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शुभांशु शुक्ला के साथ अंतरिक्ष में जा रहे हैं टार्डिग्रेड्स, इस छोटे जीव की खासियत जान हैरान रह जाएंगे आप

Edited By: Amit Mishra @AmitMishra64927 Published : Jun 09, 2025 04:03 pm IST, Updated : Jun 09, 2025 04:03 pm IST

टार्डिग्रेड्स एक्सट्रीम कंडीशन में भी जीवित रह सकते हैं। अंतरिक्ष में इन जीवों पर कई तरह के परीक्षण हो चुके हैं। भारत के अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला अपने स्पेस मिशन के दौरान टार्डिग्रेड्स पर एक्सपेरिमेंट करेंगे।

टार्डिग्रेड- India TV Hindi
Image Source : AP टार्डिग्रेड

Tardigrades In Space: भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला एक्सिओम स्पेस के Ax-4 मिशन पर अंतरिक्ष में जाने वाले हैं। इस बीच अजीब से दिखने वाले टार्डिग्रेड्स को भी अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। टार्डिग्रेड्स का आकार इतना छोटा होता है कि इन्हें नंगी आंखों से नहीं देखा जा सकता है। भले ही यह जीव बेहद छोटा है लेकिन चैम्पियन सर्वाइवर है। यह उन तमाम बेरहम हालातों का सामना कर सकता है जो इंसानों को खत्म कर सकते हैं। टार्डिग्रेड्स को जल भालू भी कहा जाता है। अब ऐसे में सवाल यह है कि टार्डिग्रेड आखिर इतने मजबूत सर्वाइवर कैसे हो गए कि वो अंतरिक्ष में भी जीवित रह सकते हैं। चलिए इस बारे में जानते हैं।

टार्डिग्रेड के बारे में जानें

टार्डिग्रेड्स बेहद  सूक्ष्म जलीय जीव हैं, इनके 8 पैर होते हैं। छोटे आकार के बावजूद इंसानों को टार्डिग्रेड्स के बारे में लंबे समय से जानकारी है। पहली बार 1773 में इसे जर्मन प्रकृतिवादी जोहान ऑगस्ट एफ्रैम गोएज ने खोजा था। छोटे आकार के बावजूद इनकी बनावट जटिल है।  वैज्ञानिकों ने लगभग 1,300 टार्डिग्रेड प्रजातियों की पहचान की है। 

टार्डिग्रेड

Image Source : AP
टार्डिग्रेड

जिंदा रहेगा टार्डिग्रेड

टार्डिग्रेड्स किसी भी परिस्थिति में खुद को जिंदा बचाए रखने में सक्षम है। भीषण गर्मी हो या ठंड ये बच जाएंगे। इन्हें पानी के ब्वायलिंग प्वाइंट से कहीं अधिक के तापमान तक खौला दीजिए, ये जिंदा बच सकते हैं। हजारों गुना ज्यादा रेडिएशन से बच सकते हैं। यह एकमात्र ऐसे जीव हैं जिनके बारे में हम जानते हैं जो अंतरिक्ष में भी जीवित रह सकते हैं। 

जानें रोचक तथ्य

द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार नॉर्वे में ओस्लो यूनिवर्सिटी के प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय के जेम्स फ्लेमिंग के अनुसार एक टार्डिग्रेड के पास मजह कुछ हफ्ते की ही एक्टिव लाइफ होती है। लेकिन, अगर इसके बीच कोई चरम स्थिति आती है तो वह इन-एक्टिव फेज में चला जाता है जिसे सुपर-हाइबर्नेशन की स्थिति कहते हैं। इस स्थिति में वह एक सदी तक भी जिंदा रह सकता है। इसे तुन अवस्था भी कहा जाता है। 

टार्डिग्रेड

Image Source : AP
टार्डिग्रेड

पहले भी किए गए हैं परीक्षण

2007 में यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ने अपने एक मिशन में रूसी कैप्सूल से लगभग 3,000 टार्डिग्रेड्स को 10 दिनों के लिए अंतरिक्ष में रखा गया था। टार्डिग्रेड्स को 2 हजार किमी से कम ऊंचाई में छोड़ दिया गया था। रिपोर्ट के अनुसार दो-तिहाई से अधिक टार्डिग्रेड इस मिशन में बच गए और पृथ्वी में लौटने पर उन्होंने प्रजनन भी किया।

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