Spy Ship China: श्रीलंका से मिले झटके से आगबबूला हुआ चीन, जासूसी जहाज को 'नो एंट्री' के बाद भारत पर भड़का, कहा- दबाव डालना बेकार, किसी तीसरे...

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि चीन नौवहन की स्वतंत्रता का पालन करता है और द्वीपीय देशों के जल क्षेत्र में वैज्ञानिक खोज की गतिविधियों के लिए उनके अधिकार क्षेत्र का पूरी तरह से सम्मान करता है।

Shilpa Written By: Shilpa
Published on: August 09, 2022 11:59 IST
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Image Source : PTI/AP PM Narendra Modi-Xi Jinping

Highlights

  • श्रीलंका ने जहाज को लाने से किया मना
  • चीन ने इसके बाद भारत पर तंज कसा
  • हंबनटोटा आने वाला था चीन का जहाज

Spy Ship China: सामरिक रूप से अहम हंबनटोटा बंदरगाह पर चीन के ‘हाई टेक’ अनुसंधान पोत के आगमन की योजना को टालने की श्रीलंका की गुजारिश से खफा चीन ने सोमवार को भारत पर कटाक्ष करते हुए कहा कि सुरक्षा चिंताओं का हवाला देकर कोलंबो पर “दबाव डालना अर्थहीन’’ है। कोलंबो से मिली रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीलंका ने चीन से कहा है कि वह अपने अंतरिक्ष एवं उपग्रह टोही पोत ‘युआन वांग 5’ के हंबनटोटा बंदरगाह पर आगमन को भारत की ओर से व्यक्त की गई चिंताओं की वजह से टाल दे। इस पोत को 11 से 17 अगस्त तक बंदरगाह पर पहुंचना है। 

इन रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने पत्रकार वार्ता में यहां कहा कि बीजिंग ने रिपोर्ट का संज्ञान लिया है और, “ चीन तथा श्रीलंका के बीच सहयोग का चुनाव दोनों मुल्कों ने स्वतंत्र रूप से किया है और उनके साझा हित मेल खाते हैं। यह किसी तीसरे पक्ष को निशाना नहीं बनाते ।” रिपोर्ट के संदर्भ में उन्होंने कहा कि सुरक्षा चिंताओं का हवाला देकर श्रीलंक पर “ दबाव डालना अर्थहीन” है। रिपोर्ट में श्रीलंका के कदम के लिए भारत की ओर से व्यक्त की गई चिंताओं को जिम्मेदार बताया गया है। 

उन्होंने कहा, “ श्रीलंका एक संप्रभु राष्ट्र है और वह अपने विकास के हितों के मद्देनजर किसी भी तीसरे देश से संबंध बना सकता है।” वांग ने कहा, “ चीन संबंधित पक्षों से चीन की वैज्ञानिक खोजों को उचित और समझदार तरीके से देखने का आग्रह करता है और यह भी गुजारिश करता है कि चीन और श्रीलंका के बीच सामान्य आदान प्रदान को बाधित करना बंद करें।” उन्होंने यह भी कहा कि श्रीलंका हिंद महासागर में परिवहन केंद्र है और ईंधन भरवाने के लिए चीन समेत कई देशों के वैज्ञानिक खोजी पोत श्रीलंका के बंदरगाहों पर रुकते हैं।

China spy ship

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भारत ने जताया था ऐतराज

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि चीन नौवहन की स्वतंत्रता का पालन करता है और द्वीपीय देशों के जल क्षेत्र में वैज्ञानिक खोज की गतिविधियों के लिए उनके अधिकार क्षेत्र का पूरी तरह से सम्मान करता है। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक, भारत ने श्रीलंका को सूचित किया कि हाई-टेक चीनी अनुसंधान पोत के उसके बंदरगाह पर आने से भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा हो सकता है। भारत की ओर से श्रीलंका को कड़े संदेश मिले हैं। खबरों में कहा गया है कि माना जाता है कि पोत में उपग्रहों और इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टक मिसाइलों का पता लगाने की क्षमता है।

भारत ने कहा है कि वह उन घटनाक्रमों पर करीब से निगाह रखता है जो उसकी सुरक्षा और आर्थिक हितों से संबंधित होते हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची से जब इस बाबत पूछा गया तो उन्होंने पिछले महीने दिल्ली में कहा था कि भारत को इस पोत के हंबनटोटा बंदरगाह की प्रस्तावित यात्रा के बारे में जानकारी है और सरकार इस पर नज़र रख रही है तथा सभी जरूरी उपाय किए गए हैं। कोलंबो से मिली खबरों के मुताबिक, श्रीलंका की ओर से पोत के आगमन को टालने के आग्रह के बाद चीनी दूतावास ने तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की गुजारिश की है।

 
कड़ा रुख अपना रहा है भारत

भारत हिंद महासागर में चीनी सैन्य जहाजों को लेकर पारंपरिक रूप से विगत में कड़ा रुख अपनाता रहा है और श्रीलंका के समक्ष इस तरह की यात्राओं को लेकर विरोध दर्ज कराता आया है। वर्ष 2014 में कोलंबो द्वारा अपने एक बंदरगाह पर चीन की परमाणु चालित पनडुब्बी को ठहरने की अनुमति दिए जाने के बाद भारत और श्रीलंका के बीच संबंध तनावपूर्ण हो गए थे। चीन अवसंरचना में निवेश के साथ श्रीलंका का प्रमुख ऋणदाता है। दूसरी ओर, भारत मौजूदा आर्थिक संकट में श्रीलंका की जीवनरेखा रहा है। वर्ष के दौरान श्रीलंका को लगभग चार अरब डॉलर की आर्थिक सहायता देने में भारत सबसे आगे रहा है क्योंकि यह द्वीपीय राष्ट्र 1948 में स्वतंत्रता मिलने के बाद से सबसे खराब आर्थिक संकट का सामना कर रहा है।

श्रीलंका के नए राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे अपने देश को आर्थिक संकट से बाहर निकालने के लिए प्रयास कर रहे हैं और भारत ने कहा है कि वह द्वीप राष्ट्र की सहायता करना जारी रखेगा। प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने ने पिछले हफ्ते कहा था कि श्रीलंका 'मित्रता के दृष्टिकोण' के साथ पोत की यात्रा के मुद्दे को सुलझाने को तत्पर है। भारत की चिंता विशेष रूप से हंबनटोटा बंदरगाह पर केंद्रित है। 2017 में, कोलंबो ने दक्षिणी बंदरगाह को चीन की मर्चेंट पोर्ट होल्डिंग्स को 99 साल के लिए पट्टे पर दे दिया था, क्योंकि श्रीलंका अपनी ऋण चुकौती प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में असमर्थ रहा था। इससे चीन द्वारा सैन्य उद्देश्यों के लिए बंदरगाह का उपयोग किए जाने की आशंका बढ़ गई थी।

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