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Basoda 2026: बसोड़ा कब है 11 या 12 मार्च? इस दिन बसी भोजन का लगाया जाता है भोग, जानिए तारीख, शुभ मुहूर्त और विधि

 Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
 Published : Mar 07, 2026 02:12 pm IST,  Updated : Mar 07, 2026 02:12 pm IST

Basoda 2026: बसोड़ा पर्व माता शीतला को समर्पित है। इस दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता है। माता को भी बासी खाने का भोग लगाया जाता है। चलिए जानते हैं साल 2026 में बसोड़ा किस दिन मनाया जाएगा। साथ ही जानिए बसोड़ा 2026 शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।

Basoda 2026 kab बसोड़ा 2026 कब है - India TV Hindi
बसोड़ा 2026 कब है Image Source : INDIA TV

Basoda 2026 Kab hai, Basoda Date And Shubh Muhurat: सनातन धर्म में चैत्र महीने से हिंदू नववर्ष की शुरुआत होती है। इस महीने में कई महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार आते हैं। इनमें से एक है शीतला अष्टमी का व्रत। देश के कुछ स्थानों पर से बसोड़ा या बसौड़ा के नाम से भी जानते हैं। चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि माता शीतला को समर्पित है। इस पर्व से जुड़ी एक खास परंपरा यह है कि इस दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता है। तो आइए जानते हैं कि इस बार कब मनाया जाएगा बसोड़ा और इस दिन बासी खाना क्यों खाया जाता है।  

बसोड़ा 2026 कब है? (Basoda 2026 Kab Hai)

बसोड़ा चैत्र माह की कृष्ण पक्ष अष्टमी को मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि की शुरुआत 11 मार्च की देर रात 1 बजकर 54 मिनट पर होगी। इसका समापन 12 मार्च की सुबह 4 बजकर 19 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार 11 मार्च को यह पर्व मनाया जाएगा। बसोड़ा पर शीतला माता की पूजा होती है। इस दिन व्रत रखकर देवी शीतला का पूजन किया जाता है, ताकि उनसे परिवार की सेहतमंद आयु और बीमारियों से रक्षा की प्राप्ति का आशीर्वाद प्राप्त किया जा सके।  

बसोड़ा 2026 शुभ मुहूर्त (Basoda 2026 Shubh Muhurat)

पंचांग के अनुसार, बसोड़ा की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त 11 मार्च को सुबह 6 बजकर 35 मिनट से लेकर शाम को 6 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। बसोड़ा पूजन और शीतला अष्टमी के लिए यह समय शुभ रहेगा। 

बसोड़ा के दिन घर में चूल्हा क्यों नहीं जलाया जाता

बसोड़ा के दिन घर का चूल्हा नहीं जलता। एक दिन पहले यानी कि शीतला सप्तमी पर ही भोजन तैयार कर लिया जाता है। अष्टमी के दिन शीतला माता को बासी भोजन का भोग लगाया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि माता शीतला को ठंडा भोजन अत्यंत ​प्रिय है। माता शीतला को जिन चीजों का भोग अर्पित किया जाता है पूरा परिवार वही भोजन ग्रहण करता है। मान्यता है कि इस दिन घर का चूल्हा जलाने से देवी शीतला रुष्ट हो सकती हैं।

वैज्ञानिक कारणों से देखा जाए तो यह परंपरा और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। दरअसल, बसोड़ा पर्व उस समय आता है जब मौसम करवट ले रहा होता है। सर्दियां पूरी तरह से खत्म हो रही होती है और गर्मी का मौसम दस्तक दे रहा होता है। इस समय में चेचक, खसरा या अन्य संक्रामक त्वचा रोगों के होने की आशंका बढ़ जाती है। वहीं, बदलते मौसम का प्रभाव हमारी पाचन शक्ति पर भी पड़ता है। सर्दी में गरमा गरम भोजन को शरीर आसानी से पचा लेता है, लेकिन गर्मी में पाचन शक्ति वैसी नहीं रहती है। ऐसे में इस समय ठंडा-संतुलित भोजन करने की सलाह दी जाती है। 

बसोड़ा की पूजा विधि (Basoda Ki Puja Vidhi)

  • बसोड़ा पूजन के लिए एक दिन पहले ही भोजन बना लें। मीठे चावल, हलवा, पूरी, सब्जी सभी चीजों को बनाकर रख लें।
  • शीतला अष्टमी के दिन सुबह उठकर स्नान आदि करें।
  • पूजा की थाली में दीपक, रोली, हल्दी, अक्षत आदि सामग्री को रखें।
  • शीतला माता की प्रतिमा स्थापित कर पूजा करें और सभी चीजों को अर्पित करें।
  • देवी को जल अर्पित करें और थोड़ा जल बचाकर घर में छिड़क दें, इससे घर-परिवार में खुशहाली आती है। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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