डब्ल्यूपीआई में राहत के बावजूद, खुदरा महंगाई (सीपीआई) नवंबर में मामूली बढ़कर 0.71 प्रतिशत हो गई (अक्टूबर में 0.25%)। विनिर्मित उत्पादों में भी महंगाई घटकर 1.33% रह गई।
विदेशी फंडों की लगातार निकासी और रुपये में तेज गिरावट ने निवेशकों के भरोसे पर भारी दबाव डाला है।
जीएसटी कटौती और अनुकूल आधार के चलते अक्टूबर में थोक मुद्रास्फीति में गिरावट देखने को मिली है।
जानकार के मुताबिक, अक्टूबर में डब्ल्यूपीआई फिर से अपस्फीति की ओर बढ़ सकता है, और अक्टूबर 2025 में यह 0.5% तक पहुंच सकता है।
अगस्त महीने के दौरान सब्जियों, मांस, मछली और अंडों जैसी रसोई से जुड़ी चीजों की कीमतें बढ़ी हैं। केंद्रीय बैंक यानी भारतीय रिजर्व बैंक महंगाई को अभी भी अपने नियंत्रण में मान रहा है।
WPI Inflation: सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, खाद्य वस्तुओं, खनिज तेल, कच्चा पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, और मूल धातुओं के निर्माण में आई कीमतों में गिरावट से मंहगाई में राहत मिली है।
थोक महंगाई के आंकड़ों के मुताबिक, मई में खाद्य पदार्थों में 1. 56 प्रतिशत की अपस्फीति देखी गई, जबकि अप्रैल में 0. 86 प्रतिशत की अपस्फीति थी। इस दौरान सब्जियों की कीमतों में तेज गिरावट देखी गई।
मुद्रास्फीति में कमी आने से रिजर्व बैंक के लिए जून की मौद्रिक नीति समीक्षा में दरों में कटौती के एक और दौर को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त गुंजाइश बनेगी।
थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति फरवरी 2025 में 2.38 प्रतिशत दर्ज की गई थी। आने वाले महीनों में भी महंगाई के तेवर नरम रहने की उम्मीद है।
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत की थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर मार्च में घटकर 2.05 प्रतिशत रह गई, जो फरवरी में 2.38 प्रतिशत थी।
फरवरी, 2025 में मुद्रास्फीति की सकारात्मक दर मुख्य रूप से खाद्य उत्पादों, खाद्य वस्तुओं, अन्य विनिर्माण, गैर-खाद्य वस्तुओं और वस्त्र निर्माण आदि के मूल्यों में वृद्धि के कारण है।
जनवरी 2025 में थोक महंगाई में गिरावट दर्ज की गई है। पिछले महीने थोक महंगाई दर घटकर 2.31 प्रतिशत रही। बताते चलें कि इससे पिछले महीने यानी दिसंबर 2024 में थोक महंगाई दर 2.37 प्रतिशत दर्ज की गई थी। शुक्रवार को जारी किए गए सरकारी आंकड़ों से ये जानकारी मिली है।
सब्जियों की मुद्रास्फीति नवंबर में 28. 57 प्रतिशत के मुकाबले 28. 65 प्रतिशत रही। आलू की मुद्रास्फीति 93. 20 प्रतिशत पर उच्च स्तर पर बनी रही, और प्याज की दिसंबर में यह बढ़कर 16. 81 प्रतिशत हो गई।
सब्जियों की महंगाई गिरावट के साथ 28.57 प्रतिशत रही, जबकि अक्टूबर में यह 63.04 प्रतिशत थी। हालांकि, आलू की महंगाई 82.79 प्रतिशत के उच्च स्तर पर बनी रही, जबकि प्याज की महंगाई नवंबर में तीव्र गिरावट के साथ 2.85 प्रतिशत पर आ गई।
अक्टूबर में आलू और प्याज की मुद्रास्फीति क्रमशः 78.73 प्रतिशत और 39.25 प्रतिशत पर उच्च स्तर पर रही। सब्जियों की मुद्रास्फीति 63.04 प्रतिशत रही, जबकि सितंबर में यह 48.73 प्रतिशत थी।
सितंबर में आलू और प्याज की मुद्रास्फीति सितंबर में क्रमशः 78.13 प्रतिशत और 78.82 प्रतिशत पर उच्च स्तर पर बनी रही।
पिछले सप्ताह जारी आंकड़ों से पता चला है कि सब्जियों की ऊंची कीमतों के कारण अगस्त में खुदरा मुद्रास्फीति 3. 65 प्रतिशत थी। यह जुलाई में 3. 60 प्रतिशत से अधिक थी।
जुलाई में होलसेल प्राइस इंडेक्स में दर्ज की गई गिरावट इस महीने के खुदरा मुद्रास्फीति के आंकड़ों के अनुरूप रही। इस हफ्ते की शुरुआत में जारी आंकड़ों के अनुसार जुलाई में खुदरा मुद्रास्फीति 5 साल के निचले स्तर 3.54 प्रतिशत पर आ गई।
आंकड़ों के अनुसार, सब्जियों की महंगाई दर जून में 38.76 प्रतिशत रही, जो मई में 32.42 प्रतिशत थी। दालों की महंगाई दर जून में 21.64 प्रतिशत रही।
मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों, खाद्य उत्पादों के निर्माण, कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, खनिज तेल, अन्य विनिर्माण आदि की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति पिछले महीने 1.26 प्रतिशत थी।
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