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Video: लाख आफत आई पर जज्बा नहीं हिला, जांबाज सैनिकों की परेड का वीडियो वायरल

 Edited By: Shakti Singh
 Published : Jan 23, 2026 11:18 pm IST,  Updated : Jan 23, 2026 11:19 pm IST

वीडियो में देखा जा सकता है कि बारिश के साथ तेज हवाएं भी चल रही हैं, लेकिन परेड में शामिल सभी पुरुष और महिला सिपाही पूरे जज्बे के साथ कदम ताल कर रहे हैं। सोशल मीडिया इस वीडियो को जमकर प्यार मिल रहा है।

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बारिश के बीच परेड करते जवान Image Source : X/PIB

दिल्ली में शुक्रवार (23 जनवरी) के दिन मौसम ने करवट बदली और बारिश के कारण ठंड ने जोरदार वापसी की। बारिश की वजह से आम जनजीवन प्रभावित हुआ, लेकिन लोग मौसम का मजा लेते हुए भी नजर आए। हालांकि, गणतंत्र दिवस परेड में शामिल जवानों के लिए यह दिन बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। दिल्ली एनसीआर में शुक्रवार के दिन बारिश के साथ तेज हवाएं भी चल रही थीं। जोरदार ठंड के बीच घर से बाहर निकलना मुश्किल था। ऐसे में समय में परेड में शामिल जवान अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देते नजर आए।

सोशल मीडिया पर 23 जनवरी की रिहर्षल का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में परेड में शामिल सभी जवान बारिश और खराब मौसम के बीच परेड करते नजर आए और सभी ने दिल खोलकर उनकी तारीफ की।

दिल्ली एनसीआर में बढ़ी ठंड

दिल्ली एनसीआर समेत देश के अधिकतर राज्यों में पिछले कुछ दिनों से ठंड का असर कम हुआ था। हालांकि, शुक्रवार के दिन पहाड़ी राज्यों में जमकर बर्फबारी हुई और दिल्ली एनसीआर समेत उत्तर भारतीय राज्यों में बारिश हुई। मौसम ने अचानक करवत बदली और तेज हवाएं भी चलने लगीं। इसके साथ ही पारा तेजी से गिरा। बारिश के कारण दिल्ली की हवा साफ हुई और पूरी उत्तर भारत में ठंड बढ़ गई। हालांकि, दिल्ली में शुक्रवार की दोपहर हल्की बारिश हो रही थी। इसी के साथ तेज हवाएं भी चल रही थीं। ऐसे में मौसम में जवानों ने परेड की और सभी ने दिल खोलकर उनके जज्बे और समर्पण को सराहा।

उत्तर प्रदेश की झांकी में दिखेगी विरासत और विकास की तस्वीर

उत्तर प्रदेश की झांकी के अग्रभाग में कालिंजर दुर्ग की प्रसिद्ध शैल-कला कृतियों में से एक एकमुख लिंग को स्थापित किया गया है, जो बुंदेलखंड की प्राचीन आध्यात्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है। यह क्षेत्र की धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक पहचान को दर्शाता है। झांकी के मध्य भाग में बुंदेलखंड की जीवंत हस्तशिल्प परंपराओं, मृद्भांड कला, मनका शिल्प और स्थानीय व्यापार को दर्शाया गया है। ये सभी ‘एक जनपद एक उत्पाद’ योजना के अंतर्गत आते हैं। झांकी के पिछले भाग में कालिंजर दुर्ग के नक्काशीदार स्तंभों और भव्य द्वारों को दर्शाया गया है जहां पर्यटक इसके ऐतिहासिक गलियारों का अनुभव करेंगे। साथ ही, नीलकंठ महादेव मंदिर का भव्य स्वरूप कालिंजर की आध्यात्मिक और स्थापत्य विरासत को सुदृढ़ करता है। झांकी का अंतिम भाग किले की स्थापत्य शैली से प्रेरित आधुनिक संरचना के रूप में तैयार किया गया है जिसमें ब्रह्मोस मिसाइल, एक्सप्रेसवे नेटवर्क, औद्योगिक प्रगति, आधारभूत ढांचा और नवयुगीन निर्माण की झलक दिखाई देगी।

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