रामानंद सागर की टीवी सीरीज 'रामायण' 1987 में दूरदर्शन पर प्रसारित हुई थी, भारतीय टेलीविजन के इतिहास की सबसे यादगार और प्रभावशाली सीरीज में से एक मानी जाती है। इस पौराणिक धारावाहिक ने न केवल धार्मिक आस्था को जन-जन तक पहुंचाया, बल्कि इसके किरदार भी लोगों के दिलों में हमेशा के लिए बस गए। शो के हर पात्र को दर्शकों ने उसी श्रद्धा और भावनात्मक जुड़ाव के साथ अपनाया, जैसे वे किसी ग्रंथ के जीवंत रूप हों। यही वजह है कि रामायण की स्टार कास्ट को आज भी एक कल्ट के रूप में देखा जाता है। जब भी रामायण की चर्चा होती है, भगवान राम के रूप में अरुण गोविल, सीता के रूप में दीपिका चिखलिया और लक्ष्मण बने सुनील लहरी का नाम सबसे पहले ज़हन में आता है। लेकिन राजा दशरथ का वह गंभीर, संवेदनशील और मर्यादित किरदार भी दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ गया था, जिसे निभाया था वरिष्ठ अभिनेता बाल धुरी ने। वर्षों बाद भी दर्शक उनके अभिनय को नहीं भूल पाए हैं।
लॉकडाउन में फिर छाए राजा दशरथ
कोरोना महामारी के दौरान लगे लॉकडाउन में जब रामायण का दोबारा प्रसारण हुआ, तब एक बार फिर इस शो ने टीआरपी के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। नई पीढ़ी के दर्शकों ने भी पहली बार इस पौराणिक कथा को टीवी पर देखा और पुराने दर्शकों के लिए यह भावनात्मक यादों की वापसी थी। उस समय राजा दशरथ का किरदार फिर से चर्चा में आया। बाल धुरी द्वारा निभाया गया यह पात्र आज भी उतना ही प्रभावशाली लगा, जितना 1987 में लगा करता था।
कौन हैं बाल धुरी?
बाल धुरी मराठी सिनेमा और रंगमंच का एक जाना-माना नाम रहे हैं। रामायण में राजा दशरथ के रूप में उन्होंने जिस गरिमा, करुणा और आंतरिक संघर्ष को पर्दे पर उतारा, वह उनके अभिनय कौशल का प्रमाण था। उन्होंने इस किरदार में अपनी ओर से सौ प्रतिशत दिया और यही वजह है कि उनका अभिनय आज भी दर्शकों को याद है। हालांकि रामायण जैसी ऐतिहासिक सफलता के बाद भी बाल धुरी वह निरंतर लोकप्रियता हासिल नहीं कर पाए, जिसकी उनसे उम्मीद की जा रही थी। वर्तमान समय में वे मराठी फिल्म इंडस्ट्री में छोटे-छोटे किरदारों में कभी-कभार नज़र आते हैं। बड़े पर्दे या टीवी पर उनकी मौजूदगी अब पहले जैसी नहीं रही, और इसी कारण कहीं न कहीं वे गुमनामी के साये में चले गए हैं।

फिल्मी करियर की शुरुआत
बाल धुरी ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत 1970 के दशक में मराठी फिल्म ‘देवचिये द्वारी’ से की थी। इसके बाद उन्होंने कई मराठी फिल्मों में काम किया और अपनी पहचान बनाई। हिंदी सिनेमा में भी उन्होंने कदम रखा और दारा सिंह स्टारर पौराणिक फिल्म ‘जय बजरंग बली’ में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अपने करियर के दौरान बाल धुरी ने करीब 22 फिल्मों में काम किया। इनमें से ज़्यादातर फिल्में मराठी भाषा की थीं, जहाँ उन्होंने ऐतिहासिक और पौराणिक किरदारों में खास पहचान बनाई। वे महान मराठा योद्धा बालाजी बाजीराव के किरदार के लिए भी जाने जाते हैं, जिसे उन्होंने बेहद प्रभावशाली ढंग से निभाया था।
रामायण से बदली किस्मत
1987 में रामायण में राजा दशरथ का किरदार बाल धुरी के करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इस शो ने उन्हें देशभर में पहचान दिलाई और वे घर-घर में पहचाने जाने लगे। हालांकि, इसके बाद उन्हें उसी स्तर के बड़े और यादगार रोल कम ही मिले। फिर भी, रामायण में निभाया गया उनका किरदार आज भी उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि माना जाता है।
निजी जीवन
बाल धुरी की निजी जिंदगी भी काफी चर्चित रही है। उन्होंने मशहूर मराठी और बॉलीवुड अभिनेत्री जयश्री गडकर से शादी की थी। जयश्री गडकर खुद भी पौराणिक और ऐतिहासिक फिल्मों की एक प्रतिष्ठित अभिनेत्री रही हैं। दोनों को इंडस्ट्री में एक सम्मानित जोड़ी के रूप में देखा जाता था। उन्होंने रामायण में कौशल्या का किरदार अदा किया था, इसका सीधा मतलब है कि रामायण में उनकी पत्नी का रोल निभाने वाली एक्ट्रेस ही उनकी पत्नी थीं, जो अब दुनिया छोड़ चुकी हैं।
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