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मॉस्को में सर्गेई लावरोव से मिलेंगे जयशंकर, भारत-रूस के संबंधों को मिलेगी और मजबूती

जयशंकर का यह दौरा न केवल एससीओ जैसे क्षेत्रीय मंचों को मजबूत करेगा, बल्कि पुतिन की यात्रा के लिए जमीन तैयार करेगा। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, जयशंकर रूस के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से भी भेंट करेंगे और रूस-भारत मंच 2025 जैसे कार्यक्रमों पर चर्चा करेंगे।

Edited By: Dharmendra Kumar Mishra @dharmendramedia
Published : Nov 14, 2025 11:19 pm IST, Updated : Nov 14, 2025 11:19 pm IST
एस जयशंकर और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव।- India TV Hindi
Image Source : AP एस जयशंकर और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव।

मॉस्को: भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर सोमवार को मॉस्को पहुंचकर रूस के अपने समकक्ष सर्गेई लावरोव के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा करेंगे। यह मुलाकात खासकर वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के बीच भारत-रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई गति देने का महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को इसकी आधिकारिक पुष्टि की, जो शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की राष्ट्राध्यक्ष परिषद की बैठक से ठीक पहले हो रही है। 

17-18 नवंबर को होगी मीटिंग

रूस की विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने कहा कि जयशंकर एससीओ बैठक के लिए एक उच्च स्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल के साथ 17-18 नवंबर को मॉस्को में होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया, "सोमवार, 17 नवंबर को रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव भारतीय विदेश मंत्री के साथ औपचारिक वार्ता करेंगे।" यह बैठक न केवल द्विपक्षीय मुद्दों पर केंद्रित होगी, बल्कि वैश्विक मंचों पर सहयोग को भी मजबूत करेगी। जखारोवा के अनुसार, दोनों नेता वर्तमान और भविष्य के राजनीतिक सहयोग पर विचार-विमर्श करेंगे, साथ ही द्विपक्षीय संबंधों के प्रमुख पहलुओं की समीक्षा करेंगे। इसमें एससीओ, ब्रिक्स, संयुक्त राष्ट्र और जी20 जैसे बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग शामिल है।

इन प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा

जयशंकर और सर्गेई की मुलाकात के दौरान प्रमुख अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों-जैसे यूक्रेन संकट, मध्य पूर्व की अस्थिरता और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियां पर भी विचारों का आदान-प्रदान होगा। भारत और रूस के बीच ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग और आर्थिक साझेदारी जैसे क्षेत्रों में गहराई से चर्चा की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुलाकात अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच रूस से तेल आयात और रक्षा सौदों को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर भी फोकस करेगी। जयशंकर के दौरे का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा वोल्गा क्षेत्र में तातारस्तान की राजधानी कजान और यूराल पर्वत श्रृंखला में स्थित एकातेरिनबर्ग में दो नए भारतीय वाणिज्य दूतावासों का वर्चुअल उद्घाटन होगा। ये दूतावास व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा देंगे, जो भारत-रूस संबंधों के 'पीपुल्स टू पीपुल' आयाम को मजबूत करेंगे।

दिसंबर में पुतिन आएंगे भारत

जयशंकर के इस दौरे का एक बड़ा संदर्भ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की प्रस्तावित भारत यात्रा है, जो 5 दिसंबर के आसपास होने की संभावना है। पुतिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ शिखर वार्ता करेंगे, जिसमें रक्षा, ऊर्जा और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों पर समझौते हो सकते हैं। पुतिन की पिछली भारत यात्रा 2021 में हुई थी, जब उन्होंने नई दिल्ली में मोदी के साथ वार्ता की थी। तब दोनों देशों ने विशेष रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने का संकल्प लिया था। भारत-रूस संबंध 75 वर्षों से अधिक पुराने हैं, जो सोवियत काल से चले आ रहे हैं। हाल के वर्षों में, यूक्रेन युद्ध के बावजूद, दोनों देशों का व्यापार 2024-25 में 65 अरब डॉलर को पार कर गया, जिसमें रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया। (भाषा/पीटीआई)

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