सनातन परंपरा में शंखनाद को बेहद शुभ और पवित्र माना गया है। पूजा पाठ आरती या किसी भी धार्मिक कार्य की शुरुआत अक्सर शंख बजाकर की जाती है। लेकिन लंबे समय से एक सवाल लोगों के मन में बना हुआ है कि क्या महिलाओं को शंख बजाने की अनुमति है या यह केवल पुरुषों के लिए ही उचित माना जाता है। इस विषय पर कई तरह की मान्यताएं और धारणाएं प्रचलित हैं। महिलाओं को शंख बजाना चाहिए या नहीं? आइए जानते हैं इसका असली सच।
शंख का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में शंख को बहुत पवित्र और शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इसके भीतर कई देवी-देवताओं का वास होता है। पूजा आरती या किसी भी धार्मिक कार्य में शंख बजाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मक वातावरण बनता है। यही कारण है कि शंखनाद को ऊर्जा साहस और विजय का प्रतीक भी माना जाता है।
कब और कौन बजा सकता है शंख
धार्मिक मान्यता के अनुसार शंख को सुबह और शाम की पूजा के समय बजाना सबसे शुभ होता है। इसे कोई भी व्यक्ति बजा सकता है जो तन और मन से शुद्ध हो। हालांकि, पूजा में उपयोग होने वाले शंख और अभिषेक के शंख को अलग-अलग रखना चाहिए। बिना कारण शंख बजाना उचित नहीं माना जाता।
क्या शास्त्रों में महिलाओं के शंखनाद करने पर रोक है
अगर शास्त्रों की बात करें तो किसी भी वेद या धार्मिक ग्रंथ में महिलाओं के शंख बजाने पर कोई प्रतिबंध नहीं बताया गया है। न ही ऋग्वेद यजुर्वेद या अथर्ववेद में इसका कोई उल्लेख मिलता है। इसलिए यह कहना कि महिलाओं को शंख नहीं बजाना चाहिए पूरी तरह से शास्त्रीय नियम नहीं, बल्कि एक मान्यता है।
महिलाओं को लेकर प्रचलित मिथक
समाज में लंबे समय से यह धारणा रही है कि महिलाओं के फेफड़े पुरुषों की तुलना में कम मजबूत होते हैं इसलिए वे शंख नहीं बजा पातीं। पुराने समय में महिलाओं की जीवनशैली और कामकाज के कारण यह सोच विकसित हुई और धीरे-धीरे परंपरा बन गई। हालांकि आज भी कई जगहों पर खासकर त्योहारों में महिलाएं खुलकर शंखनाद करती हैं। नवरात्रि के दौरान पश्चिम बंगाल समेत अन्य जगहों पर होने वाली दुर्गा पूजा इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।
ज्योतिष और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह
कुछ ज्योतिषियों और आयुर्वेद विशेषज्ञों का मानना है कि शंख बजाते समय पेट और नाभि के आसपास दबाव पड़ता है। इसी वजह से गर्भवती महिलाओं या शारीरिक रूप से कमजोर महिलाओं को शंख बजाने से बचने की सलाह दी जाती है। जो धार्मिक प्रतिबंध नहीं, बल्कि स्वास्थ्य से जुड़ी सावधानी है।
इतिहास में महिलाओं की भूमिका
इतिहास और धार्मिक कथाओं में भी महिलाओं द्वारा शंख बजाने के उदाहरण मिलते हैं। महाभारत में द्रौपदी के शंखनाद का उल्लेख किया जाता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि महिलाओं को शंख बजाने से कभी रोका नहीं गया था।
क्या महिलाओं के लिए शंख बजाना शुभ है
महिलाओं के शंख बजाने को लेकर कोई धार्मिक मनाही नहीं है। धार्मिक नजरिए से भी महिलाओं के लिए शंख बजाना पूरी तरह शुभ है और इसमें किसी प्रकार का दोष नहीं बताया गया है। यह केवल समाज में बनी एक धारणा है। हां अगर कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या है तो स्वास्थ्य के आधार पर सावधानी जरूरी हो सकती है। कुल मिलाकर महिलाएं भी पुरुषों की तरह शंख बजा सकती हैं यह पूरी तरह उनकी इच्छा और सुविधा पर निर्भर करता है।
शंख रखने के सही नियम
- वास्तु शास्त्र के अनुसार शंख को घर के पूजा स्थान में उत्तर पूर्व दिशा में रखना चाहिए। इसे भगवान विष्णु या लक्ष्मी जी की मूर्ति के पास रखना शुभ माना जाता है।
- शंख को कभी जमीन पर नहीं रखना चाहिए और इसे हमेशा साफ स्थान पर रखें। साथ ही शंख को खाली न रखें उसमें जल फूल या चावल रखना शुभ माना जाता है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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