Amazing Facts : अंडा उन फूड आइटम्स में शामिल है जिसे कोई भी ब्रेकफास्ट, लंच या डिनर में खा सकता है। हालांकि, ज्यादातर लोग उबले अंडे ब्रेकफास्ट में खाना पसंद करते हैं। कहने को तो अंडे से और कोई भी चीजें बनाई जा सकती हैं मगर उबले अंडे रेडी टू ईट कैटेगरी में आ जाते हैं जिसकी वजह से इनको झटपट छीलकर खाया भी जा सकता है। यदि आप भी उबले अंडे खाने के शौकीन हैं तो क्या आपको ये पता है कि, उबला अंडा छीलने से पहले पटकते क्यों हैं ? अगर आपको इसकी वजह नहीं मालूम है तो आज हम आपको इसके बारे में बताने वाले हैं।
अंडा वेज है या नॉनवेज
कई रिपोर्ट्स में दावा किया जाता है कि, अंडे शाकाहारी बिल्कुल भी नहीं होते हैं। चूंकि ये किराने व परचून की शॉप पर मिलने वाले अंडे फर्टिलाइज नहीं होते ऐसे में अंडों के अंदर वाला चूजा विकसित नहीं पाते। यही वजह है कि, कुछ लोग उन्हें शाकाहारी या पशु उपोत्पाद मानते हैं। कई लोग ऐसा भी मानते हैं कि, दूध की तरह अंडे को भी पशु मांस नहीं बल्कि पशु उपोत्पाद माना जा सकता है।
उबले अंडे छीलने से पहले पटकते क्यों हैं
दरअसल, उबले अंडे को छीलने से पहले पटकने के पीछे 2 वजह मानी जाती हैं। दोनों के बारे में इस प्रकार से समझा जा सकता है:
- अंडा अंदर की झिल्ली से चिपके नहीं : ब्वॉइल्ड एग को छीलने से यदि हल्के हाथ से पटका जाए तो अंडा आसानी से और साफ उतरता है। पटकने या अंडे को हाथ में रगड़ने से वे अंदर की सफेद झिल्ली से चिपकते नहीं हैं।
- अंडे को छीलने के लिए सिरा मिले : कई बार उबले अंडे छीलने से पहले उनका सिरा ढूंढ़ने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है। ऐसे में अंडे को हल्के हाथ से पटकने पर उसमें छोटी—छोटी दरारें बन जाती हैं जिसके बाद उसे छीलना आसान हो जाता है। इसके अलावा अंडे के चौड़े सिरे पर एक छोटी हवा की थैली होती है। वहां हल्का सा क्रैक करने से हवा बाहर निकल जाती है और छिलका उतरना आसान हो जाता है।

गौरतलब है कि, यह वे दो वजह हैं जिनकी वजह से उबले अंडे छीलने से पहले उनको पटका जाता है या उन पर चम्मच से मारा जाता है। बता दें कि, बहुत ताजे अंडों की तुलना में थोड़े पुराने अंडे छीलने में ज्यादा आसान होते हैं, क्योंकि समय के साथ अंदर की झिल्ली ढीली हो जाती है। बेहतर परिणाम के लिए लोग उबले हुए अंडों को ठंडा पानी या बर्फ वाले पानी में 5-10 मिनट तक रख देते हैं।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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