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KGMU में मजार पर विवाद, नोटिस का जवाब देने के लिए 6 फरवरी की डेडलाइन, इसके बाद धवस्तीकरण शुरू होगा

 Reported By: Vishal Pratap Singh, Edited By: Subhash Kumar
 Published : Feb 05, 2026 09:26 am IST,  Updated : Feb 05, 2026 01:31 pm IST

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की KGMU में मजार पर विवाद जारी है। मजार कमेटी को नोटिस का जवाब देने के लिए 6 फरवरी की डेडलाइन तय है। इसके बाद मजारों का धवस्तीकरण शुरू होगा।

KGMU Illegal mazar case- India TV Hindi
KGMU में अवैध मजार पर विवाद। (फाइल फोटो) Image Source : KGMU

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के केजीएमयू में मजारों को लेकर राजनीति लगातार हो रही है। तो वहीं 6 फरवरी आखिरी तारीख है मजारों पर चस्पा किये गए नोटिस के जवाब देने की। अगर किसी मजार कमेटी के द्वारा केजीएमयू प्रशासन के नोटिस का जवाब 6 फरवरी तक नहीं दिया जाता है, तब 6 फरवरी के बाद केजीएमयू अवैध मजारों का धवस्तीकरण का काम शुरू कर देगा। आपको बता दे की केजीएमयू प्रशासन के तरफ से केजीएमयू कैंपस में बने 6 मजारों पर नोटिस चस्पा किया गया है और नोटिस में कहा गया है कि यह सभी मजारें अवैध हैं।

15 दिन का वक्त दिया गया था

लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी यानी केजीएमयू के कैंपस में बने 6 अवैध मजारों को नोटिस जारी किया गया था और नोटिस में मजार प्रशासन को 15 दिन का वक्त दिया गया था। 6 फरवरी को 15 दिन का वक्त खत्म हो रहा है। इसका मतलब है कि अगर मजार प्रशासन 6 फरवरी तक केजीएमयू को नोटिस का जवाब नहीं देता है। तब ऐसे में केजीएमयू प्रशासन सभी 6 अवैध मजारों की ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर देगा। अगर मजार प्रशासन चाहता है कि केजीएमयू मजारों पर कार्रवाई न करें तो ऐसे में मजार प्रशासन को प्रमाण के साथ केजीएमयू प्रशासन को बताना होगा कि यह सभी मजारें केजीएमयू के बनने से पहले के हैं।

कैंपस के अंदर कुल 8 मजारें

आपको बता दें की केजीएमयू कैंपस के अंदर कुल 8 मजारें हैं। इन 8 मजारों में से 6 मजारों पर केजीएमयू प्रशासन ने नोटिस चस्पा किया है। केजीएमयू प्रशासन के मुताबिक नोटिस चस्पा करने से पहले वह इस मामले को अदालत में लेकर गए थे। अदालत से अपने पक्ष में फैसला आने के बाद केजीएमयू ने सभी अवैध मजारों पर नोटिस चस्पा किया है।

बयानबाजी जारी

अवैध मजारों को लेकर लखनऊ में राजनीति भी लगातार गर्म हो रही है। मजारों पर राजनीतिक पार्टियों के नेताओं का जाना शुरू हो गया है। कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष केजीएमयू जाकर मजारों को लेकर बीजेपी सरकार को घेर चुके हैं। राजनीतिक नेताओं के अलावा मजारों के मुद्दे पर मौलवी और साधु संत भी खुलकर सामने आ गए हैं। मौलाना फिरंगी मेहंदी ने दावा किया है कि केजीएमयू में बने मजार केजीएमयू बनने से पहले के हैं। तो वही महाराज विष्णु दास ने कहा है कि अगर मजार इतने पुराने हैं तो उसके एविडेंस केजीएमयू प्रसाशन को दीजिए।

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