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ऑनलाइन गेम की आदत बच्चों की ले रही है जान, मेंटल हेल्थ बिगाड़ रहा रील्स का एडिक्शन, बढ़ रही हैं ये बीमारी

 Written By: Pankaj Kumar, Edited By: Bharti Singh
 Published : Feb 05, 2026 10:19 am IST,  Updated : Feb 05, 2026 10:19 am IST

Online Game Addiction Side Effects: बच्चे हों या बड़े हर किसी को मोबाइल की तल लग चुकी है। जिसका खामियाजा कहीं मानसिक बीमारियों के रूप में सामने आ रहा है तो कहीं सुसाइड के रूप में। सोशल मीडिया ने इसे और भी भयानक बना दिया है।

ऑनलाइन गेम के नुकसान- India TV Hindi
ऑनलाइन गेम के नुकसान Image Source : FREEPIK

एक गेम, एक टास्क और सेकंड में पूरा परिवार तबाह। आज का दौर मोबाइल फ़ोन का दौर है, लेकिन हंसते-खेलते बच्चे स्क्रीन में इस कदर  डूब रहे हैं कि मां-बाप को पता भी नहीं चलता और जिंदगी हाथ से फिसल जाती है। जी हां गाजियाबाद के दर्दनाक हादसे ने पूरे देश को हिला दिया है। 3 फरवरी 2026 की रात तीन सगी बहनों ने 9वीं मंजिल से कूदकर जान दे दी। बच्चियों की उम्र 16 साल, 14 साल और सिर्फ 12 साल की थी। जो मोबाइल गेम 'कोरियन लवर' की आदी थीं। गेम  के आखिरी टास्क के नाम पर बच्चियों ने आत्महत्या कर ली। घर में माता-पिता थे, लेकिन बच्चों की दुनिया बस मोबाइल बन चुका था।

पुलिस को मिला सुसाइड नोट दिल दहला देने वाला था। मोबाइल बच्चों की जिंदगी बन गया  था। बच्चियां तीन साल से गेम की गिरफ्त में थी  मां-बाप को खबर ही नहीं लगी और परिवार बर्बाद हो गया। ये अकेली घटना नहीं है। कर्नाटक में एक 13 साल का बच्चा छत से कूद गया, जबकि मां घर के अंदर थी। बच्चा मोबाइल गेम के चैलेंज के चक्कर में था। मतलब मोबाइल गेम्स अब सिर्फ मनोरंजन नहीं जानलेवा बन चुके हैं। अब दिमाग में सवाल आता है कि ये मोबाइल गेम्स आखिर बच्चों के दिमाग के साथ कैसे खेलतें हैं?

बच्चों के लिए जानलेवा गेम

असल में भारत में इस वक्त करीब '59 करोड़ गेमर्स' हैं। करीब 74% Gen Z हर हफ्ते   6 घंटे से ज्यादा गेम खेलते हैं। डॉक्टर्स के पास हर हफ्ते '4 से 5 केस सिर्फ गेमिंग एडिक्शन' के आ रहे हैं। कर्नाटक में तो कुछ महीनों के अंदर सुसाइड के 32 केस आए, जो सीधे-सीधे ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े थे।

गेम से बच्चों के दिमाग पर असर

हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक गेम जीतने पर दिमाग में डोपामिन रिलीज होता है और यही खुशी धीरे-धीरे एडिक्शन बन जाती है। हार हुई तो गुस्सा, चिड़चिड़ापन, नींद खराब, पढ़ाई खत्म, रिश्ते टूटने लगते हैं। 2026 की एक स्टडी के मुताबिक हाल ये है कि भारत में 60% मानसिक बीमारियां 35 साल से कम उम्र में शुरू हो रही हैं और इसकी बड़ी वजह मोबाइल, स्क्रीन और ऑनलाइन गेमिंग का नशा है। दरअसल, आज जरूरत सिर्फ रोक-टोक की नहीं है। बात समझने की है और बात करने की है।  पेरेंट्स को बच्चों के दिल और दिमाग को पढ़ना होगा। वरना गेम के एक छोटे से टास्क के नाम पर बच्चों की जिंदगी यूं ही खत्म होती रहेंगी।

सोशल मीडिया के नुकसान

  • घबराहट
  • अकेलापन
  • अनिद्रा
  • डिप्रेशन
  • हकीकत से दूरी
  • डिजिटल एडिक्शन       

TEXT NECK सिंड्रोम का असर

  • सिरदर्द, गर्दन में अकड़न, झुनझुनी और पीठ दर्द
  • बीमारी की गिरफ्त में 14 से 24 साल के युवा
  • पिछले एक साल में 15 से 20% मामले बढ़े
  • युवा 24 घंटे में से 5-6 घंटे सेलफोन पर रहते हैं
  • MNC's वाले 8 घंटे लैपटॉप,5-6 घंटे मोबाइल पर 
  • 20% पढ़ाई करने वाले मोबाइल पर रहते हैं 

ज्यादा फोन या लैपटॉप के इस्तेमाल से नुकसान

  • मोटापा
  • डायबिटीज
  • हार्ट प्रॉब्लम
  • नर्वस प्रॉब्लम
  • स्पीच प्रॉब्लम
  • नजर कमजोर
  • हियरिंग प्रॉब्लम
  • रेटिना डैमेज
  • नींद की बीमारी
  • नजर कमजोर
  • आंखों में ड्राईनेस 
  • पलकों में सूजन
  • आंखों में रेडनेस 

 

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