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विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने किया बेहद डरावना दावा, राष्ट्रपति पुतिन के निर्देशों पर रूस ने शुरू की 'परमाणु परीक्षण' की तैयारियां

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने बेहद डरावना दावा करके सबको हैरान कर दिया है। उनका कहना है कि रूस ने राष्ट्रपति पुतिन के निर्देशों पर परमाणु परीक्षण को लेकर काम शुरू कर चुका है।

Edited By: Dharmendra Kumar Mishra @dharmendramedia
Published : Nov 09, 2025 03:29 pm IST, Updated : Nov 09, 2025 03:29 pm IST
सर्गेई लावरोव, रूस के विदेश मंत्री। - India TV Hindi
Image Source : AP सर्गेई लावरोव, रूस के विदेश मंत्री।

मॉस्को: रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने बेहद डरावना दावा किया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के निर्देशों पर रूस ने परमाणु परीक्षणों को लेकर काम शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि इसे शुरू करने की व्यवहार्यता का अध्ययन करने के निर्देशों पर विदेश मंत्रालय सहित संबंधित एजेंसियां सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। बता दें कि गत पांच नवंबर को सुरक्षा परिषद की बैठक में पुतिन ने विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, खुफिया सेवाओं और नागरिक एजेंसियों को निर्देश दिया था कि यदि अमेरिका व्यापक परीक्षण प्रतिबंध संधि (सीटीबीटी) के तहत परमाणु परीक्षणों पर रोक का पालन नहीं करता, तो रूस द्वारा परीक्षणों की तैयारी की संभावना पर प्रस्ताव तैयार करें। 

अमेरिका को कड़ा जवाब देने की तैयारी में रूस 

सरकारी समाचार एजेंसी तास और आरआईए नोवोस्ती के अनुसार, लावरोव ने संवाददाताओं से कहा, “रूसी विदेश मंत्रालय ने पांच नवंबर की सुरक्षा परिषद बैठक में राष्ट्रपति पुतिन द्वारा दिए गए निर्देशों को कार्यान्वयन के लिए स्वीकार कर लिया है और इस दिशा में काम तेजी से चल रहा है। जनता को परिणामों की जानकारी दी जाएगी।” लावरोव ने जोर देकर कहा कि मॉस्को को अभी तक राजनयिक चैनलों से वाशिंगटन से कोई स्पष्टीकरण नहीं मिला है, खासकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस हालिया बयान पर, जिसमें उन्होंने तीन दशकों से अधिक समय के बाद अमेरिकी परमाणु हथियारों का परीक्षण फिर शुरू करने की योजना का ऐलान किया था। उन्होंने कहा, “हमें अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ कि राष्ट्रपति ट्रंप ने परमाणु परीक्षण फिर शुरू करने का ऐलान करते हुए क्या मतलब रखा था। क्या यह पूर्ण पैमाने के विस्फोट परीक्षणों की बात है, या सबक्रिटिकल परीक्षण, या फिर परमाणु हथियार वाहकों का परीक्षण?” 

ट्रंप के बयानों ने पैदा कर दिया परमाणु तनाव

लावरोव का यह बयान ऐसे समय आया, जब ट्रंप ने 30 अक्टूबर को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात से पहले कहा था कि अमेरिका “समान आधार” पर परीक्षण शुरू करेगा, क्योंकि अन्य परमाणु शक्ति संपन्न देश जैसे पाकिस्तान और चीन परीक्षण कर रहे हैं। सुरक्षा परिषद की बैठक के टेलीविजन प्रसारण के दौरान पुतिन ने स्पष्ट रूप से कहा था कि रूस तभी परमाणु परीक्षण फिर शुरू करेगा, जब अमेरिका या कोई अन्य हस्ताक्षरकर्ता देश ऐसा करेगा। उन्होंने कहा, “यदि कोई देश सीटीबीटी के मोरेटोरियम को तोड़ता है, तो रूस को पारस्परिक कदम उठाने का दायित्व होगा।” 

रूस कर रहा पूर्ण परमाणु परीक्षण की तैयारी

रूस के रक्षा मंत्री आंद्रे बेलौसोव ने सुझाव दिया कि अमेरिकी बयानों के जवाब में रूस को पूर्ण पैमाने के परमाणु परीक्षण की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए, जो शीत युद्ध के दौरान नियमित रूप से किए जाते थे, लेकिन पर्यावरणीय क्षति के कारण 1990 के दशक से रोके गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अमेरिका-रूस के बीच परमाणु हथियारों की होड़ को फिर भड़का सकता है, खासकर जब से रूस ने दो साल पहले (2023) सीटीबीटी की पुष्टि वापस ले ली थी, जिससे परीक्षणों की अटकलें तेज हो गईं। सीटीबीटी, जो 1996 में हस्ताक्षर के लिए खोला गया था, सभी परमाणु शक्ति संपन्न देशों (उत्तर कोरिया को छोड़कर) द्वारा अपनाया गया है, लेकिन अमेरिका ने इसे कभी पुष्टि नहीं की। 

उत्तर कोरिया ने सीटीबीटी के बावजूद अब तक किए 5 परमाणु परीक्षण

पिछले 21वीं सदी में केवल उत्तर कोरिया ने 2006 से 2017 तक पांच विस्फोट परीक्षण किए हैं, जबकि भारत और पाकिस्तान ने 1998 में परीक्षण किए थे। ट्रंप का बयान हाल के अमेरिकी-रूसी तनावों के बीच आया है, जिसमें यूक्रेन युद्ध पर बातचीत रद्द होने और मॉस्को की युद्धविराम से इनकार का मुद्दा शामिल है। रूसी संसद के हॉकिश सदस्यों ने पहले ही नए परीक्षणों की मांग की है, और पुतिन का यह कदम वैश्विक परमाणु अप्रसार व्यवस्था को चुनौती दे सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिका वास्तव में पूर्ण परीक्षण शुरू करता है, तो रूस का जवाब न केवल परीक्षणों तक सीमित रह सकता है, बल्कि नई हथियार प्रणालियों के विकास को भी गति दे सकता है। 


रूस ने दी बड़ी चेतावनी 

रूसी विदेश मंत्री लावरोव ने चेतावनी दी कि “यदि कोई मोरेटोरियम तोड़ता है, तो रूस उचित कदम उठाएगा।” अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र, इस विकास पर नजर रखे हुए है, क्योंकि इससे वैश्विक स्थिरता खतरे में पड़ सकती है। रूस ने कहा है कि प्रस्ताव जल्द ही तैयार हो जाएंगे, और परिणामों को सार्वजनिक किया जाएगा। (भाषा)

 

 

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