Shani Ast 2026 Predictions: साल 2026 ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि इस साल कर्मफल दाता शनि ग्रह लंबी अवधि के लिए अस्त और वक्री होने जा रहे हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शनि का कमजोर होना केवल व्यक्तिगत जीवन ही नहीं, बल्कि करियर, अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य और वैश्विक घटनाओं पर भी गहरा असर डाल सकता है। आइए जानते हैं कि शनि के अस्त और वक्री होने से किन सेक्टरों पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ने वाला है।
शनि के अस्त और वक्री होने की अवधि
द्रिक पंचांग के अनुसार शनि ग्रह 13 मार्च से 22 अप्रैल 2026 तक मीन राशि में अस्त रहेंगे, यानी करीब 40 दिनों तक उनकी शक्ति कमजोर रहेगी। इसके बाद 27 जुलाई से 11 दिसंबर 2026 तक शनि वक्री होकर उल्टी चाल चलेंगे, जिसकी अवधि लगभग 138 दिन होगी। ज्योतिष के अनुसार,यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण होगा है। इस दौरान करियर, निवेश, स्वास्थ्य, निर्माण और वैश्विक स्तर पर प्राकृतिक आपदाओं तक के योग बन सकते हैं।
करियर और प्रोफेशन पर असर
शनि के अस्त और वक्री होने से करियर सेक्टर पर सबसे गहरा असर पड़ने की संभावना है। इस दौरान प्रमोशन में देरी, नई जिम्मेदारियों में रुकावट और प्रोजेक्ट्स के अटकने के योग बन सकते हैं। खासतौर पर लोहा, मशीन, तेल और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े क्षेत्रों में काम की रफ्तार बहुत धीमी हो सकती है। लगातार रुकावटों के कारण आर्थिक नुकसान और मानसिक तनाव बढ़ सकता है।
आर्थिक सेक्टर के लिए चुनौतीपूर्ण समय
आर्थिक सेक्टर के लिए भी यह समय चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता बनी रह सकती है। बड़े निवेशों में पैसा फंसने की संभावना बढ़ जाती है। प्रॉपर्टी से जुड़े फैसलों में खास सावधानी बरतने की जरूरत है, क्योंकि शनि को संपत्ति का कारक माना जाता है और उनकी कमजोर स्थिति में जमीन और मकान से जुड़े सौदे नुकसान दे सकते हैं।
सेहत पर पडे़गा नकारात्मक प्रभाव
शनि उम्र और स्वास्थ्य से जुड़े ग्रह माने जाते हैं। उनके अस्त और वक्री होने से हड्डियों, जोड़ों और नसों से जुड़ी पुरानी बीमारियां फिर उभर सकती हैं। शरीर में कमजोरी, थकान और दर्द बना रह सकता है। मानसिक रूप से भी व्यक्ति बेचैनी, डर और भ्रम की स्थिति महसूस कर सकता है।
रियल एस्टेट सेक्टर भी आएगा चपेट में
निर्माण और रियल एस्टेट सेक्टर पर भी शनि की स्थिति का गहरा असर पड़ेगा। मजदूरों की कमी, काम में लापरवाही और तकनीकी समस्याओं के कारण प्रोजेक्ट्स अटक सकते हैं। इससे निवेशकों को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है और लंबे समय तक पैसा फंसा रह सकता है।
प्राकृतिक आपदाएं और नई बीमारियां
शनि के अस्त और वक्री होने का असर प्रकृति पर भी पड़ेगा। ऐसे में मौसम में असंतुलन बढ़ने से बाढ़, भूकंप, आगजनी और बड़ी दुर्घटनाएं हो सकती हैं। नई बीमारियों के फैलने की आशंका भी जताई जा रही है, जो आगे चलकर महामारी का रूप ले सकती हैं।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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