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कोरोना काल में भी बाज नहीं आ रहा पाकिस्तान, कुरैशी ने संयुक्त राष्ट्र प्रमुख से की कश्मीर पर चर्चा की अपील

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : May 23, 2020 10:15 am IST,  Updated : May 23, 2020 10:15 am IST

एक ओर जहां दुनिया के देश कोरोना महामारी से निपटने में लगे हैं तो वहीं दुसरी ओर पाकिस्तान कश्मीर पर नई साजिशों को अंजाम देने में। इसी क्रम में शाह महमूद कुरैशी ने एंतोनियो गुतारेस को फोन कर जम्मू-कश्मीर के डोमिसाइल संबंधी कानून को बदलने के भारत के फैसले पर चिंता जाहिर की।

Pak FM Shah Mahmood Qureshi phones UN chief over Kashmir- India TV Hindi
Pak FM Shah Mahmood Qureshi phones UN chief over Kashmir Image Source : FILE

इस्लामाबाद: एक ओर जहां दुनिया के देश कोरोना महामारी से निपटने में लगे हैं तो वहीं दुसरी ओर पाकिस्तान कश्मीर पर नई साजिशों को अंजाम देने में। इसी क्रम में पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस को फोन कर जम्मू-कश्मीर के डोमिसाइल संबंधी कानून को बदलने के भारत के फैसले पर चिंता जाहिर की। डोमिसाइल संबंधी कानून के तहत, वे सभी व्यक्ति और उनके बच्चे जो जम्मू-कश्मीर में 15 साल रहे हों या सात साल तक पढ़ाई की हो और केंद्र शासित प्रदेश के किसी शैक्षणिक संस्थान से 10वीं या 12वीं की परीक्षा में शामिल हुए हों, वे सभी स्थानीय निवासी माने जाने के पात्र होंगे।

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विदेश मंत्रालय ने कहा कि कुरैशी ने संयुक्त राष्ट्र प्रमुख को कश्मीर में स्थिति से अवगत कराया। विदेश मंत्री ने, “कश्मीर में स्थानीय निवास संबंधी नये कानून का हवाला दिया जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों और चौथे जिनेवा समझौते समेत अन्य अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।”

उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत किसी तरह का ‘छद्म’ अभियान भी चला सकता है। विदेश मंत्री ने कहा कि अगर भारत किसी तरह की खास सूचना देता है तो पाकिस्तान आतंकवाद लॉन्च पैड के ऊपर दावे को प्रमाणित करने के लिए भारत और पाकिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सैन्य पर्यवेक्षक समूह (यूएनएमओजीआईपी) को अनुमति देने को तैयार है।

वहीं भारत अपने इस रुख पर कायम है कि जनवरी 1949 में स्थापित यूएनएमओजीआईपी अपनी सार्थकता खो चुका है और शिमला समझौते तथा उसके बाद नियंत्रण रेखा (एलओसी) स्थापित होने के बाद अप्रासंगिक हो चुका है।

कुरैशी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को कश्मीर में स्थिति और बिगड़ने से रोकने में उचित भूमिका निभानी चाहिए और भारत को उसके “अवैध कार्यों’’ के लिए रोकना चाहिए तथा दक्षिण एशिया में शांति एवं सुरक्षा को संरक्षित रखना चाहिए। 

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