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देसी सरकारी बाबू के सस्ते 'जुगाड़' से चकरा गए मार्क जुकरबर्ग और उनके इंजीनियर, हुआ भारी नुकसान

 Written By: Harshit Harsh @HarshitKHarsh
 Published : Mar 17, 2025 06:14 pm IST,  Updated : Mar 18, 2025 10:48 am IST

भारत के एक सरकारी बाबू के जुगाड़ ने कैसे मार्क जुकरबर्क और उनकी टीम में शामिल इंजीनियरों की फौज को फेल कर दिया था? इस बात का विस्फोटक खुलासा कंपनी के एक Ex कर्मचारी ने अपनी किताब में किया है।

Mark Zuckerberg Meta- India TV Hindi
मार्क जुकरबर्ग Image Source : FILE

भारत के लोग 'जुगाड़' के सामने दुनिया के बड़े-बडे़ इंजीनियर फेल हो जाते हैं। ये हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि 2016 में  फेसबुक (अब Meta) के सीईओ मार्क जुकरबर्ग और उनके प्रतिभाशाली इंजीनियर की टीम के बारे में किए गए एक खुलासे में सामने आया है। फेसबुक के एक पूर्व अधिकारी साराह विन-विलियम्स ने हाल में जारी किए गए अपने एक संस्मरण इस बात का जिक्र किया है।

किताब में विस्फोटक खुलासा

अपनी संस्मरण किताब 'केयरलेस पीपल' में साराह ने बताया कि कैसे साधारण पद पर काम करने वाले एक भारतीय सरकारी बाबू ने एक जुगाड़ से फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग और उनकी टीम के हाईली पेड इंजीनियर्स को आसानी से धोखा दे दिया। इसकी वजह से फेसबुक को भारत में नियामक की जांच का सामना करना पड़ रहा है। मेटा ने साराह की इस संस्मरण को प्रकाशित होने से रोकने की कई बार कोशिश की है।

मार्क जुकरबर्ग और उनकी टीम ने कथित तौर पर 2016 में भारत में अपने विवादास्पद फ्री बेसिक्स कार्यक्रम को बचाने के लिए आक्रामक प्रयास किए थे। इसके लिए कंपनी ने एक व्यापक ईमेल कैंपेन भी चलाया था, लेकिन एक सरकारी बाबू के क्लिक की वजह से फेसबुक का यह अभियान उल्टा पड़ गया।

नेट न्यूट्रिलिटी 

इस संस्मरण में दावा किया गया है कि जब भारत के टेलीकॉम रेगुलेटर यानी TRAI ने इस पर पब्लिक कंस्लेटशन ओपन किया और पूछा कि क्या ऐसे कार्यक्रमों पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए? इस पर फेसबुक ने नेट न्यूट्रिलिटी और फ्री बेसिक्स के बारे में जनता की राय प्रभावित करने के लिए राजनीतिक प्रभाव के साथ-साथ अपने इंजीनियर्स की पूरी फौज खड़ी कर दी। इसमें दावा किया गया है कि फेसबुक ने इसके लिए कथित तौर पर एक प्रेशर कैंपेन की प्लानिंग की थी।

वेन-विलियम्स ने फेसबुक के तत्कालीन सीओओ शेरिल सैंडबर्ग का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने हमें एक इंटरनल ई-मेल भेजा था जिसमें लिखा था, "हम भाग्यशाली हैं कि यह उस जगह पर हो रहा है जहां हमारी बहुत गहराई है, सरकार में वरिष्ठ रिश्ते भी हैं लेकिन यह अभी भी कठिन होने वाला है।" हमारी पॉलिसी टीम सीधे सरकार के साथ जुड़ी है, जिसमें पीएम मोदी का भी ऑफिस शामिल है।

जुगाड़ के सामने सब हुए फेल

वेन-विलियम्स की किताब के मुताबिक, फेसबुक की स्ट्रेटेजी पब्लिक ऑटोमैटेड ई-मेल के जरिए पब्लिक सपोर्ट को दर्शाने की थी। एक साधारण सरकारी बाबू की 'जुगाड़' ने भारतीय यूजर्स द्वारा TRAI को भेजे गए फेसबुक के समर्थन वाले 16 मिलियन यानी 1.6 करोड़ ई-मेल को शामिल नहीं किया जा सका। इसकी वजह से ऑटोमैटेड ई-मेल द्वारा भेजे गए समर्थन वाले ई-मेल को बाहर कर दिया गया। इस पुस्तक में इसके अलावा मेटा के बारे में कई और खुलासे किए गए हैं।

हालांकि, Meta ने इस किताब को "पुरानी और पहले से रिपोर्ट की गई" कहकर खारिज कर दिया है। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि 8 साल पहले साराह वेन-विलियम्स को खराब प्रदर्शन की वजह से कंपनी से निकाल दिया गया था। हालांकि, नेट न्यूट्रैलिटी सिद्धांतों का उल्लंघन करने के कारण फेसबुक के फ्री बेसिक्स को अंततः भारत में प्रतिबंधित कर दिया गया, जो जुकरबर्ग की वैश्विक विस्तार महत्वाकांक्षाओं के लिए एक दुर्लभ हार कहा जा सकता है।

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