FATF PAKISTAN: टेरर फंडिंग पर नजर रखने वाले अंतरराष्ट्रीय संगठन फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने गुपचुप तरीके से पाकिस्तान का दौरा खत्म कर ली। FATF की 15 सदस्यीय टीम पाकिस्तान का पूरा भ्रमण कर लिया है।
FATF (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स) ने शुक्रवार को बताया कि उसने पाकिस्तान को अपनी आतंकी फंडिंग 'ग्रे लिस्ट' पर बरकरार रखा है। FATF ने बर्लिन में हुई समीक्षा बैठक के बाद पाकिस्तान को फिलहाल ग्रे-लिस्ट में बनाए रखने का फैसला किया है।
फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की ग्रे लिस्ट से पाकिस्तान के बाहर आने की पूरी संभावना है। पाकिस्तान को भी पूरा भरोसा है कि फैसला उसके पक्ष में ही आएगा। सूत्रों के मुताबिक चीन, तुर्की और मलेशिया जैसे देश पर्दे के पीछे से पाकिस्तान की मदद कर रहे हैं। यदि आज पाकिस्तान इस लिस्ट से बाहर आ जाता है तो उसके लिए विदेशी मदद के रास्ते खुल जाएंगे।
Pakistan FATF News: पाकिस्तान को उसके ‘करीबी दोस्तों’ ने भरोसा दिया है कि वे ग्रे लिस्ट से निकलने में उसकी मदद करेंगे।
पाकिस्तान जून 2018 से एफएटीएफ की 'ग्रे लिस्ट' में है, जो मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने में विफल रहा है, जिसके कारण आतंकी वित्तपोषण हुआ है। इसे अक्टूबर 2019 तक पूरा करने की कार्य योजना दी गई थी। लेकिन देश आतंकी संगठनों और उनके प्रायोजकों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई करने में विफल रहा।
ऊर्जा मंत्री हम्माद अजहर ने ट्वीट कर कहा कि पाकिस्तान ने एक अभूतपूर्व समयसीमा में धनशोधन संबंधी कार्ययोजना को संबोधित किया है।
प्लेयर ने कहा कि पाकिस्तान की कार्रवाई योजना को लेकर एफएटीएफ चाहता है कि पाकिस्तान की तरफ से आतंक वित्त पोषण के खिलाफ की जाने वाली जांच प्रदर्शित हो और संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकी नेताओं और उनके सहयोगियों के खिलाफ कर्रवाई की जाए।
पाकिस्तान अप्रैल 2022 में होने वाली बैठक तक ग्रे लिस्ट में ही बना रहेगा क्योंकि वह आतंकी फंडिंग को रोकने में विफल रहा है। एफएटीएफ की यह बैठक डॉ. मार्कस प्लेयर की जर्मन प्रेसीडेंसी के तहत हुई।
2020-21 में भारत में मॉरिशस के जरिये आया प्रत्यक्ष विदेशी निवेश कुल निवेश का 9 प्रतिशत रहा है। हालांकि साल 2018-19 में ये हिस्सा 32 प्रतिशत था। बीते 2 साल से इसमें गिरावट है।
कुरैशी की यह टिप्पणी फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की 21-25 जून को हुई पूर्ण बैठक के एक दिन बाद आई है, जिसमें मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने में विफल रहने के कारण पाकिस्तान को अपनी 'ग्रे लिस्ट' में रखा गया था, जिससे आतंकी वित्तपोषण हुआ था।
पाकिस्तान को शुक्रवार को बड़ा झटका लगा है। FATF की बैठक में फैसला किया गया है कि पाकिस्तान अभी ग्रे लिस्ट में रहेगा। पाक को लेकर कहा गया है कि उसे FATF की 17 अक्टूबर से 22 अक्टूबर के बीच होने वाली अगली बैठक से पहले एक्शन प्लान में बताए सभी पॉइंट्स को पूरा करने के लिए काम करना पड़ेगा।
पाकिस्तान फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की ग्रे लिस्ट में रहेगा या फिर इससे बाहर होगा इस बात पर फैसला जल्द ही हो जाएगा।
पाकिस्तान मनी लांड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण पर रोक के ठोस प्रबंध करने के मामले में अपनी कमियों के कारण एशिया प्रशांत समूह (एपीजी) की ‘उच्च निगरानी व्यवस्था’ में बना हुआ है।
फाइनेंशिल ऐक्शन टॉस्क फोर्स ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में ही रखे जाने पर फिर से मुहर लगा दी है। फ्रांस की राजधानी पेरिस में गुरुवार को हुई वर्चुअल मीटिंग में इसका फैसला हुआ।
पाकिस्तान संगठन की पूर्ण बैठक से पहले सदस्य देशों से समर्थन जुटाने के प्रयासों में जुटा हुआ था, लेकिन उसका कोई फायदा नहीं हुआ।
पाकिस्तान 3 साल से वॉच लिस्ट यानि ग्रे लिस्ट में बना हुआ है। वॉच लिस्ट में आने वाले देशों को FATF कुछ शर्तों के साथ निगरानी में रखता है। FATF ने पाकिस्तान के लिए 27 शर्तें जारी की थीं। इसमें से 21 शर्तें ही पूरी की गई हैं।
पाकिस्तान ने आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटने के लिए वैश्विक निगरानी दल फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की ब्लैक लिस्ट से बचने और ग्रे लिस्ट से बाहर निकलने के लिए आक्रामक कूटनीतिक प्रयास शुरू कर दिए हैं।
आर्थिक और राजनीतिक मोर्चे पर दिक्कतों का सामना कर रहे पाकिस्तान के लिए आने वाले वक्त में वैश्विक स्तर पर भी मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं।
पाकिस्तान फरवरी 2021 तक वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF) की ‘ग्रे’ लिस्ट में बना रहेगा क्योंकि वह ग्लोबल मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद की फंडिंग को रोकने के लिए 6 कार्ययोजनाओं को पूरा करने में विफल रहा है।
अगर पाकिस्तान ग्रे सूची में बना रहता है तो उसके लिए विश्व मुद्रा कोष (आईएमएफ), विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक और यूरोपीय संघ जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से वित्तीय मदद हासिल करना और मुश्किल हो जाएगा।
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