। काले रंग के कपड़े न पहनें।
    • इसके बाद पूजाघर में दीपक जलाएं और व्रत का संकल्प लें।
    • बेलपत्र, धतूरा, भांग, फल, फूल, चंदन, रोली, अबीर इत्यादि से शिव-पार्वती की विधि विधान पूजा करें।
    • इसके बाद मंदिर में जाकर शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, भांग, धतूरा, चंदन, रोली, अक्षत इत्यादि चीजें चढ़ाएं।
    • दिन भर व्रत रहें और जब समय मिले भगवान का ध्यान भी करते रहें।
    • दिन में किसी भी समय रुद्राभिषेक भी जरूर कराएं। अगर ये संभव न हो तो शाम में शिवलिंग का खुद ही अभिषेक करें।
    • शाम में फिर से भगवान शिव-पार्वती की विधि विधान पूजा करें और उन्हें धतूरा, भांग, बेलपत्र इत्यादि चीजें चढ़ाएं। 
    • साथ ही महाशिवरात्रि व्रत की कथा भी सुनें और इसके बाद भगवान शिव की कपूर से आरती करें।
    • आरती के बाद भोग लगाकर पूजा संपन्न करें।
    • संभव हो तो इस दिन रात्रि भर जागरण करें। 
    • इस दिन रात्रि के चारों प्रहर की पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है।
  • 12:33 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Shankar Shiv Bhole Umapati Mahadev: ॐ शंकर शिव भोले उमापति महादेव


    शंकर शिव भोले उमापति महादेव
    शंकर शिव भोले उमापति महादेव
    पालनहार परमेश्वर, विश्वरूप महादेव
    पालनहार परमेश्वर, विश्वरूप महादेव
    महादेव, महादेव, महादेव...
    महेशम् सुरेशम सुरारती नाशम, सुरारती नाशम
    विभूम विश्वनताम, विभुत्यांग भूषं
    विभूम विश्वनताम, विभुत्यांग भूषं
    तिरूपाक्षहमितवार कृपहुँ त्रिनेत्रम
    तिरूपाक्षहमितवार कृपहुँ त्रिनेत्रम
    सदानन्द निमें प्रभु पंचबद्रम
    सदानन्द निमें प्रभु पंचबद्रम
    नमस्ते नमस्ते विभोविश्वमूर्ते

    शंकर शिव भोले उमापति महादेव
    शंकर शिव भोले उमापति महादेव
    पालनहार परमेश्वर, विश्वरूप महादेव
    पालनहार परमेश्वर, विश्वरूप महादेव
    महादेव, महादेव, महादेव...

    तत्व जगतभवती देवभवस्मरारे
    त्वयेव तिस्टति जगन मिड्ड विश्वनाथ
    तत्व जगतभवती देवभवस्मरारे
    त्वयेव तिस्टति जगन मिड्ड विश्वनाथ
    त्वयेव गच्छति लयम् जगदीश्वर
    लिंगात्मकम हारस्चरात चरः विश्वरूपिंग
    नमस्ते नमस्ते तपो योग गम्याः

    शंकर शिव भोले उमापति महादेव
    शंकर शिव भोले उमापति महादेव
    पालनहार परमेश्वर, विश्वरूप महादेव
    पालनहार परमेश्वर, विश्वरूप महादेव
    महादेव, महादेव, महादेव...

  • 12:10 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri 2026 Shubh Sayong: महाशिवरात्रि पर 300 साल बाद बना ये दुर्लभ संयोग

    महाशिवरात्रि पर बुधादित्य राजयोग, लक्ष्मी नारायण राजयोग, शुक्रादित्य राजयोग और चतुर्ग्रही राजयोग का शुभ संयोग रहेगा। इसके अलावा इस दिन प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, साध्य, शिव, शुक्ल, शोभन, सर्वार्थसिद्ध, चंद्रमंगल, त्रिग्रही, राज और ध्रुव योग का भी निर्माण हो रहा है।

  • 11:43 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri Ki Kahani: महाशिवरात्रि की कहानी

    पौराणिक कथाओं अनुसार महाशिवरात्रि के दिन भगवान भोलेनाथ शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे इसलिए इस शिवरात्रि पर शिवलिंग की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।

  • 11:26 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Shiv Ji Ki Aarti: शिव जी की आरती लिरिक्स

    • ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
    • ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
    • एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे।
    • हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥
    • ॐ जय शिव…
    • दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
    • तीनों रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥
    • ॐ जय शिव…
    • अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी।
    • चंदन मृगमद चंदा, सोहे त्रिपुरारी॥
    • ॐ जय शिव…
    • श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
    • ब्रह्मादिक सनकादिक भूतादिक संगे॥
    • ॐ जय शिव…
    • कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूलधर्ता।
    • जगकर्ता जगहर्ता जगपालनकर्ता॥
    • ॐ जय शिव…
    • ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
    • प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका॥
    • ॐ जय शिव…
    • लक्ष्मी व सावित्री पार्वती संगा।
    • पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा॥
    • ॐ जय शिव…
    • पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा।
    • भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा॥
    • ॐ जय शिव…
    • जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला।
    • शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥
    • ॐ जय शिव…
    • काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
    • नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥
    • ॐ जय शिव…
    • त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे।
    • कहत शिवानन्द स्वामी, मनवान्छित फल पावे॥
    • ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
  • 10:45 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri 2026: गणेश जी की आरती

    जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
    माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
    एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी ।
    माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥
    जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
    माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
    पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा ।
    लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा ॥
    जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
    माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
    अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया ।
    बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥
    जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
    माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
    'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा ।
    माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
    जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
    माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
    दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी ।
    कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी ॥
    जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
    माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

  • 10:23 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Mata Ki Parvati Aarti: माता पार्वती की आरती

