जिम्बाब्वे दौरे पर धवन से सेलेक्टर्स ने छीन ली थी कप्तानी, गब्बर ने अब उजागर की महीनों से दिल में रखी ये बात

शिखर धवन की जगह जिम्बाब्वे दौरे पर केएल राहुल को अचानक कप्तान चुन लिया गया था।

Deepesh Sharma Written By: Deepesh Sharma
Updated on: November 24, 2022 17:36 IST
Shikhar Dhawan- India TV Hindi
Image Source : SHIKHAR DHAWAN शिखर धवन

IND vs NZ: भारतीय क्रिकेट टीम इस वक्त न्यूजीलैंड दौरे पर है। टी20 सीरीज 1-0 से जीतने के बाद अब बारी वनडे सीरीज की है। कप्तानी शिखर धवन के हाथों में है। वही धवन जिनसे कुछ ही महीने पहले जिम्बाब्वे दौरे पर अचानक कप्तानी छीनकर केएल राहुल के हाथों में दे दी गई थी। धवन जैसे सीनियर खिलाड़ी के लिए ये बर्ताव किसी को ठीक नहीं लगा था। हालांकि गब्बर खुद इस मामले में दुनिया से अलग विचार रखते हैं।

मुझे भगवान पर बहुत भरोसा है- धवन

शिखर धवन को भगवान पर बहुत भरोसा है और यही वजह है कि जब जिम्बाब्वे दौरे के दौरान उनकी जगह केएल राहुल को कप्तानी सौंपी गई तो वह आहत नहीं हुए थे। नियमित कप्तान रोहित शर्मा की अनुपस्थिति में अमूमन वनडे टीम की अगुवाई करने वाले धवन को इस साल अगस्त में जिम्बाब्वे दौरे में होने वाले तीन वनडे मैचों के लिए कप्तान नियुक्त किया गया था लेकिन केएल राहुल के फिट होने के बाद पूर्व राष्ट्रीय चयन समिति ने उनसे कप्तानी छीन ली थी। धवन ने न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले वनडे मैच की पूर्व संध्या पर कहा, ‘‘मैं आहत नहीं हुआ था क्योंकि कुछ चीजें पहले से ही निर्धारित होती हैं और जो कुछ भी होता है वह हमारे भले के लिए होता है।’’ 

फिर से बनाया गया था कप्तान

उन्होंने कहा, ‘‘और अगर आप जिम्बाब्वे दौरे के बाद देखेंगे तो मुझे दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सीरीज के लिए फिर से कप्तान बनाया गया और उसी चयन समिति ने मुझे यह जिम्मेदारी सौंपी। इसलिए जिम्बाब्वे में जो कुछ हुआ उससे मुझे थोड़ा भी दुख नहीं हुआ था। भगवान जो कुछ करता है अच्छे के लिए करता है। मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूं कि करियर के इस पड़ाव में मुझे भारत की कप्तानी करने का मौका मिला है।’’ 

इसलिए छिनी थी कप्तानी

उन्होंने जिंबाब्वे दौरे में राहुल को कप्तानी सौंपने के कारणों पर भी बात की। धवन ने कहा, ‘‘जिम्बाब्वे में राहुल को इसलिए कप्तान बनाया गया क्योंकि वह मुख्य टीम का उपकप्तान है। उसे उस सीरीज के बाद एशिया कप में खेलना था और यदि रोहित चोटिल हो जाता तो राहुल को कप्तानी करनी थी। इसलिए बेहतर यही था कि वह जिम्बाब्वे में कप्तानी करे। इसलिए इस परिप्रेक्ष्य में यह सही फैसला था।’’ 

धवन ने अभी तक 161 वनडे खेले हैं जिनमें उन्होंने 6672 रन बनाए हैं। वह पांच दिसंबर को 37 साल के हो जाएंगे और जानते हैं कि जहां तक उनका सवाल है तो गलती के लिए बहुत कम गुंजाइश है। उन्होंने कहा कि केवल एक फॉर्मेट में खेलने से वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की चुनौतियों के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यह पूरी तरह से व्यक्ति पर निर्भर करता है। मैं इसे भगवान की कृपा मानता हूं कि मैं केवल एक फॉर्मेट में खेल रहा हूं। इससे मुझे अपने अन्य काम पूरे करने में मदद मिलती है। जब मैं तीनों फॉर्मेट में खेलता था उसकी तुलना में मैं अधिक तरोताजा और मजबूत रहता हूं।’’ 

धवन जानते हैं एक बार रोहित और राहुल की वापसी के बाद शीर्ष क्रम में प्रतिस्पर्धा बढ़ जाएगी तथा उनके अलावा शुभमन गिल भी सलामी बल्लेबाज के दावेदार होंगे। उन्होंने कहा, ‘‘अब तीनों फॉर्मेट में कई खिलाड़ी भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और यह अच्छी बात है। एक फॉर्मेट में खेलने की अपनी चुनौतियां है लेकिन मैं खुद को तैयार रखता हूं। ’’ 

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