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Turkey Earthquake : भूकंप प्रभावित तुर्की में चमत्कार, 10 दिन बाद मलबे से ज़िंदा निकली 17 साल की अल्येना, इलाज के लिए अंकारा लाया गया

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Feb 17, 2023 10:35 am IST,  Updated : Feb 17, 2023 02:51 pm IST

तुर्की में आए भूकंप में अब तक 41 हज़ार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.जबकि एक लाख से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।

तुर्की भूकंप-राहत और बचाव जारी- India TV Hindi
तुर्की भूकंप-राहत और बचाव जारी Image Source : इंडिया टीवी

Turkey Earthquake : भूकंप से बुरी तरह प्रभावित तुर्की में चमत्कारिक घटना सामने आई है। यहां भूकंप के 10 दिन बाद मलबे से एक लड़की को सुरक्षित निकाल लिया गया है। 17 साल की इस लड़की का नाम अल्येना है। तुर्की के कह-रामान-मारस शहर में अल्येना को बचाव दल ने मलबे से बाहर निकाला है। अल्येना भूकंप के वक्त एक बिल्डिंग की चपेट में आ गई थी और दस दिन तक उसके मलबे में दबी रही। जैसे ही अल्येना को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला गया, रेस्क्यू टीम की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा। रेस्क्यू टीम के सदस्य इस घटना पर अपनी खुशियाों का इजहार करने से नहीं चूके।

तुर्की में आए भूकंप में अब तक 41 हज़ार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.जबकि एक लाख से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। तुर्की और सीरिया में 7.8 तीव्रता के आए शक्तिशाली भूकंप के बाद मलबे में दबे लोगों को निकालने का काम तेजी से शुरू हुआ। मदद के भारत समेत कई देशों की टीम राहत और बचाव के कामों में जुट गई थी। ज्यादातर जगहों से विदेशी रेस्क्यू टीमें वापस जा चुकी है लेकिन तुर्की की रेस्क्यू टीम अभी भी मलबा हटाने के काम में जुटी है।

भूकंप और उसके बाद महसूस किये गये झटकों में काफी संख्या में इमारतें ताश के पत्तों की तरह भरभरा कर ढह गईं, जिसके चलते हजारों लोग बेघर हो गये। साथ ही, कड़ाके की सर्दी के कारण कई लोगों की मौत हो गयी है।

भूकंप के चलते मची तबाही को लेकर विशेषज्ञों की राय है कि देश में भवन निर्माण संबंधी कमजोर नीतियां और आधुनिक निर्माण नियमों को लागू करने में विफलता भी लोगों की इतने बड़े पैमाने पर मौत का कारण बनी। उनका कहना है कि रियल एस्टेट क्षेत्र में उछाल उन क्षेत्रों में आया था जो भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील थे, लेकिन यहां आधुनिक निर्माण कानूनों की पूरी तरह अनदेखी की गई थी। भूविज्ञान और इंजीनियरिंग के विशेषज्ञ लंबे समय से चेतावनी दे रहे थे और इस सप्ताह के विनाशकारी भूकंपों के बाद नीतियों और कानूनों के क्रियान्वयन में ढिलाई की नए सिरे से जांच की जा रही है।

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