    जय पार्वती माता जय पार्वती माता

    ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल कदा दाता।

    जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
    अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता 

    जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुण गाता।
    जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
     
    सिंह को वाहन साजे कुंडल है साथा
    देव वधु जहं गावत नृत्य कर ताथा।
     
    जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
    सतयुग शील सुसुन्दर नाम सती कहलाता।
     
    हेमांचल घर जन्मी सखियन रंगराता।
    जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

    शुम्भ निशुम्भ विदारे हेमांचल स्याता
    सहस भुजा तनु धरिके चक्र लियो हाथा।

    जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
    सृष्ट‍ि रूप तुही जननी शिव संग रंगराता।
     
    नंदी भृंगी बीन लाही सारा मदमाता।
    जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
     
    देवन अरज करत हम चित को लाता।
    गावत दे दे ताली मन में रंगराता।

    जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
    श्री प्रताप आरती मैया की जो कोई गाता।

    सदा सुखी रहता सुख संपति पाता।
    जय पार्वती माता मैया जय पार्वती माता।

  • 9:56 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri Vrat Katha Time: महाशिवरात्रि की कथा करने का टाइम

    महाशिवरात्रि की कथा पढ़ने या सुनने का समय शाम 6 बजकर 11 मिनट से लेकर रात 1 बजकर 1 मिनट तक रहेगा।

  • 9:13 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri 2026: महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है?

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार फाल्गुन महा के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को शिव-शक्ति एक हुए थे यानि भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इसलिए महाशिवरात्रि के पर्व को धूमधाम से मनाया जाता है। वहीं कुछ मान्यताओं के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन पर ही भगवान शिव ने समुद्र मंथन से निकले विष का पान किया था और संसार की रक्षा की थी इसलिए भी महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। कुछ धार्मिक ग्रंथों में इस दिन पर शिवलिंग की उत्पत्ति की बात भी बताई गई है। 

  • 8:54 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    महाशिवरात्रि के भजन (Maha Shivratri Ke Bhajan)

    • सुबह सुबह ले शिव का नाम, कर ले बन्दे ये शुभ काम
    • सुबह सुबह ले शिव का नाम, कर ले बन्दे ये शुभ काम
    • सुबह सुबह ले शिव का नाम, शिव आयेंगे तेरे काम
    • सुबह सुबह ले शिव का नाम, कर ले बन्दे ये शुभ काम
    • ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय ।।
    • खुद को राख लपेटे फिरते, औरों को देते धन धाम
    • खुद को राख लपेटे फिरते, औरों को देते धन धाम
    • देवो के हित विष पी डाला, नील कंठ को कोटि प्रणाम, नील कंठ को कोटि प्रणाम
    • सुबह सुबह ले शिव का नाम, शिव आयेंगे तेरे काम
    • सुबह सुबह ले शिव का नाम, कर ले बन्दे ये शुभ काम
    • ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय ।।
    • शिव के चरणों में मिलते हैं सारी तीरथ चारो धाम
    • शिव के चरणों में मिलते हैं सारी तीरथ चारो धाम
    • करनी का सुख तेरे हाथों, शिव के हाथों में परिणाम, शिव के हाथों में परिणाम
    • सुबह सुबह ले शिव का नाम, शिव आयेंगे तेरे काम ॥
    • सुबह सुबह ले शिव का नाम, कर ले बन्दे ये शुभ काम
    • ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय ।।
    • शिव के रहते कैसी चिंता, साथ रहे प्रभु आठों याम
    • शिव के रहते कैसी चिंता, साथ रहे प्रभु आठों याम
    • शिव को भजले सुख पायेगा, मन को आएगा आराम, मन को आएगा आराम
    • सुबह सुबह ले शिव का नाम, शिव आयेंगे तेरे काम ॥
    • सुबह सुबह ले शिव का नाम, कर ले बन्दे ये शुभ काम
    • ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय ।।
  • 8:37 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Shiv Namavali Mantra: श‍िव नामावली मंत्र

    • श्री शिवाय नम:।।
    • श्री शंकराय नम:।।
    • श्री महेश्वराय नम:।।
    • श्री सांबसदाशिवाय नम:।।
    • श्री रुद्राय नम:।।
    • ओम पार्वतीपतये नम:।।
    • ओम नमो नीलकण्ठाय नम:।।
  • 8:06 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    महाशिवरात्रि 2026 पर हवन कब करें (Maha Shivratri 2026 Par Havan Kab Kare)

    महाशिवरात्रि पर आप प्रदोष काल, निशिता काल या रात्रि के चारों प्रहर की पूजा के बाद हवन कर सकते हैं। जब भी आप शिवलिंग का अभिषेक करें तो उसके बाद हवन पूजा भी जरूर करें।

  • 7:44 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Shiv Ji Ki Aarti: शिव जी की आरती

  • 7:19 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    महाशिवरात्रि की पौराणिक कथा (Maha Shivratri Ki Katha)

    महाशिवरात्रि की कथा अनुसार फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इसलिए ही इस तिथि को महाशिवरात्रि के नाम से मनाया जाने लगा। वहीं एक अन्य कथा अनुसार इस दिन भगवान भोलेनाथ शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे। इसलिए ही इस शिवरात्रि पर शिवलिंग का अभिषेक करने का विशेष महत्व माना जाता है।

  • 7:05 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri Ke Gana: भोले बाबा के भजन

  • 6:49 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri 2026: महाशिवरात्रि की आरती

    जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।
    ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव...॥

    एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
    हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव...॥

    दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
    त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव...॥

    अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।
    चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव...॥

    श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।
    सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव...॥
    कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।
    जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय 

    ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
    प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव...॥

    काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।
    नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव...॥

    त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।
    कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव...॥

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