सरकारी सूत्रों ने बताया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने की उम्मीद नहीं है क्योंकि हमारे पास काफी स्टॉक है।
अली परवेज मलिक ने बताया कि सोमवार को तीन पेट्रोलियम शिपमेंट आने की उम्मीद है, लेकिन चेतावनी दी कि LNG सप्लाई में रुकावट चिंता का विषय बनी हुई है।
सोमवार को बीएसई सेंसेक्स 1352.74 अंकों (1.71 प्रतिशत) की गिरावट के साथ 77,566.16 अंकों पर बंद हुआ।
जानकारों का मानना है कि अगर संघर्ष में आगे और तेजी आती है और यह खत्म नहीं होता है तो कच्चे तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक भी जा सकता है।
ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 9 प्रतिशत बढ़कर 80 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई है और एलएनजी की कीमतें भी लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं।
दिमित्री पेसकोव से भारत की मीडिया रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया मांगी गई थी, जिनमें कहा गया था कि रूस एक हफ्ते में भारत को 2.2 करोड़ बैरल कच्चे तेल की आपूर्ति करने में सक्षम है।
क्या तेल विश्वयुद्ध कराएगा, क्या तेल के लिए दुनिया में महायुद्ध होने वाला है. लेकिन तेल पर सियासत भी छिड़ी है उसपर आपको पहले जानकारी दे दें. सरकार के सूत्रों के मुताबिक भारत Strait of Hormuz पर डिपेंडेंट नहीं है क्योंकि भारत को दुनिया के अलग अलग हिस्सों से ऊर्जा की सप्लाई होती है.
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ रही है। कई देशों को डर है कि अगर इस रास्ते से तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई तो वैश्विक बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिल सकती है।
भारत का सिर्फ़ 40 परसेंट क्रूड होर्मुज स्ट्रेट से होकर जाता है, और बाकी 60 परसेंट क्रूड दूसरे सोर्स से आता है। भारत पिछले कॉन्ट्रैक्ट के हिसाब से रूस से क्रूड इंपोर्ट करना जारी रखे हुए है। LPG और LNG सप्लाई के मामले में भारत अच्छी स्थिति में है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव (खासकर ईरान से जुड़े संघर्ष) के कारण वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता और आपूर्ति की चिंताएं गहरा गई हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले हफ्तों में रूस और चीन की संभावित भूमिका पर भी वैश्विक बाजार की नजर रहेगी, क्योंकि चीन के आयातित कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज के जरिए ही दुनिया भर में पहुंचता है।
युद्ध के कारण इस हफ्ते कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है। मंगलवार को कच्चे तेल की कीमतें पिछले एक साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं।
भारत के लिए स्थिति अभी पूरी तरह से कंट्रोल में हैं। सरकारी सूत्रों ने बताया कि भारत के पास 25 दिनों का क्रूड ऑयल और रिफाइंड ऑयल का स्टॉक उपलब्ध है।
बीएमआई ने अपनी 'इंडिया आउटलुक' रिपोर्ट में कहा कि अगर ईरान संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है तो इससे भारत के जीडीपी पर लगभग 0.3 से 0.6 प्रतिशत अंक तक का नकारात्मक असर पड़ सकता है।
भारत अपनी कुल ऊर्जा जरूरत का लगभग 88% हिस्सा आयात करता है। जानकार मानते हैं कि अगर होर्मुज रूट बंद होता है, तो भारत वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भर हो सकता है।
अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में $10 प्रति बैरल की बढ़ोतरी से भारत का इम्पोर्ट बिल सालाना लगभग ₹10,000- ₹15,000 करोड़ बढ़ सकता है।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की तेजी से बढ़ती कीमतों के बीच दुनिया के लिए एक राहत की खबर आई है। रविवार को हुई एक अहम बैठक में तेल उत्पादक देशों के समूह OPEC+ ने बड़ा फैसला लिया।
ईरान की सरकारी मीडिया ने 28 फरवरी को कहा था कि अमेरिका और इजरायल के मिसाइल हमलों के जवाब में उसने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है।
भारत अपनी जरूरत के 90 प्रतिशत कच्चे तेल को दूसरे देशों से आयात करता है और इनमें से करीब आधा तेल खाड़ी देशों से ही आता है।
ईरान पर हुए इस हमले की वजह से भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ सकता है और निवेशक बड़े पैमाने पर बिकवाली कर सकते हैं।
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