1. Hindi News
  2. धर्म
  3. Putrada Ekadashi Vrat Katha: पुत्रदा एकादशी के दिन जरूर पढ़ें राजा सुकेतुमान की ये पावन कथा, नहीं तो अधूरा रह जाएगा व्रत

Putrada Ekadashi Vrat Katha: पुत्रदा एकादशी के दिन जरूर पढ़ें राजा सुकेतुमान की ये पावन कथा, नहीं तो अधूरा रह जाएगा व्रत

 Written By: Laveena Sharma @laveena1693
 Published : Dec 29, 2025 07:59 am IST,  Updated : Dec 31, 2025 06:22 am IST

Paush Putrada Ekadashi Vrat Katha: इस साल पुत्रदा एकादशी का व्रत 30 और 31 दिसंबर दोनों दिन रखा जाएगा। 30 दिसंबर को शैव संप्रदाय के लोग व्रत रखेंगे तो वहीं वैष्णव संप्रदाय के लोग 31 को ये व्रत रखेंगे। चलिए आपको बताते हैं पौष पुत्रदा एकादशी की पावन कथा के बारे में।

paush putrada ekadashi katha- India TV Hindi
पौष पुत्रदा एकादशी व्रत कथा Image Source : INDIA TV

पुत्रदा एकादशी की व्रत कथा (Paush Putrada Ekadashi Vrat Katha): एक नगर में सुकेतुमान नाम का राजा रहता था जिसकी पत्नी का नाम शैव्या था। राजा की कोई संतान नहीं थी जिस वजह से दोनों पति-पत्नी दुखी रहते थे। राजा ये सोचकर परेशान थे कि उनके बाद उनका राजपाट कौन संभालेगा और मृत्यु के बाद उनका अंतिम संस्कार कौन करेगा और कौन उन्हें मुक्ति दिलाएगा। एक बार राजा किसी जंगल में विचरण करने निकले और प्रकृति के सौंदर्य को देखकर मंत्रमुग्‍ध हो गए। जंगल में राजा ने देखा कि सभी पशु-पक्षी अपनी पत्नी और संतानों के साथ सुख से जी रहे हैं। यह देखकर राजा और भी परेशान हो गए और सोचने लगे कि इतने पुण्य कर्म करने के बाद भी वह निःसंतान रह गए।

जब राजा की ऋषि से हुई मुलाकात

राजा को कुछ समय बाद प्यास लगी और वह पानी की तलाश करने लगे। तभी उनकी नजर नदी के किनारे बने ऋषि-मुनियों के आश्रम पर पड़ी। राजा ने वहां जाकर सभी ऋषियों को प्रणाम किया।  राजा के विनम्र स्वभाव से वहां उपस्थित सभी ऋषि काफी प्रसन्न हुए और उन्होंने राजा से कोई वरदान मांगने के लिए कहा। इस पर राजा ने कहा -हे! ऋषिगण मेरे पास सब कुछ है लेकिन मेरी कोई संतान नहीं है। जिस वजह से मैं और मेरी पत्नी चिंता में डूबे रहते हैं।

ऋषिमुनि ने बताया पुत्रदा एकादशी व्रत का महत्व

ऋषि बोले, “राजन! भगवान ने आज तुम पर अपनी विशेष कृपा दिखाई है और उन्हीं की कृपा से तुम यहां पहुंचे हो। ऋषि ने राजा से पुत्रदा एकादशी का व्रत रखने को कहा। राजा ने नियम से उस व्रत का पालन किया। व्रत के कुछ दिनों बाद रानी गर्भवती हुईं और उन्हें एक तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति हुई और अंत में राजा को मोक्ष मिला। इस प्रकार से इस व्रत का महत्व कई गुना बढ़ गया।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

यह भी पढ़ें:

Pausha Putrada Ekadashi 2025: पौष पुत्रदा एकादशी कब है 30 या 31 दिसंबर? नोट कर लें सही डेट, मुहूर्त और पूजा की सही विधि

Labh Drishti Rajyog 2026: नये साल में शनि-शुक्र बनाएंगे लाभ दृष्टि राजयोग, इन 4 राशियों को होगा जबरदस्त फायदा

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। धर्म से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।