संभल: यूपी के संभल जिले में 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा को लेकर जांच के लिए मंगलवार को न्यायिक जांच आयोग की तीन सदस्य टीम संभल पहुंची। सबसे पहले टीम ने शाही जामा मस्जिद के अंदर निरीक्षण किया। इसके बाद टीम दंगा प्रभावित इलाके में पहुंची। जहां उन्होंने दंगे से जुड़े साक्ष जुटाए। इसके बाद न्यायिक जांच आयोग की टीम संभल के सर्किट हाउस पहुंची जहां उन्होंने 24 नवंबर को हिंसा को लेकर बयान दर्ज करने के लिए एक कैंप आयोजन किया।
10 से ज्यादा लोगों ने दर्ज कराए बयान
इसमें करीब एक दर्जन लोगों के बयान दर्ज हुए। बयान दर्ज करने वालों में 1978 में हुए दंगा पीड़ित भी पहुंचे। इसमें एक शख्स ने बताया कि 1978 के दिन खौफनाक मंजर था। चारों तरफ अघोषित कर्फ्यू था ।मेरे पिताजी बाजार से लौट रहे थे। तभी उनको एक बाजार की दुकान में खींच लिया गया और उनको मार दिया गया। उन्होंने बताया कि आज अगर यहां हम जिंदा है तो पुलिस प्रशासन की वजह से वरना हमारा हाल उसी दिन की तरह किया जाता।
..तो होती 1978 वाली स्थिति
वहीं और लोगों ने बताया कि 24 नवंबर को हुई हिंसा में अगर पुलिस प्रशासन अपने ऊपर गोली और पथराव नहीं खाता तो संभल में एक बार फिर 1978 वाली स्थिति होती और 1978 पार्ट 2 संभल में देखने को मिलता। संभल में लोगों ने अस्थाई मुख्यालय को लेकर भी मांग की है कि संभल में ही मुख्यालय बनाया जाए ताकि सारे अधिकारी और सुरक्षा व्यवस्था संभल में रहे ताकि इस तरह का माहौल बिगड़ने पर हिंदुओं की रक्षा हो सके।
प्रतिनिधिमंडल के साथ जिला मजिस्ट्रेट राजेंद्र पेंसिया, पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई और मुरादाबाद पुलिस रेंज के डीआइजी मुनिराज जी भी थे। न्यायिक आयोग में हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश देवेंद्र अरोड़ा, पूर्व डीजीपी अरविंद कुमार जैन और उत्तर प्रदेश के पूर्व प्रधान सचिव अमित मोहन प्रसाद शामिल हैं।
पांच लोगों की हुई थी मौत
बता दें कि संभल की जामा मस्जिद में हरिहर मंदिर में दावा करते हुए एक याचिका कोर्ट में डाली गई थी। कोर्ट के आदेश पर 19 और 24 नवंबर 2024 को जामा मस्जिद का सर्वे किया गया था। 24 नवंबर को भीड़ उग्र हो गई और पथराव किया था। हिंसा में पांच लोगों की मौत हो गई थी।
रिपोर्ट- रोहित व्यास, संभल
संपादक की पसंद