कोलकाता: पश्चिम बंगाल में अंडे अब सियासत का मुद्दा बन गए हैं। सवाल ये उठाया जा रहा है कि मिड डे मील में स्कूली बच्चों को अंडे मिलेंगे या नहीं। असल में शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने बंगाल में मिड-डे मील का कॉन्ट्रैक्ट ISKCON को देने का फैसला किया है।
Related Stories
दरअसल ISKCON की किचेन में तो लहसुन प्याज का भी इस्तेमाल नहीं होता इसीलिए विरोधी दलों ने सरकार से पूछा है कि क्या अब बच्चों को मिड मील में उबला हुआ अंडा नहीं मिलेगा।
तृणमूल कांग्रेस के नेता कुणाल घोष का सामने आया बयान
तृणमूल कांग्रेस के नेता कुणाल घोष ने कहा कि उन्हें ISKCON से दिक्कत नहीं है। उन्हें बच्चों की सेहत की चिंता है। अगर मिड डे मील में अंडे नहीं मिलेंगे तो बच्चों को न्यूट्रीशन कैसे मिलेगा।
ISKCON की तरफ से भी सामने आया बयान
ISKCON की तरफ से भी बयान सामने आया। ISKCON के प्रवक्ता राधारमण दास ने कहा कि प्रोटीन का सोर्स सिर्फ अंडा नहीं है। दालों, पनीर में भी प्रोटीन होती है। इस्कॉन इसी तरह की चीजें मिड डे मील में बच्चों को देता है, इसलिए विरोध करने वाले बच्चों के पोषण की चिन्ता न करें।
इंडियन सेकुलर फ्रंट के नौशाद सिद्दीकी ने भी उठाए सवाल
इंडियन सेकुलर फ्रंट के नौशाद सिद्दीकी ने कहा कि पनीर महंगा है। बच्चों को पनीर का एक टुकड़ा देने से काम नहीं चलेगा। नौशाद सिद्दीकी ने कहा कि मुसलमान तो आम तौर पर नॉनवेज ही खाते हैं। ज्यादातर गरीब इसीलिए अपने बच्चों को स्कूल भेजते हैं क्योंकि मिड डे मील में अंडा मिलता है। ये फैसला गरीबों के लिए ठीक नहीं है।
अंडों को लेकर पहले भी होती रही है डिबेट
अंडों को लेकर डिबेट पहले भी होती रही है। अंडे खाने वाले उसमें प्रोटीन होने की बात कहते हैं और अंडे नहीं खाने वाले प्रोटीन के लिए अन्य वेज सोर्स का हवाला देते हैं। हालांकि ये बात तो डॉक्टर्स भी मानते हैं कि अंडों में प्रोटीन होता है। कॉस्ट भी कम होती है पर अगर ISKCON खाना बनाएगा तो उसमें तो अंडे हो नहीं सकते। अब ISKCON को ये साबित करना है कि वो बिना अंडे के भी बच्चों को अच्छी डाइट दे सकते हैं।
ये भी पढ़ें-
'कोई रोड मुगल-पठान के नाम पर नहीं', सीएम शुभेंदु ने बंगाल में सड़कों के नाम बदलने के लिए बनाई कमेटी